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    रामलला का सूर्य तिलक, ललाट पर 4 मिनट पड़ेंगी किरणें:तीन घंटे ज्यादा होंगे दर्शन, अयोध्या के 10 हजार मंदिरों में मनेगा जन्मोत्सव

    4 hours ago

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    अयोध्या में आज 10 हजार मंदिरों में रामनवमी मनाई जाएगी। खास आयोजन राम मंदिर में होगा। यहां दोपहर ठीक 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया जाएगा। इस दौरान करीब 4 मिनट तक सूर्य की किरणें रामलला के ललाट पर पड़ेंगी। आम दिनों के मुकाबले 27 मार्च को रामनवमी के अवसर पर रामलला के दर्शन के लिए तीन घंटा ज्यादा समय मिलेगा। आम दिनों में दर्शन का समय सुबह 6:30 से रात 9:30 तक रहता है। रामनवमी पर श्रद्धालु सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक रामलला के दर्शन कर सकेंगे। सूर्य तिलक से आधा घंटा पहले और आधा घंटा बाद तक वीआईपी एंट्री पर रोक रहेगी। आरती पास धारकों के लिए राम मंदिर ट्रस्ट ने एक अलग से लाइन की व्यवस्था की है। रामलला के ललाट पर सूर्य तिलक वैज्ञानिक पद्धति से होगा। बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने 24 मार्च (मंगलवार) को राम मंदिर में लगाए गए उपकरणों का परीक्षण किया था। तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि उपकरणों के सहारे दोपहर ठीक 12 बजे भगवान सूर्य की किरणें परावर्तित होकर भगवान के ललाट पर पड़कर तिलक का स्वरूप धारण करेंगी। इसे 4 मिनट तक देखा जा सकेगा। सूर्य तिलक से जुड़ी 2024 की ये 3 तस्वीरें देखिए… ड्रोन से होगी निगरानी, AI का इस्तेमाल होगा अयोध्या में रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। 1000 से ज्यादा CCTV से मॉनिटरिंग हो रही है। ड्रोन से निगरानी का ट्रायल भी हो चुका है। राम जन्मभूमि के SP (सुरक्षा) बलरामाचारी दुबे ने कहा- त्योहार के दौरान की व्यवस्थाओं के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों से बात हो गई है। परिसर ​के आसपास स्थित भवनों पर भी सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। प्रयागराज में महाकुंभ में ड्यूटी कर चुकी फायर टेंडर की टीम को बुलाया गया है। चूंकि लोग सरयू स्नान के लिए भी जाते हैं, इसलिए घाट और नदी में SDRF और NDRF जिम्मेदारी संभालेगी। एडीजी जोन प्रवीण कुमार ने कहा कि भारी वाहनों को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से भेजा जाएगा। सुरक्षा के लिए पैरामिलिट्री फोर्स के साथ PAC और सिविल पुलिस तैनात रहेगी। डीएम निखिल टीकाराम पुंडे ने बताया- श्रद्धालु ज्यादा होंगे। उन्हें दर्शन करने के दौरान दिक्कत न हो, हमारा इस पर फोकस है। VIP पास कैंसिल कर दिए गए हैं। जगह-जगह LED स्क्रीन लगाकर दर्शन कराए जा रहे हैं। मंदिर जाने वाले सभी रास्तों पर होगा रेड कारपेट रामलला को 56 भोग लगेंगे राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया- रामलला के जन्म के बाद उन्हें 56 तरह के व्यंजन का भोग लगेगा। इसमें फलाहार, कुट्‌टू के आटा की पंजीरी, सिंघाड़े के आटा से तैयार की गई पंजीरी, धनिया और राम दाना की पंजीरी से भोग लगाया जाएगा। यह सब करीब 10 क्विंटल होगा, जो बाद में श्रद्धालुओं को बांटा जाएगा। भोग में यह भी शामिल होगा… रामलला धारण करेंगे स्वर्ण जड़े पीले वस्त्र रामलला का शुक्रवार सुबह 9 बजे दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, नारियल पानी और चंदन से अभिषेक किया जाएगा। ​​​जन्म लेने के बाद रामलला को स्वर्ण जड़ित पीतांबर वस्त्र पहनाए जाएंगे। कुर्ता और धोती को तैयार करने में 2 महीने का समय लगा है। इसमें सोने और चांदी के तारों से कढ़ाई की गई है। रामलला सिर पर सोने का मुकुट और स्वर्ण आभूषण पहनेंगे। उनके मुकुट में कई हीरे जड़े हैं। उनके हाथों में सोने का धनुष-बाण होगा। माथे पर हीरे और माणिक जड़ित तिलक होगा। रामनवमी पर फूलों से गर्भगृह को सजाया गया है। आरती-पूजन की व्यवस्था जानिए… सूर्य तिलक कैसे होगा, यह भी समझें… IIT रुड़की ने तैयार किया है खास सिस्टम सूर्य तिलक के लिए IIT रुड़की सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ने एक खास ऑप्टो मैकेनिकल सिस्टम तैयार किया है। इसमें मंदिर के सबसे ऊपरी तल (तीसरे तल) पर लगे दर्पण पर सूर्य की किरणें पड़ेंगी। दर्पण से 90 डिग्री पर परावर्तित होकर ये किरणें एक पीतल के पाइप में जाएंगी। पाइप के छोर पर एक दूसरा दर्पण लगा है। इस दर्पण से सूर्य किरणें एक बार फिर से परावर्तित होंगी और पीतल की पाइप के साथ 90 डिग्री पर मुड़ जाएंगी। दूसरी बार परावर्तित होने के बाद सूर्य किरणें लंबवत दिशा में नीचे की ओर चलेंगीं। किरणों के इस रास्ते में एक के बाद एक तीन लेंस पड़ेंगे, जिनसे इनकी तीव्रता और बढ़ जाएगी। इसके बाद लंबवत पाइप जाती है। लंबवत पाइप के दूसरे छोर पर एक और दर्पण लगा है। बढ़ी हुई तीव्रता के साथ किरणें इस दर्पण पर पड़ेंगी और दोबारा 90 डिग्री पर मुड़ जाएंगी। 90 डिग्री पर मुड़ी ये किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी। इस तरह से राम लला का सूर्य तिलक पूरा होगा। सूर्य किरणों का यह तिलक 75 मिमी के गोलाकार रूप में होगा। दोपहर 12 बजे सूर्य किरणें रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी। करीब चार मिनट तक किरणें रामलला के मुख मंडल को प्रकाशमान करेंगी।
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