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    सुप्रीम कोर्ट बोला- कैंसर दवाओं की ऊंची कीमत नरसंहार जैसी:₹2700 की दवा पर कीमत ₹27 हजार कैसे लिखी; हर साल ₹5,381 करोड़ का दवा कारोबार

    1 day ago

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    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि ₹2700 की कैंसर की दवा पर MRP ₹27,000 क्यों है। कोर्ट ने दवाओं की कीमतों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह नरसंहार है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मंगलवार को दवाओं की कीमत और जेनेरिक दवाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता मौजूद थे। कोर्ट ने कहा- यह नरसंहार है। यह कैसे हो रहा है? कॉर्पोरेट किसी को नहीं बख्शते, शव भी बाहर नहीं जाने देते। सरकार के फार्मास्यूटिकल्स विभाग की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में भारत में कैंसर-रोधी दवाओं की सालाना बिक्री ₹5,281 करोड़ रही। 2021-22 में यह ₹3,382 करोड़ थी। यानी तीन साल में बिक्री करीब 56% बढ़ी। कोर्ट का कमेंट- बोझ टैक्सपेयर्स पर, सरकार बोली- फायदा निजी अस्पतालों को कैसे तय होती है दवा की कीमत, 4 पॉइंट 1. ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) जरूरी दवाओं की कीमत कंट्रोल करता है। 2013 के DPCO तहत नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM) में शामिल दवाओं की अधिकतम कीमत सरकार तय करती है। 2. बाजार में बिक रही दवाओं की कीमत के आधार पर जरूरी दवाओं की अधिकतम सीमा तय की जाती है। इससे ज्यादा कीमत पर दवा बेचना गैरकानूनी है। 3. स्वास्थ्य मंत्रालय दवाओं की सुरक्षा, असर और कीमत को देखते हुए जरूरी दवाओं की लिस्ट बनाता है। इसमें देश में आम बीमारियों और लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों का ध्यान रखा जाता है। 4. इस लिस्ट की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और जरूरत के अनुसार नई दवाएं जोड़ी जाती हैं। जो दवाएं इस सूची में नहीं होतीं, उनकी कीमतों पर सरकार का सीधा नियंत्रण कम होता है। पिछली सुनवाई में पूछा था- 10 गुना कीमत क्यों वसूल रहे इससे पहले 22 सितंबर की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कहा- “यह मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती है। जरूरी दवाओं के लिए ऐसी कीमतें कैसे तय करने दी जा सकती हैं।” पढ़ें पूरी खबर… ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… ज्यादा गर्म चाय का शौक खतरनाक, 65°C से ज्यादा गर्म तो कैंसर का रिस्क, चाय, कॉफी, सूप हमेशा ठंडा करके पिएं आपने अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना होगा। हमारे यहां अच्छी चाय की पहचान सिर्फ उसके स्वाद से नहीं, उसकी गर्माहट से भी होती है। मेहमान के सामने चाय रख दी जाए और वह थोड़ी ठंडी निकल जाए, तो कई लोग इसे मेजबानी की कमी मान लेते हैं। लेकिन जिस गर्माहट को हम स्वाद, ताजगी और सुकून से जोड़ते हैं, वही शरीर के लिए परेशानी की वजह भी बन सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
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