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    ट्रम्प के ऐलान से पहले दांव लगाकर करोड़ों कमाए:इनसाइडर ट्रेडिंग का शक गहराया, निवेशकों का भरोसा हिला

    2 hours ago

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    अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान एक दिलचस्प और विवादित ट्रेंड देखने को मिला है। कई ट्रेडर्स (शेयर बाजार में दांव लगाने वाले लोग) बड़े ऐलान से ठीक पहले करोड़ों डॉलर के दांव लगाते दिखे हैं। BBC ने अलग-अलग फाइनेंशियल मार्केट के ट्रेड डेटा का विश्लेषण किया और उसे ट्रम्प के बड़े बयानों और घोषणाओं के समय से मिलाया। इसमें एक पैटर्न सामने आया कि कई बार उनके बयान आने से कुछ घंटे या मिनट पहले ही ट्रेडिंग में अचानक तेज उछाल दिखा। कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि यह इनसाइडर ट्रेडिंग का मामला हो सकता है। यानी सूचनाएं पहले ही लीक हो रही थीं, जिससे आम निवेशकों के भरोसे के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं कुछ दूसरे एक्सपर्ट्स कहते हैं कि मामला इतना सीधा नहीं है। कुछ ट्रेडर्स अब ट्रम्प के फैसलों और बयानों को पहले से भांपने में माहिर हो गए हैं। इन 5 उदाहरणों से समझें कैसे कुछ चुनिंदा लोगों ने की कमाई... 28 फरवरी 2026: ईरान पर हमले के बाद 6 नए अकाउंट ब्लॉकचेन विश्लेषण साइट ‘बबलमैप्स’ ने खुलासा किया कि फरवरी में अचानक 6 नए अकाउंट बने। दांव: इन सभी अकाउंट्स ने 28 फरवरी तक ईरान पर अमेरिकी हमला होने के पक्ष में भारी पैसा लगाया। नतीजा: जैसे ही ट्रम्प ने हमले की पुष्टि की, इन अकाउंट्स ने कुल 9.9 करोड़ (12 लाख डॉलर) कमाए। पैटर्न: इनमें से 5 अकाउंट्स ने इसके बाद कभी कोई दांव नहीं लगाया। एक अन्य अकाउंट ने बाद में युद्धविराम की सही भविष्यवाणी करके 1.35 करोड़ रुपए और कमाए। 3 जनवरी 2026: मादुरो पर अनुमान पर अकाउंट बना, कमाई के बाद बंद ऑनलाइन प्रेडिक्शन मार्केट (जैसे पॉलीमार्केट और कलसी) भी संदेह के घेरे में आए। डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर इन मंचों से जुड़े हैं। दिसंबर 2025 में ‘बर्डनसम-मिक्स’ नाम का एक नया अकाउंट बना। 30 दिसंबर से 2 जनवरी के बीच, इस अकाउंट ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पद छोड़ने पर कुल 32,500 डॉलर लगाए। 3 जनवरी को मादुरो को पद से हटा दिया गया। उस अकाउंट ने 4.36 लाख डॉलर (करीब 4 करोड़ रुपए) जीते और तुरंत अपना यूजरनेम बदलकर अनएक्टिव हो गया। इसी वजह से लोगों को शक है कि शायद उसे पहले से अंदर की जानकारी थी। 