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    उमाशंकर जायसवाल बने जिले के हाईस्कूल टॉपर:93.6% अंक हासिल किए, आर्थिक तंगी के बावजूद पढ़ाई जारी रखी

    7 hours ago

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    लखीमपुर खीरी के रमिया बेहड़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत रामनगर बगहा के छोटे से गांव बगहा से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो संघर्ष, हौसले और सफलता की मिसाल बन गई है। यहां के मेधावी छात्र उमाशंकर ने हाईस्कूल परीक्षा में 93.6 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में टॉप किया है और पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया। सीमित संसाधन और विपरीत परिस्थितियां उमाशंकर के रास्ते में हमेशा चुनौती बनकर खड़ी रहीं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी इस कामयाबी में उनके माता-पिता और शिक्षकों का अहम योगदान रहा। उमाशंकर कहते हैं कि आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। घाघरा की कटान ने छीनी जमीन, झोपड़ी में गुजर-बसर उमाशंकर का परिवार बेहद गरीब है। कभी उनके पिता के पास तीन बीघा जमीन थी, लेकिन वह घाघरा नदी की कटान में बह गई। इसके बाद परिवार पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। आज पूरा परिवार 30×40 की एक झोपड़ी में रहकर जीवन यापन कर रहा है। इन हालातों में पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था, लेकिन उमाशंकर ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। जिम्मेदारियों के बीच भी नहीं छोड़ी पढ़ाई परिवार में माता-पिता के अलावा बड़े भाई ओमप्रकाश हैं, जो आर्थिक तंगी के चलते केवल आठवीं तक पढ़ सके। बड़ी बहन पूजा की भी पढ़ाई आठवीं तक ही हो पाई और अब उनका विवाह हो चुका है। छोटी बहन ममता भी आर्थिक कारणों से आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पा रही है। ऐसे माहौल में उमाशंकर ने पढ़ाई को ही अपना लक्ष्य बनाकर लगातार मेहनत जारी रखी। पढ़ाई के साथ कविता और खेल में भी रुचि उमाशंकर सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि रचनात्मक गतिविधियों में भी आगे हैं। उन्हें कविता लिखने और खेलकूद में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ मानसिक संतुलन और रचनात्मकता भी जरूरी है। रिजल्ट के बाद दैनिक भास्कर की टीम को उन्होंने अपनी लिखी कविता भी सुनाई। बने क्षेत्र के लिए प्रेरणा उमाशंकर की सफलता ने यह साबित कर दिया कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, मजबूत इरादों के आगे टिक नहीं सकते। उनकी उपलब्धि अब पूरे क्षेत्र के छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है। गांव के लोगों और शिक्षकों ने उनकी इस सफलता पर खुशी जताई और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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