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    श्री रंग कला संस्थान ने दो नाटकों की प्रस्तुति:संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से ‘गिद्ध’ और ‘फुटपाथ का सम्राट’ का मंचन

    1 hour ago

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    श्री रंग कला सेवा संस्थान ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से दो प्रभावशाली नाटकों ‘गिद्ध’ और ‘फुटपाथ का सम्राट’ का मंचन किया। यह नाट्य प्रस्तुति राय उमानाथ बली प्रेक्षाग्रह, कैसरबाग में हुई। रुचिका ने इसका निर्देशन किया। दोनों प्रस्तुतियों ने दर्शकों को समाज की कड़वी सच्चाइयों को दिखाया । विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित पहला नाटक ‘गिद्ध’ उन लोगों की कहानी है जो मानवीय चेहरे के पीछे गिद्ध जैसी मानसिकता रखते हैं। यह एक ऐसे परिवार पर केंद्रित है जहां रमाकांत और उमाकांत अपने पिता की संपत्ति पर नजर गड़ाए हुए हैं, उनकी मृत्यु का इंतजार कर रहे हैं। मंच का संघर्ष दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया धन के लालच में दोनों भाई रिश्तों की गरिमा भूल जाते हैं। नाटक परिवार के भीतर स्वार्थ, लालच और विश्वासघात की परतों को उजागर करता है। मंच पर यह संघर्ष इतना सजीव था कि इसने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया।विजय तेंदुलकर का दूसरा चर्चित नाटक ‘फुटपाथ का सम्राट’ उन लोगों के जीवन को दर्शाता है जिनकी पूरी जिंदगी फुटपाथ पर बीतती है। शाहिर और तुक्या जैसे पात्र अपनी दोस्ती, सपनों और संघर्ष के साथ दर्शकों के सामने आते हैं। नाटक फुटपाथ की कठोर सच्चाई, भूख, बेबसी और छोटे-छोटे सपनों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करता है। यह संदेश देता है कि जीवन में जो कुछ भी मिला है, उसे स्वीकार कर आगे बढ़ना ही सच्चा साहस है। कलाकारों ने अपने अभिनय से जीत दर्शकों का दिल अभिनय की बात करें तो, ‘गिद्ध’ में उमाकांत की भूमिका आदर्श तिवारी ने और रमाकांत का किरदार राहुल मिश्रा ने निभाया। एकता सिंह ने माणिक और मुस्कान सोनी ने रमा के रूप में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। ‘फुटपाथ का सम्राट’ में आदर्श शाहिर, एकता सुंदरी और प्रमोद सहाय तुक्या के किरदार में नजर आए। दोनों प्रस्तुतियों ने दर्शकों को समाज की वास्तविकताओं पर विचार करने के लिए प्रेरित किया, एक ओर लालच की हकीकत तो दूसरी ओर संघर्ष की सच्चाई को दर्शाते हुए।
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