23 मार्च 2026: 14 मिनट के खेल में 250 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट तेहरान के साथ समस्या हल करने की घोषणा की। पोस्ट के तुरंत बाद शेयर बाजार में उछाल आया और अमेरिकी तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। संदिग्ध गतिविधि: ट्रम्प के पोस्ट से 14 मिनट पहले तेल की कीमतें गिरने पर बड़े दांव लगाए गए थे। इसे ‘शॉर्ट सेलिंग’ कहते हैं, जिसमें ट्रेडर्स ऊंची कीमत पर तेल बेचने का सौदा कर लेते हैं और दाम गिरते ही उसे सस्ते में खरीदकर मुनाफा कमाते हैं। प्रति बैरल 15 डॉलर की गिरावट से उस संदिग्ध समय में किसी को अनुमानित 250 करोड़ रुपए से ज्यादा का मुनाफा हुआ। टाइमलाइन: 9 मार्च 2026: तेल में 47 मिनट पहले दांव लगा मुनाफा कमाया ईरान युद्ध के 9वें दिन ट्रम्प ने इंटरव्यू में संघर्ष खत्म होने का दावा किया। खबर रात 7:16 बजे सोशल मीडिया पर आई, जिससे तेल की कीमतें 25% गिर गईं। लेकिन संदिग्ध ट्रेडिंग 47 मिनट पहले (6:29 बजे) ही शुरू हो गई थी। ‘शॉर्ट सेलिंग’ के जरिए 4,000 कॉन्ट्रैक्ट्स पर दांव लगाकर कुछ निवेशकों ने करीब 460 करोड़ का भारी मुनाफा कमाया, जो इनसाइडर ट्रेडिंग का संकेत है। टाइमलाइन: 2 अप्रैल 2025: टैरिफ पर 90 दिन की रोक, ट्रेडिंग में 30 गुना तक उछाल ट्रम्प ने वैश्विक आयात पर भारी टैरिफ लगाए, लेकिन एक हफ्ते बाद अचानक चीन को छोड़कर अन्य देशों को 90 दिनों की राहत दे दी। इस ऐलान से बाजार में सुनामी आई और एसएंडपी 500 इंडेक्स 9.5% उछला, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी बढ़त थी। संदिग्ध रूप से शाम 6:00 बजे ट्रेडिंग रफ्तार अचानक 10,000 कॉन्ट्रैक्ट प्रति मिनट पार कर गई। 16.5 करोड़ का दांव लगाकर कुछ ट्रेडर्स ने ‌‌165 करोड़ का मुनाफा कमाया। सांसदों ने इसकी जांच की मांग की। टाइमलाइन: अमेरिका में 93 साल से इनसाइडर ट्रेडिंग गैरकानूनी इनसाइडर ट्रेडिंग इसलिए गैरकानूनी मानी जाती है क्योंकि इसमें कुछ लोगों को ऐसी गोपनीय जानकारी मिल जाती है जो आम निवेशकों को नहीं पता होती। इसी जानकारी के आधार पर वे पहले ही पैसा लगा देते हैं और बाद में बड़ा मुनाफा कमा लेते हैं। इससे बाजार में बराबरी खत्म हो जाती है और आम लोगों का भरोसा टूटता है। अमेरिका में 1933 से इनसाइडर ट्रेडिंग गैरकानूनी है। 2012 में नियम और सख्त किए गए और सरकारी अधिकारी, सांसद और उनके स्टाफ भी इस कानून के दायरे में आ गए। यानी अगर किसी नेता या सरकारी व्यक्ति को अंदर की जानकारी मिलती है, तो वह उसका इस्तेमाल करके ट्रेड नहीं कर सकता। लेकिन असली समस्या यह है कि ऐसे मामलों में सजा दिलाना बहुत मुश्किल होता है। कानून के तहत यह साबित करना जरूरी होता है कि जानकारी सच में गोपनीय थी, उसे जानबूझकर लीक किया गया था, और जिसने ट्रेड किया उसे वही अंदर की जानकारी मिली थी। अगर यह पूरी कड़ी साबित नहीं होती, तो केस आगे नहीं बढ़ता। इएसएसईसी बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर पॉल ओडिन का कहना है कि कई बार ट्रेडिंग का पैटर्न देखकर साफ लगता है कि किसी को पहले से जानकारी थी, जैसे बड़े ऐलान से ठीक पहले अचानक भारी दांव लगना। लेकिन जब तक यह पता न चले कि जानकारी कहां से आई और किसने दी, तब तक कानूनी कार्रवाई करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
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