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    धुरंधर-2 में अतीक का आतंकी कनेक्शन, पूर्व सांसद भड़के:कहा- हिंदू मुस्लिम करने के लिए फिल्म बनाई; इमरान मसूद बोले- बकवास पिक्चर

    13 hours ago

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    यूपी में अभिनेता रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में अतीक अहमद के किरदार और नोटबंदी को मास्टर स्ट्रोक दिखाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने फिल्म को बकवास बताया। कहा- इस फिल्म को कौन देखेगा और कौन इस पर यकीन करेगा। पूर्व सपा सांसद एसटी हसन ने कहा- अतीक का पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से कोई संबंध था या नहीं, इस बारे में खुफिया एजेंसियों और पुलिस ने अब तक कोई खुलासा नहीं किया है। ऐसे में फिल्म में जो दिखाया गया है, उसका कोई आधार नहीं है। वहीं, AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा कि ‘केरला स्टोरी-1 और 2’ की तरह ही धुरंधर में भी मुसलमानों को टारगेट किया गया है। समाज में नफरत फैलाने वाली ऐसी फिल्मों पर तुरंत बैन लगाया जाना चाहिए। अब पढ़िए, किसने क्या कहा- इमरान मसूद बोले- नोटबंदी मास्टर स्ट्रोक नहीं थी इमरान मसूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी कर देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी थी, जबकि फिल्म में इसे मास्टर स्ट्रोक के तौर पर दिखाया गया है। नोटबंदी मास्टर स्ट्रोक नहीं, बल्कि देश को नुकसान पहुंचाने वाला फैसला था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिन फैसलों की आलोचना की थी, आज वही सही साबित हो रहे हैं। अगर फिल्मों में महिमामंडन ही करना है तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दिखाया जाए और बताया जाए कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को कैसे जवाब दिया था। इमरान मसूद ने कहा कि सरकार के पास अब विकास के मुद्दे नहीं बचे हैं, इसलिए समाज में नफरत फैलाने की राजनीति की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि कब तक हिंदू-मुस्लिम के नाम पर लोगों को बांटते रहेंगे। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी उद्योगपतियों को बचाने के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने हाथ जोड़कर खड़े रहते हैं। एसटी हसन बोले- अब फिल्में सियासत के लिए बन रहीं हैं एसटी हसन ने कहा कि डॉन दाऊद इब्राहिम के ISI से कनेक्शन की बातें तो सुनी जाती रही हैं, लेकिन अतीक अहमद के मामले में अब तक किसी भारतीय जांच एजेंसी ने ऐसा कोई खुलासा नहीं किया है। विवाद खड़ा कर सिर्फ फिल्म चलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा- आज फिल्में सियासत के लिए बनाई जा रहीं हैं। समाज को कोई सकारात्मक संदेश नहीं दिया जा रहा। मुझे लगता है कि फिल्म वाले नफरत फैलाने के लिए पार्टी से पैसा लेते हैं। ऐसी फिल्में हिंदू-मुस्लिम के ताना-बाना को तोड़ने के लिए बनाई जा रही हैं। राजीव राय बोले- चुनाव के समय ही ऐसी फिल्में आती हैं घोसी से सपा सांसद राजीव राय ने कहा- जब हुआ तो हमारे पार्टी में नहीं थे, पहली बात। दूसरी बात, भारतीय जनता पार्टी का एक प्रोपेगेंडा मशीन है, एक सलाहकार महोदय हैं, जो अपने ऊपर मूवी बनवाते रहते हैं। अपनी काल्पनिक दुनिया पर मूवी बनवाते रहते हैं। किसी को कुछ भी कह सकते हैं, कोई लिंक जोड़ सकते हैं। मैं उनसे निवेदन करूंगा कि एक मूवी ऐसी भी