Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    तमिलनाडु में Pasumpon स्थित स्मारक पर Muthuramalinga Thevar की 119वीं जयंती मनाई गई

    49 minutes from now

    1

    0

    उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और ई. के. पलानीस्वामी सहित कई नेताओं और आम लोगों ने शुक्रवार को रामनाथपुरम के निकट पसुम्पोन में स्वतंत्रता सेनानी एवं आध्यात्मिक नेता मुथुरामलिंग थेवर की 119वीं जयंती और 64वीं गुरु पूजा के अवसर पर उनके स्मारक पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई में थेवर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। स्वतंत्रता सेनानी के स्मारक पर सुबह से ही सैकड़ों लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे।कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू हुआ। भीड़ पर नजर रखने के लिए पुलिस ने 10,000 जवानों को तैनात किया, 400 सीसीटीवी कैमरे लगाए और 38 निगरानी टावर बनाए। इसके अलावा यातायात के लिए भी कड़े प्रतिबंध लागू किए गए।पड़ोसी मदुरै में भी गोरीपालयम चौराहे पर स्थित थेवर की विशाल प्रतिमा के आसपास पुलिस ने यातायात व्यवस्था लागू की और दिनभर गतिविधियां सुचारू रखने के लिए जवानों को तैनात किया। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और बाद में पसुम्पोन के कामुथी स्थित उनके स्मारक पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के मंत्रियों आर. निर्मल कुमार, पी. मथन राजा और वी. के. राजीव सहित पार्टी के कई पदाधिकारियों ने गोरीपालयम चौराहे पर स्थित प्रमुख प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।इसके बाद वे पसुम्पोन पहुंचे और वहां भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने प्रदेश के राज्यपाल आर्लेकर एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. राधाकृष्णन के साथ स्मारक पर सजी हुई थेवर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। बाद में पत्रकारों से बातचीत में उपराष्ट्रपति ने कहा कि थेवर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रबल अनुयायी थे और उन्होंने तमिल क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक चेतना जागृत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।उन्होंने कहा कि थेवर को इस बात के लिए याद किया जाता है कि उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया, जबकि उनमें मुख्यमंत्री बनने की क्षमता थी। स्टालिन और पलानीस्वामी भी मदुरै पहुंचे। उन्होंने पहले गोरीपालयम चौराहे पर थेवर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और बाद में पसुम्पोन स्थित उनके स्मारक पर श्रद्धांजलि दी।अन्नाद्रमुक की पूर्व नेता वी. के. शशिकला और नाम तमिलर कच्ची के मुख्य समन्वयक सीमान ने भी थेवर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस बीच, मुख्यमंत्री विजय ने भी इस अवसर पर थेवर को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी के रूप में उनकी विरासत को याद किया, जिन्होंने राष्ट्रवाद, आध्यात्मिकता और सामाजिक न्याय के विचारों को एक सूत्र में पिरोया था।विजय ने कहा कि थेवर ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों का उत्साहपूर्वक प्रचार किया, आजाद हिंद फौज के लिए महत्वपूर्ण समर्थन जुटाया और देश की आजादी के लिए लगातार संघर्ष किया। विजय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि मुथुरामलिंग थेवर ने जाति और धर्म की सीमाओं को पार करते हुए मानवतावाद को अपने जीवन का आधार बनाया। उन्होंने लोगों से इस आदर्श मार्ग पर लगातार आगे बढ़ने का आह्वान किया।थेवर जयंती और गुरु पूजा के अवसर पर मुथुरामलिंग थेवर की जयंती के साथ-साथ उनकी पुण्यतिथि भी मनाई जाती है। वह एक राजनीतिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और मद्रास क्षेत्र में सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।वह अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रवादी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और भारत छोड़ो आंदोलन में भी हिस्सा लिया। इस दौरान अंग्रेजों ने उन्हें कई बार जेल में डाला था।थेवर की प्रमुख उपलब्धियों में से एक भेदभावपूर्ण ब्रिटिश आपराधिक जनजाति अधिनियम के खिलाफ चलाया गया अभियान शामिल है। इस कानून के तहत कुछ समुदायों को जन्मजात अपराधी घोषित किया गया था। उनके लगातार विरोध के बाद 1946 में इस अधिनियम को निरस्त कर दिया गया और 1948 तक इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उन्होंने कार्यकर्ता ए. वैद्यनाथ अय्यर के साथ मिलकर 1939 में मदुरै के ऐतिहासिक मीनाक्षी देवी मंदिर प्रवेश आंदोलन का नेतृत्व किया। इस आंदोलन ने वंचित समुदायों के लिए मंदिर में प्रवेश का रास्ता खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक क्रांतिकारी नेता और समाज सुधारक के रूप में उनके दोहरे योगदान के कारण हर साल 30 अक्टूबर को उन्हें व्यापक रूप से याद किया जाता है।उनकी जयंती और पुण्यतिथि एक ही दिन पड़ती है और इस अवसर पर उन्हें राजकीय सम्मान दिया जाता है। मुथुरामलिंग थेवर के स्मारक पर उनकी प्रतिमा को 13.5 किलोग्राम का स्वर्ण कवच पहनाया गया। यह कवच पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जे. जयललिता ने 2014 में थेवर जयंती और गुरु पूजा के अवसर पर भेंट किया था।इस कवच को मदुरै की अन्ना नगर मेन रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा की तिजोरी से औपचारिक रूप से निकाला गया। अन्नाद्रमुक के कोषाध्यक्ष डिंडीगुल सी. श्रीनिवासन ने स्मारक के वंशानुगत संरक्षक गांधीमीनल नटराजन के साथ बैंक से संबंधित और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। इसके बाद सशस्त्र पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में कवच को सड़क मार्ग से पसुम्पोन गांव ले जाया गया।गांव पहुंचने पर तीन दिवसीय उत्सव की शुरुआत के अवसर पर इसे पारंपरिक समारोह के साथ थेवर की आदमकद प्रतिमा पर पहनाया गया। आयोजकों ने बताया कि स्वर्ण कवच सप्ताहांत तक प्रतिमा पर ही रहेगा, ताकि हजारों श्रद्धालु और राजनीतिक दलों के नेता वहां पहुंचकर श्रद्धांजलि दे सकें। इसके बाद दो नवंबर को इसे सुरक्षित रूप से वापस बैंक की तिजोरी में रख दिया जाएगा।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Digital Payment Apps से Terrorists तक पहुंच रहा था पैसा, Shopian में बड़े खुलासे से हड़कंप, 10 OGWs Arrested
    Next Article
    Mammootty पर ऑनलाइन हमलों से CPM ने खुद को किया अलग, MV Govindan बोले पार्टी की कोई भूमिका नहीं

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment