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    प्रयागराज में महिला हिंसा, प्रतिरोध पर कन्वेंशन:एसिड अटैक सर्वाइवर रूपाली ने साझा की आपबीती, डॉ. सईदा हमीद ने की शिरकत

    4 hours ago

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    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रयागराज के स्वराज विद्यापीठ में "महिलाओं पर बढ़ती हिंसा और प्रतिरोध के रास्ते" विषय पर एक दिवसीय कन्वेंशन का आयोजन किया गया। शनिवार को हुए इस कार्यक्रम में शहर की प्रगतिशील महिलाओं ने पितृसत्ता और सामाजिक रूढ़ियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। यह कन्वेंशन "महिला अधिकारों के लिए समर्पित इलाहाबाद के लोग" के बैनर तले आयोजित किया गया था। कन्वेंशन की मुख्य वक्ता, एनएफआईडब्ल्यू की अध्यक्ष और पद्मश्री डॉ. सईदा हमीद ने महिलाओं के साहस की सराहना की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक वतनपरस्त रही हैं। डॉ. हमीद ने सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए बताया कि मुस्लिम महिलाओं ने कितने संगठित और प्रभावी ढंग से आंदोलन किए। डॉ. हमीद ने विभाजन के दौर की यादें साझा करते हुए बताया कि उस कठिन समय में भी महिलाओं ने घर लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी। उन्होंने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा करते हुए नई पीढ़ी को सतर्क रहने की सलाह भी दी। पीयूसीएल (PUCL) की राष्ट्रीय सचिव लारा जेसानी ने महिलाओं के कानूनी अधिकारों की सीमाओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज भी लड़कियों की नागरिकता और शिक्षा को पुरुषों से अलग नजरिए से देखा जाता है। जेसानी ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को केवल कानूनों से ही नहीं, बल्कि अदालतों की सोच से भी लड़ना पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि लंबे संघर्ष के बाद मिले कानूनी अधिकारों को पितृसत्तात्मक मानसिकता आज भी पीछे धकेलने का प्रयास कर रही है। कन्वेंशन में एसिड अटैक सर्वाइवर रूपाली विश्वकर्मा ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि ऐसे हमलों के पीछे अक्सर 'पितृसत्तात्मक ईर्ष्या' काम करती है। रूपाली ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि हमले के बाद समाज और कभी-कभी परिवार भी पीड़िता के साथ खड़े होने के बजाय उसके खिलाफ हो जाता है।
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