Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    संघर्ष, ट्रॉमा-रिजेक्शन से उठकर स्ट्रॉन्ग एक्ट्रेस बनीं भूमि पेडनेकर:बोलीं- स्कूल में बुलिंग होती थी, तभी सोचा कि एक दिन सबको कुछ बनकर दिखाऊंगी

    2 hours ago

    1

    0

    संघर्ष, ट्रॉमा, रिजेक्शन और सामाजिक तानों के बीच खुद को साबित करने वाली अभिनेत्री का नाम है भूमि पेडनेकर। मुंबई की चमकदार फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब शुरुआत आत्म-संदेह, असुरक्षा और निजी आघातों से भरी हो। स्कूल के दिनों में बुलिंग का सामना करने वाली भूमि को उनके वजन और लुक्स को लेकर ताने सुनने पड़ते थे, लेकिन उन्होंने इन्हीं अनुभवों को अपनी ताकत बना लिया। 14 साल की उम्र में छेड़छाड़ की घटना और 18 वर्ष की उम्र में पिता के निधन ने उन्हें भीतर से झकझोर दिया, पर टूटने के बजाय उन्होंने जिम्मेदारी उठाई और खुद को मजबूत बनाया। फिल्मी सफर भी आसान नहीं रहा। पारंपरिक हीरोइन जैसे लुक्स न होने की वजह से उन्हें कई ऑडिशन में रिजेक्शन झेलना पड़ा। यहां तक कि एक्टिंग कोर्स से निकाले जाने का झटका भी लगा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। असिस्टेंट कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम करते हुए उन्होंने सिनेमा को करीब से समझा और फिर ‘दम लगा के हईशा’ से ऐसा डेब्यू किया जिसने उन्हें रातोंरात गंभीर अभिनेत्री के रूप में स्थापित कर दिया। 30 किलो वजन बढ़ाने का साहसिक फैसला हो या बाद में फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन, भूमि ने हर चुनौती को स्वीकार किया। आज वह कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा की मजबूत और भरोसेमंद आवाज बन चुकी हैं। आज की सक्सेस स्टोरी में जानेंगे भूमि पेडनेकर के करियर और जीवन से जुड़ी ऐसी ही कुछ और खास बातें.. भूमि पेडनेकर का जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि भूमि पेडनेकर का जन्म 18 जुलाई 1989 को मुंबई में हुआ। वे एक शिक्षित और सुसंस्कृत परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता सतीश पेडनेकर महाराष्ट्र सरकार में होम और लेबर मिनिस्टर रह चुके थे, जबकि उनकी मां सुमित्रा हुड्डा पेडनेकर सामाजिक कार्यों से जुड़ी रही हैं। भूमि की एक बहन भी हैं, समीक्षा पेडनेकर, जो वकालत के पेशे में हैं। स्कूल के दिन और बुलिंग का अनुभव भूमि ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई के आर्य विद्या मंदिर स्कूल, जुहू से पूरी की। स्कूल के दिनों में उन्हें बुलिंग का सामना भी करना पड़ा। कभी उनके वजन को लेकर टिप्पणी की जाती, तो कभी उनके लुक्स पर तंज कसा जाता। भूमि कहती हैं कि जब स्कूल में बुलिंग होती थी, तो घर आकर उन्हें पूरा सपोर्ट मिलता था। उनका आत्मविश्वास कभी नहीं टूटा। वे बताती हैं कि जब भी स्टेज पर जाती थीं, तो उन्हीं बुलीज को देखती थीं और मन में ठान लेती थीं कि एक दिन खुद को साबित करके दिखाएंगी। यहीं से उनके भीतर अभिनेत्री बनने का सपना और मजबूत हुआ। 14 साल की उम्र में छेड़छाड़ की घटना, भीतर तक हिला देने वाला अनुभव भूमि का बचपन आम दिखने वाला जरूर था, लेकिन भीतर कई अनकहे संघर्ष थे। 14 साल की उम्र में बांद्रा के एक मेले में उनके साथ छेड़छाड़ की घटना हुई। यह अनुभव उनके लिए गहरा मानसिक आघात लेकर आया। भूमि कहती हैं कि उस घटना ने उन्हें भीतर तक हिला दिया था और लंबे समय तक वे असुरक्षित महसूस करती रहीं। 18 की उम्र में पिता का निधन, अचानक संभाली परिवार की जिम्मेदारी जब भूमि 18 वर्ष की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा भावनात्मक झटका था। पिता उनके सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम थे। अचानक परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। हीरोइन जैसे लुक पर सवाल, ऑडिशन में लगातार झेलना पड़ा रिजेक्शन इस घटना ने उन्हें भीतर से परिपक्व बना दिया। उन्होंने तय किया कि वे खुद को कमजोर नहीं पड़ने देंगी। यही वह मोड़ था, जब उन्होंने करियर को गंभीरता से लेना शुरू किया। भूमि