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    सेंट पेट्रिक्स के खिलाफ 'पापा' संस्था ने किया प्रर्दशन:महंगी किताब जरूरी कर शोषण कर रहे प्राइवेट स्कूल, BEO ने दिए किताबों की बक्री पर रोक के निर्देश

    8 hours ago

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    नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है, ऐसे में निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबें अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस (पापा संस्था) ने संजय प्लेस स्थित माहेश्वरी बुक डिपो पर प्रदर्शन किया। संस्था ने आरोप लगाया कि स्कूल निजी प्रकाशकों के साथ मिलकर महंगी किताबों को अनिवार्य कर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। नया सत्र शुरू होने से पहले पापा संस्था ने इसी मुद्दे पर पहले भी प्रदर्शन कर प्रशासन और स्कूलों को चेताया था। संस्था के राष्ट्रीय संयोजक दीपक सिंह सरीन ने बताया कि सेंट पैट्रिक जूनियर कॉलेज, वजीरपुरा द्वारा शासनादेशों के विपरीत प्री-प्राइमरी से कक्षा 10 तक की पुस्तकें तय दुकान से खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है। इस वर्ष भी पुस्तकों में बदलाव कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में स्टाफ द्वारा बुक पब्लिशर का प्रचार किया गया और स्कूल परिसर से ही यूनिफॉर्म खरीदने के लिए निर्धारित समय पर 3400 रुपये लाने का संदेश प्रसारित किया गया। सूचना मिलने पर मौके पर पूर्व डीआईओएस डॉ. मानवेंद्र सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी महेश पटेल और सहायक गोपाल कृष्ण पटल पहुंचे और निजी पुस्तकों की बिक्री तत्काल रोकने के निर्देश दिए। लेकिन अधिकारियों के जाते ही बिक्री दोबारा शुरू कर दी गई, जिसे पापा संस्था ने प्रशासनिक आदेशों की खुली अवहेलना बताया। संस्था के पदाधिकारी राघवेंद्र उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पढ़ने वाले गरीब बच्चों के लिए इतनी महंगी किताबें खरीदना संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा को व्यापार बना दिया गया तो समान अवसर का सिद्धांत खत्म हो जाएगा। अभिभावक अंकुर गौतम ने कहा कि निर्धारित दुकानों से खरीद का दबाव अनुचित व्यापारिक व्यवहार है और इससे शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। पापा संस्था ने पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच की मांग की है। साथ ही दोषी विद्यालयों पर सख्त कार्रवाई और निजी पुस्तक बिक्री के इस तंत्र पर रोक लगाने की भी मांग की गई है। संस्था ने कहा कि नया सत्र शुरू होने वाला है और इसी के पहले अभिभावकों की आवाज उठाना जरूरी था। उन्होंने चेताया कि यदि स्कूल और प्रकाशक इस तरह की मनमानी बंद नहीं करेंगे तो भविष्य में बड़े प्रदर्शन भी किए जाएंगे।
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