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    शिक्षक आत्महत्या मामले में आरोपी लिपिक निलंबित:सीडीओ की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनीं, एक हफ्ते में देगी रिपोर्ट

    21 hours ago

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    देवरिया में कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले ने जिले के शिक्षा विभाग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक आरोपों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया और त्वरित कार्रवाई शुरू की। परिजनों की तहरीर पर संबंधित थाने में नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के निर्देश पर आरोपित पटल सहायक संजीव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो। इसके साथ ही, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। इस समिति में सदर एसडीएम और जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को सदस्य बनाया गया है। जांच टीम को एक सप्ताह के भीतर पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वेतन विवाद की पृष्ठभूमि और एसटीएफ की जांच जानकारी के अनुसार गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में वर्ष 2011 में चार तथा 2016 में तीन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। 9 जुलाई 2021 को एसटीएफ गोरखपुर ने तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी समेत 17 लोगों के विरुद्ध सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। जांच की आंच बीएसए कार्यालय तक पहुंची और वर्ष 2016 में नियुक्त शिक्षकों का वेतन वर्ष 2022 में बाधित कर दिया गया। प्रभावित शिक्षकों में कृष्ण मोहन सिंह भी शामिल थे। वेतन बंद होने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली। न्यायालय से राहत मिलने और वेतन भुगतान का आदेश जारी होने के बावजूद भुगतान न होने का आरोप है। सुसाइड नोट में गंभीर आरोप, कर्ज का दबाव शिक्षक के पास से मिले कथित सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया है कि वेतन बहाली के नाम पर बीएसए कार्यालय में तैनात एक बाबू ने वर्ष 2016 में नियुक्त तीनों शिक्षकों से 20-20 लाख रुपये की मांग की। आरोप है कि कृष्ण मोहन सिंह ने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये तक दे दिए, फिर भी उनका वेतन जारी नहीं हुआ। बताया जाता है कि वेतन न मिलने और कर्ज के बोझ के कारण वह मानसिक रूप से परेशान थे। वह लगातार बीएसए कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। घटना से एक दिन पूर्व भी उनके कार्यालय पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि अधिकारियों से उनकी क्या बातचीत हुई, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। शिक्षकों में रोष, ‘सिस्टम’ पर उठे सवाल इस घटना के बाद जिले भर के शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है। शिक्षक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं बीएसए कार्यालय के ‘सिस्टम’ को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कार्यालय के कर्मचारी और अधिकारी इस मामले में खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होगी तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
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