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    ट्रांसप्लांट कर महिला को स्कॉर्पियों से ले गए दिल्ली:किडनी कांड में पुलिस के हाथ लगी वॉयस रिकॉर्डिंग, शिवम बोला- हम करोड़ों ऐसे ही फेंक देते हैं

    12 hours ago

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    'जिस महिला को हम दिल्ली लेकर आए थे… उसे द्वारका के MAX हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, वो मर गई…' ‘महिला को एंबुलेंस से लेकर जाना चाहिए था ना, तुम लोग उसे स्कॉर्पियो से लेकर चले गए… स्कॉर्पियो में कोई मेडिकल व्यवस्था होती है क्या…? जो उसे लेकर चले गए।’ कानपुर किडनी कांड में कुछ ऐसी ही अहम वॉयस रिकॉर्डिंग पुलिस के हाथ लगी है। यह वॉयस रिकॉर्डिंग गैंग के किंगपिंग कल्याणपुर निवासी शिवम अग्रवाल के मोबाइल की है। वॉयस रिकॉर्डिंग दिसंबर माह में मसवानपुर स्थित मेडिलाइफ हॉस्पिटल में हुए ट्रांसप्लांट के बाद की है। जिसे एजेंट शिवम ने गिरोह में शामिल प्रयागराज निवासी नवीन पांडेय को भेजा था। एजेंटों की सामने आई वॉयस रिकॉर्डिंग इसके साथ ही दूसरी वॉयस रिकॉर्डिंग भी शिवम और नवीन के बीच की है। जिसमें नवीन प्रयागराज निवासी साहिल नाम के एजेंट का जिक्र करते हुए शिवम से कहता है– साहिल ने तुम्हारा नाम लेकर 22 लाख रुपए ले लिए हैं। जिस पर शिवम वॉयस रिकॉर्डिंग से जवाब भेजता है कि– इसको पता नही कि शिवम और डॉ. रोहित कौन चीज हैं, हम लोग करोड़ों रुपए ऐसे ही फेंक देते हैं। शिवम से वॉयस रिकॉर्डिंग के बारे में पुलिस टीम ने पूछताछ की तो उसने बताया कि नवीन पांडेय प्रयागराज का रहने वाला है। वह गिरोह का एक्टिव मेंबर है। जिसके बाद पुलिस टीम उसके घर पहुंची, लेकिन वह नहीं मिला। वहीं वॉयस रिकॉर्डिंग के बारे में पुलिस ने शिवम की पत्नी से पूछताछ की तो उसने बताया कि नवीन पांडेय, डॉ रोहित के साथ 4–5 सालों से काम कर रहा है। उसने बताया कि शिवम तो बीते एक साल से ही डॉ. रोहित से जुड़ा था। पुलिस अब सोमवार को आरोपी शिवम अग्रवाल की रिमांड के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल करेगी। जिसके बाद शिवम से विस्तार से पूछताछ की जाएगी। BA पास भूपेंद्र बना डॉक्टर ऑफ मेडिसिन डीसीपी वेस्ट, एसएम कासिम आबिदी ने बताया-शिवम की पत्नी से शुक्रवार को करीब 6 घंटे तक लंबी पूछताछ की गई। इस दौरान उसने हैलट के सामने स्थित रमाशिव हॉस्पिटल के मैनेजर भूपेंद्र सिंह का नाम भी लिया। भूपेंद्र सिंह डॉ रोहित के संपर्क में था। पुलिस ने भूपेंद्र सिंह से पूछताछ की, तो उसने स्वीकार किया कि उसने वर्तमान में लखनऊ के एसजीपीजीआई के सामने एक निजी अस्पताल स्थापित किया है। डीसीपी वेस्ट के अनुसार भूपेंद्र के विजिटिंग कार्ड पर MD (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) लिखा था। जब इस बारे में उससे पूछा गया, तो उसने बताया कि MD का मतलब मैनेजिंग डायरेक्टर है। वह डॉ रोहित के संपर्क में था। डॉक्टर रोहित ने उससे अपने अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए कहा था, लेकिन उसने ट्रांसप्लांट नहीं कराया। मेड़ी लाइफ के संचालक रोहन, नरेंद्र और अजय को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। किडनी कांड में एक और डॉक्टर हिरासत में किडनी कांड में पुलिस के हाथों एक और सफलता लगी है। दिसंबर माह में मसवानपुर स्थित मेडि लाइफ हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान महिला की मौत के मामले में पुलिस ने कन्नौज के रहने वाली डॉ. रोहन को हिरासत में ले लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है, वहीं हॉस्पिटल के दो अन्य पार्टनर औरैया निवासी डॉ. नरेंद्र व कन्नौज के डॉ.संदीप अभी फरार हैं। अब जानिए मेडीलाइफ अस्पताल से कैसे जुड़े तार डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि पूर्व में पकड़े गए ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार व कुलदीप सिंह राघव ने पूछताछ में बताया था कि उन्होंने सभी ऑपरेशन आहूजा हॉस्पिटल में ही किए थे। लेकिन दोनों के मोबाइल की जांच की गई, तो शहर के कई अन्य अस्पतालों नंबर भी सामने आए। इसमें मसवानपुर स्थित मेडी लाइफ हॉस्पिटल भी शामिल था। दोनों से सख्ती से पूछताछ कि गई तो आरोपी ओटी टेक्नीशियन राजेश व कुलदीप लोकेशन के आधार पर पुलिस को मेडी लाइफ अस्पताल तक लेकर पहुंचे, हालांकि वह बंद मिला। मेरठ का ट्रैवल एजेंट फर्जी नाम से बुक करता था कारें पुलिस की जांच में एक और बात सामने आई है। मेरठ का रहने वाला अंकित, डॉ. रोहित, वैभव मुद्गल, डॉ. अफजाल, डॉ. मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली, डॉ. अनुराग समेत उनकी टीम के लिए अलग–अलग फर्जी नामों से गाड़ियां बुक करता था। जांच में मेरठ के टैक्सी ड्राइवर परवेज सैफी व फिरोज के नाम सामने आए थे। उनसे पूछताछ की गई तो पता चला कि वह डॉ. रोहित की टीम को तीन बार कानपुर लेकर आए, 10 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से गाड़ी बुक की जाती थी। डॉ. अनुराग उर्फ अमित ने की थीं दो शादियां स्कैंडल से जुड़े डॉ. अनुराग की तलाश में पुलिस टीम मेरठ पहुंची, जहां जांच में सामने आया मेरठ का अल्फा हॉस्पिटल डॉ. अनुराग के नाम पर है, वह फिजियोथेरेपिस्ट है। साथ ही उसने दो शादियां की हैं। पुलिस टीम उसकी पहली पत्नी के घर पहुंची, लेकिन वह नहीं मिला। पुलिस उसकी दूसरी पत्नी की लोकेशन तलाश रही है। साहिल ने किडनी के नाम पर 20 लाख ठगे पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि शिवम अग्रवाल की तरह ही साहिल भी डॉ. रोहित के लिए काम करता है। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया कि एक महिला को किडनी की जरूरत थी। साहिल ने उससे संपर्क कर कहा कि डॉ. रोहित ट्रांसप्लांट के लिए 40 लाख लेते हैं। वह 20 लाख रुपए में किडनी ट्रांसप्लांट करा देगा। इसके बाद वह महिला से 20 लाख लेकर फरार हो गया। साहिल की तलाश में चित्रकूट और प्रयागराज में छापेमारी की जा रही है। स्कैंडल में एक भी सर्जन नही पुलिस कमिश्नर ने बताया कि चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक गिरोह में जिन भी डॉक्टरों का नाम सामने आया है, उसमें एक भी सर्जन नहीं हैं। गिरोह में शामिल डॉ. रोहित एनीस्थीसिया, डॉ. वैभव डेंटिस्ट, डॉ. अनुराग अल्फा हॉस्पिटल संचालक, डॉ. अफजल फिजीशियन, डॉ. अली ओटी टेक्नीशियन हैं। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… OT टेक्नीशियन ने निकाली थी MBA स्टूडेंट की किडनी:कानपुर में ट्रांसप्लांट किया; मेरठ के 3 डॉक्टरों के भी नाम सामने आए कानपुर में MBA स्टूडेंट आयुष की किडनी किसी डॉक्टर ने नहीं, बल्कि एक ओटी टेक्नीशियन ने निकाली थी। उसी ने पारुल तोमर को किडनी ट्रांसप्लांट भी किया था। डीसीपी एसएम कासिम आबिदी ने यह जानकारी दैनिक भास्कर को दी। उन्होंने बताया- आरोपी ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है। उसके घर पर दबिश दी गई, लेकिन वह फरार मिला। जिस मेडिलाइफ हॉस्पिटल में वह काम करता था, उसके तीनों मालिक भी फरार हैं। पढ़ें पूरी खबर
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