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    रामललला के जन्मोत्सव पर अयोध्या उल्लास में डूबी:संपूर्ण वातावरण भक्तिरस में डूब गया,रामनाम की गूंज बढ़ती जा रही

    2 hours ago

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    अयोध्या की पुण्यभूमि एक बार पुनः रामनाम की मधुर अनुगूंज से आलोकित है। सरयू तट पर बसी यह दिव्य नगरी इन दिनों श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत संगम बनी हुई है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव की पावन बेला निकट आते ही संपूर्ण वातावरण भक्तिरस में डूब गया है। मंदिरों की घंटियों, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों की स्वर लहरियाँ हर दिशा में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर रही हैं।श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण उपरांत अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब निरंतर उमड़ रहा है, जिससे नगर की धार्मिक आभा और भी प्रखर हो उठी है। इसी आध्यात्मिक परिदृश्य में स्थित जानकी महल इन दिनों विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। माता सीता के मायके स्वरूप प्रतिष्ठित यह धाम मिथिला परंपरा की सजीव झांकी प्रस्तुत करता है, जहाँ प्रत्येक अनुष्ठान और उत्सव उसी सांस्कृतिक शैली में संपन्न होता है, यह पूरा उत्सव ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया संयोजन में मनाया जा रहा है। बुधवार को, जन्मोत्सव से पूर्व, संस्कृत धुनों की सुमधुर प्रस्तुति ने वातावरण को ऐसा आलोकित किया कि मानो स्वयं देवगण अवतरित हो उठे हों। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर इस दिव्य अनुभूति में डूबते चले गए। नागपुर की युवा संगीत मंडली ‘द अनहद’ अपनी प्रस्तुति से भक्ति और आधुनिकता का सुरम्य समन्वय प्रस्तुत कि, जो उत्सव को नई ऊँचाइयों तक ले जा रहा है।आगामी 27 मार्च को प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर विशेष पूजन-अर्चन, प्रसाद वितरण तथा विविध धार्मिक आयोजनों की भव्य श्रृंखला आयोजित होगी। उल्लेखनीय है कि जन्मोत्सव के पश्चात भी उत्सव की यह अविरल धारा छह दिनों तक प्रवाहित होती रहेगी। अंततः ‘भगवान की छुट्टी’ की परंपरा के साथ इस दिव्य आयोजन का समापन होगा, जो श्रद्धालुओं के हृदय में अनंत काल तक स्मृतियों के रूप में अंकित रहेगा। जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानियां के अनुसार अयोध्या आज केवल एक नगर नहीं, अपितु जीवंत आस्था, परंपरा और संस्कृति का आलोकित प्रतीक बन चुकी है—जहाँ हर क्षण, हर स्वर और हर श्वास में श्रीराम का ही वास है।
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