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    उन्नाव में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित:संतुलित उर्वरक उपयोग पर भी चर्चा, 106 किसानों ने लिया भाग

    6 hours ago

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    उन्नाव के धौरा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में मंगलवार को आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) कृति राज ने की। इस अवसर पर कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक, आम उत्पादक,व्यापारी और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम उत्पादकों, व्यापारियों और संबंधित संस्थाओं को एक साझा मंच प्रदान करना था। इसका लक्ष्य आम उत्पादन, भंडारण और विपणन से जुड़ी समस्याओं पर विचार-विमर्श कर उनके व्यावहारिक समाधान खोजना था। प्रतिभागियों ने आम की गुणवत्ता सुधारने, बेहतर विपणन व्यवस्था स्थापित करने और उत्पादकों को लाभकारी मूल्य दिलाने जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। मुख्य विकास अधिकारी कृति राज ने अपने संबोधन में कहा कि प्रशासन किसानों और आम उत्पादकों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उत्पादन से लेकर विपणन तक हर स्तर पर किसानों को सहयोग दिया जाएगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके। सीडीओ ने किसानों से नई तकनीकों को अपनाने और सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। इस अवसर पर उप कृषि निदेशक रवि चंद्र प्रकाश, एलडीएम आर.के. गौतम, जिला कृषि अधिकारी शशांक चौधरी, जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राम भास्कर, डीडीएम नाबार्ड सुमित कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह, केंद्र प्रभारी डॉ. अर्चना सिंह, मृदा वैज्ञानिक रत्ना सहाय तथा पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. जय कुमार यादव भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने मृदा परीक्षण, हरी खाद, जैव उर्वरकों के उपयोग, फसल अवशेष प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लाभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन से मृदा स्वास्थ्य बेहतर होता है, उत्पादन लागत कम होती है और फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। इस कार्यक्रम में जनपद के कुल 106 कृषकों ने प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें नई तकनीकी जानकारी मिली है। यह आयोजन कृषि एवं उद्यान क्षेत्र में समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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