बचपन से ही अभिनय की ओर आकर्षित थीं। वे सिनेमा और थिएटर से बेहद प्रभावित थीं। किशोरावस्था में ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में ही करियर बनाना है। व्हिस्टलिंग वुड्स इंटरनेशनल से निकाली गईं, लेकिन सपनों से नहीं टूटीं लेकिन शुरुआत आसान नहीं रही। उन्होंने ऑडिशन दिए, लेकिन कई बार रिजेक्ट हुईं। उन्हें बताया जाता था कि वे पारंपरिक हीरोइन जैसी नहीं दिखतीं। इंडस्ट्री में जहां एक खास तरह की खूबसूरती को तरजीह दी जाती है, वहां भूमि के लिए खुद को स्वीकार करवाना चुनौतीपूर्ण था। भूमि ने व्हिस्टलिंग वुड्स इंटरनेशनल में एक्टिंग कोर्स में दाखिला लिया, लेकिन खराब उपस्थिति के कारण उन्हें वहां से निकाल दिया गया। हालांकि, इस झटके ने उन्हें तोड़ा नहीं बल्कि और मजबूत बनाया। यशराज फिल्म्स में असिस्टेंट कास्टिंग डायरेक्टर बनीं, शानू शर्मा ने दिया मौका व्हिस्टलिंग वुड्स इंटरनेशनल से निकाले जाने और लगातार मिल रहे रिजेक्शन के बीच उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने YRF में ऑडिशन दिया था। उस समय कंपनी की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा नई टीम बना रही थीं। भूमि की समझ, स्क्रिप्ट की पकड़ और कलाकारों को परखने की क्षमता देखकर उन्हें असिस्टेंट कास्टिंग डायरेक्टर के तौर पर रख लिया गया। ‘दम लगा के हईशा’ से मिला बड़ा ब्रेक, 30 किलो वजन बढ़ाया भूमि ने लगभग 5-6 साल तक YRF में काम किया और कई फिल्मों की कास्टिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इसी दौरान उन्हें कैमरे के सामने और पीछे दोनों की गहरी समझ मिली। इसी दौरान उन्हें फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ के लिए ऑडिशन देने का मौका मिला। यह फिल्म 2015 में रिलीज हुई और इसमें उन्होंने एक ओवरवेट लड़की ‘संध्या’ का किरदार निभाया। इस रोल के लिए उन्होंने करीब 30 किलो वजन बढ़ाया। ‘दम लगा के हईशा’ भूमि के करियर का टर्निंग पॉइंट ‘दम लगा के हईशा’ भूमि पेडनेकर के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने संध्या का किरदार निभाया, जो पारंपरिक सोच वाले समाज में आत्मसम्मान के साथ जीने वाली लड़की है। अपनी पहली ही फिल्म से भूमि ने साबित कर दिया कि वह ग्लैमरस लॉन्च नहीं, बल्कि दमदार अभिनय के दम पर इंडस्ट्री में आई हैं। संध्या के किरदार के लिए 30–35 किलो वजन बढ़ाने की चुनौती इस किरदार के लिए भूमि को जानबूझकर करीब 30–35 किलो वजन बढ़ाना पड़ा। यह फैसला आसान नहीं था। वजन बढ़ाना शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। समाज जहां पहले से ही उनके वजन को लेकर टिप्पणी करता था, वहीं अब उन्हें और अधिक आलोचना झेलनी पड़ी। भूमि ने कहती हैं कि उन्होंने यह रोल इसलिए चुना क्योंकि यह असली था। अगर एक सच्ची कहानी के लिए शरीर बदलना पड़े, तो उन्हें कोई अफसोस नहीं था। हाई-कैलोरी डाइट और बिना एक्सरसाइज के ट्रांसफॉर्मेशन भूमि ने करीब 4–5 महीनों में 30 किलो वजन बढ़ाया। इसके लिए उन्होंने हाई-कैलोरी डाइट ली, ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और घर का पारंपरिक खाना खाया। उस समय उन्होंने एक्सरसाइज लगभग बंद कर दी थी, ताकि शरीर स्वाभाविक रूप से भारी दिखे। Filmfare में बेस्ट फीमेल डेब्यू और मजबूत शुरुआत फिल्म रिलीज होने के बाद भूमि को आलोचकों की जमकर तारीफ मिली। उन्हें इस फिल्म के लिए Filmfare Awards में बेस्ट फीमेल डेब्यू का अवॉर्ड मिला। इंडस्ट्री में उनकी पहचान एक सीरियस और कंटेंट-ड्रिवन अभिनेत्री के रूप में बनने लगी। फिटनेस जर्नी: 4-6 महीनों में वजन घटाने का सफर फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद भूमि ने धीरे-धीरे फिटनेस रूटीन और संतुलित डाइट के जरिए वजन कम किया। करीब 4-6 महीनों में उन्होंने ट्रांसफॉर्मेशन किया। वह सुबह गुनगुना पानी पीती थीं। दिन में दाल, सब्जी और रोटी जैसे सादा घर का खाना खाती थीं। जंक फूड और शुगर से दूरी बना ली थी। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कोर एक्सरसाइज के जरिए उन्होंने वजन कम किया। उनका यह ट्रांसफॉर्मेशन सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ से कमर्शियल सिनेमा में मजबूत पहचान ‘दम लगा के हईशा’ के बाद भूमि को अक्षय कुमार के साथ ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ में बड़ा मौका मिला। इस फिल्म के बाद कमर्शियल सिनेमा में भी उनकी मजबूत जगह बन गई। अब वह सिर्फ कंटेंट फिल्म की अभिनेत्री नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी भरोसेमंद नाम बन चुकी थीं। कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों की भरोसेमंद एक्ट्रेस इसके बाद भूमि ने लगातार अलग-अलग तरह के किरदार चुने। ‘शुभ मंगल सावधान’ ने उन्हें शहरी कंटेंट सिनेमा की भरोसेमंद अभिनेत्री बनाया। वहीं ‘लस्ट स्टोरीज’ में उनके बोल्ड किरदार ने उनके चयन की विविधता दिखाई। ‘बाला’ में उन्होंने एक आत्मविश्वासी वकील का किरदार निभाया, जो समाज के सौंदर्य मानदंडों को चुनौती देती है। ‘सांड की आंख’ में 60 वर्षीय चंद्रो तोमर का किरदार ‘सांड की आंख’ में भूमि ने 60 साल की शूटर चंद्रो तोमर का किरदार निभाया, जो उनकी उम्र से लगभग दोगुना बड़ा रोल था। इसके लिए उन्हें भारी प्रोस्थेटिक मेकअप के साथ लंबी शूटिंग करनी पड़ती थी। रोज कई घंटे मेकअप चेयर पर बैठना, देहाती बोली सीखना, बॉडी लैंग्वेज पर काम करना और शूटिंग की ट्रेनिंग लेना, यह रोल उनके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद थकाने वाला था। ‘भक्षक’ में परिपक्व अभिनय फिल्म ‘भक्षक’ में भूमि ने एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट का किरदार निभाया, जो एक संवेदनशील अपराध मामले को उजागर करती है। यह किरदार भावनात्मक रूप से बेहद भारी था। असली घटनाओं से प्रेरित कहानी होने के कारण उन्हें गहरी रिसर्च करनी पड़ी। कई दृश्य मानसिक रूप से डिस्टर्ब करने वाले थे। इस फिल्म को उनके करियर की सबसे परिपक्व परफॉर्मेंस में गिना गया। ‘दलदल’ में डीसीपी रीटा फरेरा का रोल हाल ही में भूमि वेब सीरीज ‘दलदल’ में नजर आईं, जिसमें उन्होंने डीसीपी रीटा फरेरा का किरदार निभाया। इस भूमिका में उनका सख्त और गंभीर अंदाज देखने को मिला, जिसने उनके अभिनय के नए आयाम सामने रखे। बुलीइंग, एक्जिमा और आत्मस्वीकृति का सफर भूमि ने स्वीकार किया है कि वह स्कूल में बुलीइंग का शिकार रही हैं, क्योंकि वह लोकप्रिय सौंदर्य मानकों में फिट नहीं बैठती थीं। अपने जीवन के एक बड़े हिस्से तक उन्हें लगता था कि सब कुछ ठीक है, लेकिन बाद में उन्होंने खुद को समझना शुरू किया। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्मों के चयन में उनके निजी अनुभवों की झलक मिलती है। वह अपने काम के जरिए उन अनुभवों को स्वीकार करती हैं और खुलकर सामने लाती हैं। भूमि लंबे समय तक एक्जिमा जैसी त्वचा समस्या से भी जूझती रहीं। ग्लैमर इंडस्ट्री में जहां परफेक्ट स्किन को महत्व दिया जाता है, वहां यह मानसिक दबाव का कारण था। कई बार शूटिंग के दौरान भी उन्हें तकलीफ झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। _________________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... रिश्तेदारों ने कहा- फिल्मों में जाएगी तो शादी नहीं होगी:‘हीरोइन जैसी नहीं दिखती’ कहकर ऑडिशन में हुईं रिजेक्ट, ‘एनिमल’ से नेशनल क्रश बनीं तृप्ति डिमरी दिल्ली के वसंत विहार की एयर इंडिया कॉलोनी में पली-बढ़ीं तृप्ति डिमरी के सपनों की उड़ान घर के सांस्कृतिक माहौल से शुरू हुई। पिता दिनेश डिमरी रामलीला मंच के सक्रिय कलाकार रहे, लेकिन हालातों ने उनके अभिनय के सपने को पेशे में बदलने नहीं दिया।पूरी खबर पढ़ें..
    Click here to Read more
    Prev Article
    सलीम खान ICU में, आमिर और गर्लफ्रेंड गौरी मिलने पहुंचे:डॉक्टर बोले- रिकवरी कर रहे हैं; ब्रेन हैमरेज के बाद राइटर को एडमिट किया था
    Next Article
    सुपर-8 के मैचों का पूरा शेड्यूल:21 फरवरी से शुरुआत, 3 डबल हेडर होंगे, भारत 22 फरवरी को साउथ अफ्रीका से खेलेगा

    Related मनोरंजन Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment