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    सिस्टम की अंधेरगर्दी, खुले नाले ने ली युवक की जान:30 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, निगम की लापरवाही से काल के गाल में समाया हरदोई का तौहीद

    2 hours ago

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    बरेली का सेटेलाइट बस स्टैंड... जहाँ हर रोज हजारों कदम उम्मीदों के साथ बस की तलाश में थमती हैं, वहाँ सिस्टम ने 'मौत का एक जाल' बिछा रखा था। ​हरदोई का 30 साल का तौहीद... वह बस पकड़ने आया था, पर नगर निगम की 'कुंभकर्णी नींद' ने उसे काल के गाल में धकेल दिया। 30 घंटे का रेस्क्यू, एनडीआरएफ की टीमें और पांच जेसीबी... यह सब उस एक स्लैब की कीमत चुका रहे थे, जिसे लगाने की फुर्सत साहबों को एक साल से नहीं मिली। ​दुष्यंत कुमार ने शायद ऐसे ही मंजर के लिए कहा था- ​'यहाँ तो सिर्फ गूंगे और बहरे लोग बसते हैं, खुदा जाने यहाँ किस तरह का जलसा हुआ होगा।' ​परिवहन निगम के पत्रों को रद्दी समझने वाले हुक्मरान आज इसे 'महज एक हादसा' बता रहे हैं। जनाब, यह हादसा नहीं, 'प्रशासनिक हत्या' है! तौहीद की जेब से निकला आधार कार्ड उसकी पहचान तो बता गया, लेकिन उस खुले नाले ने पूरे सिस्टम की पहचान नंगी कर दी। ​सवाल बस एक है- अगली बारी किसकी है? क्योंकि यहाँ नाले नहीं, अधिकारियों के जमीर खुले पड़े हैं।" नोएडा के बाद अब बरेली में सिस्टम की लापरवाही ने एक युवक की जान ले ली। बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र स्थित सेटेलाइट बस स्टैंड पर एक खुले नाले में गिरकर युवक की मौत हो गई। 30 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद युवक का शव निकाला जा सका। मंगलवार रात साढ़े 9 बजे युवक नाले में गिरा था, जिसका शव गुरुवार रात 3 बजे बरामद हुआ। इस दौरान पूरा प्रशासनिक अमला युवक की तलाश में जुटा रहा। हादसे के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मंगलवार रात सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले सेटेलाइट बस स्टैंड पर एक खुले नाले में अचानक एक युवक गिर गया। पास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य, एसीएम सिटी सौरभ दुबे, सीओ सिटी थर्ड पंकज श्रीवास्तव और बारादरी इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय मौके पर पहुंचे और युवक की तलाश शुरू करवाई गई। कचरे और पानी के तेज बहाव ने रोका रास्ता मंगलवार रात करीब 12 बजे रेस्क्यू शुरू किया गया। सबसे पहले जेसीबी से नाले के कचरे को हटाना शुरू हुआ। मंगलवार पूरी रात रेस्क्यू चला, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। करीब 15 फीट गहरे नाले में भारी मात्रा में कचरा और पानी का तेज बहाव होने की वजह से काफी दिक्कतें आईं। बुधवार को दिनभर NDRF, SDRF और नगर निगम के कर्मचारी जुटे रहे। अंत में बस स्टैंड के पास के सभी स्लैब हटाकर कचरा साफ किया गया, तब जाकर रात 3 बजे शव मिला। आधार कार्ड से हुई मृतक की शिनाख्त युवक की पैंट की जेब से मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान हो सकी। मृतक का नाम तौहीद (30) है, जो उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मोहल्ला कटरा, शाहाबाद देहात का रहने वाला था। पुलिस आधार कार्ड के जरिए उसके परिजनों से संपर्क करने का प्रयास कर रही है। सिस्टम की अनदेखी का शिकार हुआ नौजवान माना जा रहा है कि तौहीद कहीं जाने के लिए बस अड्डे पर आया था। उसे बस पकड़नी थी, लेकिन वह सिस्टम की लापरवाही का शिकार हो गया। नगर निगम की एक छोटी सी चूक ने एक नौजवान को काल के गाल में धकेल दिया। अगर समय रहते इस नाले को ढका गया होता, तो आज तौहीद जिंदा होता। रेस्क्यू में लगी मशीनों और फोर्स की फौज नाले की सफाई और शव निकालने के लिए 80 मजदूर, 5 जेसीबी, 3 वाटर सक्शन पंप, 1 क्रेन, 4 ट्रैक्टर-ट्राली और 1 स्लैब काटने वाली पायलिंग मशीन लगाई गई। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए 1 सीओ, 2 इंस्पेक्टर, 10 सब-इंस्पेक्टर, 20 सिपाही और 15 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों सहित एक इंटरसेप्टर वाहन 30 घंटे तक लगातार डटा रहा। एक साल से खुला था मौत का जाल इस नाले की सफाई मई 2025 में हुई थी, तब सफाई के दौरान स्लैब टूट गया था। इसके बाद जिम्मेदारों ने इसे दोबारा ढकना जरूरी नहीं समझा। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मुताबिक, उन्होंने नगर निगम को कई पत्र लिखे, लेकिन अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोते रहे। बस स्टैंड पर रोजाना करीब 50 हजार यात्री आते हैं और 500 बसें संचालित होती हैं, जिससे यह खुला नाला हमेशा खतरा बना रहता है। जिम्मेदार मानने को तैयार नहीं अपनी गलती इतने बड़े हादसे और साफ तौर पर दिख रही लापरवाही के बावजूद अधिकारी इसे मानने को तैयार नहीं हैं। नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी का कहना है कि यह सिर्फ एक दुर्घटना है और इसमें विभाग की कोई लापरवाही नहीं है। प्रशासन और नगर निगम से 5 सवाल घटनाक्रम: मौत के 30 घंटों की टाइमलाइन तौहीद के गिरने से लेकर शव मिलने तक का पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है:
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