बनवाइए, जिसमें किसी वीर को माफी मांगते हुए, गिड़गड़ाते हुए, पेंशन लेते हुए दिखाया गया हो। असली चरित्र को मुखबिरी करते दिखाया गया हो। यह दिखाया गया हो कि 1942 में मुस्लिम लीग के साथ कैसे आप अंग्रेजों के लिए चिट्ठी लिख रहे थे। यह असली सच है, जो इतिहास में तथ्यात्मक रूप से दर्ज है। सांसद राजीव राय ने कहा- उन्होंने फिल्म नहीं देखी है, लेकिन जब भी चुनाव आते हैं, ऐसी फिल्में जानबूझकर रिलीज की जाती हैं, ताकि माहौल प्रभावित किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस तरह की फिल्मों को परोक्ष समर्थन देती है। उन्होंने ‘कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्मों का उदाहरण भी दिया। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा- विवाद भड़काकर पैसा कमाना मकसद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने फिल्म ‘धुरंधर 2’ को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा- फिल्म इंडस्ट्री के लोग पैसा कमाने के लिए ऐसे विषय चुनते हैं, जिनसे समाज में विवाद खड़ा हो। इसलिए हिंदू-मुस्लिम एंगल जोड़ते हैं। मौलाना रजवी ने कहा कि इनका मकसद सिर्फ पैसा कमाना रह गया है, जबकि पहले फिल्में समाज को संदेश देने, बदलाव लाने और सुधार के लिए बनाई जाती थीं। पहले ‘संभल’ पर फिल्म बनी, इसके अलावा ‘उदयपुर फाइल्स’, ‘केरल स्टोरी’ और ‘पंडित घूसखोर’ जैसी फिल्में भी इसी तरह बनाई गईं। क्यों खड़ा हुआ विवाद- दरअसल, फिल्म में साल 2016 में हुई नोटबंदी को दिखाया गया है। साथ ही इसमें माफिया अतीक अहमद पर आधारित एक किरदार ‘आतिफ अहमद’ को फिल्माया गया है। इस किरदार को सलिम सिद्दीकी ने निभाया है। आतिफ अहमद का लुक, कद-काठी, मूंछ और स्टाइल अतीक अहमद से हू-ब-हू मिलता-जुलता दिखाया गया है। फिल्म में किरादर आतिफ अहमद का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से कनेक्शन दिखाया गया है। उसे जेल में रहते हुए भी अपना पूरा अपराधी नेटवर्क चलाते हुए दिखाया गया है। फिल्म का एक डायलॉग है, “जब तक आतिफ अहमद है, जेल में हो या बाहर…वो सब संभाल लेगा।” फिल्म के मुताबिक, 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले हवाला के जरिए पाकिस्तान से नकली नोटों की बड़ी खेप भारत लाई जानी थी। इस किरदार को प्रदेश में पैसा बांटने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन सरकार को इसकी भनक लग जाती है। इसके बाद नोटबंदी का ऐलान कर पूरे प्लान को फेल कर दिया जाता है। फिल्म में माफिया की हत्या का सीन भी दिखाया गया है। इसके अलावा, पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार पर आधारित किरदार को भी शामिल किया गया है। इसमें दिखाया गया है कि एनएसए बने किरदार उन्हें अतीक से जुड़ी अपराधिक प्रोफाइल दिखा रहे हैं। ------------------- ये खबर भी पढ़िए- धुरंधर-2 रिव्यू; रणवीर की फिर दमदार परफॉर्मेंस:नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। उम्मीदें जितनी ऊंची थीं, फिल्म कई जगह उन्हें पूरा करती है, तो कुछ जगह थोड़ा चूक भी जाती है। कहानी जसकीरत सिंह रांगी के अतीत से शुरू होती है, जो अपने परिवार के साथ हुए अन्याय के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखता है। जेल से निकलकर वह भारत के लिए काम करने का मौका पाता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी बनकर अंडरकवर मिशन पर जाता है। पढ़ें पूरी खबर
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