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    सात टप्पेबाजों को चार-चार साल का कारावास:तीन महिलाएं भी शामिल, सस्ता सोना बेचने का दिया था झांसा

    2 hours ago

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    औरैया के सदर कोतवाली क्षेत्र के छह माह पुराने धोखाधड़ी व टप्पेबाजी के मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निधि सिसौदिया ने नकली माल को असली बताकर ठगी करने वाले सात दोषियों को चार-चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। जिला जाजपुर (उड़ीसा) निवासी तीन महिलाओं सहित सातों आरोपियों ने शहर के एक व्यापारी को नकली सोना असली बताकर ठगने का प्रयास किया और दुकान में रखे मोबाइल, नकदी आदि पर हाथ साफ कर दिया। न्यायालय ने दोषियों दुखिया नायक, प्रताप सौंधी, राजू, माइकिल, शिवा, मीणा सरसा और दुर्गा प्रधान पर तीन-तीन हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अभियोजन अधिकारी प्रज्ञानंद शर्मा व डीबीए प्रवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि शहर के सदर बाजार, होमगंज निवासी सत्यजीत पुत्र स्व. हरिशंकर ने कोतवाली औरैया में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सोना सस्ते में देने का दिया झांसा रिपोर्ट के अनुसार, खानपुर चौराहा स्थित उसकी ‘वैष्णवी ट्रैवलर्स’ की दुकान पर 8 अक्टूबर 2025 की शाम करीब चार बजे सात लोग पहुंचे, जिनमें तीन महिलाएं और चार पुरुष थे। उन्होंने बताया कि उनके पास करीब एक किलो सोना है, जो उन्हें ट्रेन में पड़ा मिला था, जिसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपये है, लेकिन वे इसे सस्ते में बेच देंगे। इस पर वादी ने कहा कि वह सोने की जांच ज्वैलर्स से कराएगा। आरोपियों ने लाल कपड़े की पोटली में करीब पांच ग्राम सोना देकर एडवांस के तौर पर कुछ पैसे मांगे। वादी ने उन्हें पांच हजार रुपये दे दिए और बाकी रकम जांच के बाद देने की बात कही। इसके बाद वह सोने की जांच कराने सुनार की दुकान पर गया, जहां वह पूरी तरह नकली निकला। वादी जब वापस दुकान पर लौटा तो सभी आरोपी फरार हो चुके थे। दुकान में रखे दो एम्प्लीफायर, एक मोबाइल और रैक में रखे पांच हजार रुपये भी गायब मिले। उसने तत्काल खोजबीन की, लेकिन आरोपी हाथ नहीं आए। इसके बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने विवेचना कर आरोपियों को गिरफ्तार कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मुकदमे का विचारण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में हुआ और छह माह से कम समय में मामले का निस्तारण कर दिया गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि सभी आरोपी गरीब हैं, उनका यह पहला अपराध है, इसलिए उन्हें राहत दी जाए। वहीं अभियोजन पक्ष ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए कठोर सजा की मांग की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सीजेएम निधि सिसौदिया ने दोषियों को सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी दोषियों को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया।
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