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    वर्ल्ड अपडेट्स:फ्रांस के लालिक म्यूजियम में 40 करोड़ रुपए की चोरी, नकाबपोश बदमाश 20 क्रिस्टल ज्वेलरी लेकर फरार

    14 hours ago

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    फ्रांस के लालिक म्यूजियम से रविवार तड़के करीब 40 लाख यूरो (करीब 40 करोड़ रुपए) के आभूषण चोरी हो गए। घटना जर्मनी सीमा से सटे विंगन-सुर-मोडेर कस्बे की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह करीब 5:30 बजे कई नकाबपोश बदमाश संग्रहालय का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे। उन्होंने छह डिस्प्ले केस तोड़े और करीब 20 क्रिस्टल आभूषण लेकर फरार हो गए। चोरी हुए आभूषण क्रिस्टल के बने थे और उनमें कीमती रत्न नहीं जड़े थे। इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन्हें पिघलाकर या दोबारा बेच पाना आसान नहीं होगा। लालिक म्यूजियम की शुरुआत 2011 में हुई थी। यह प्रसिद्ध फ्रांसीसी ज्वेलर और ग्लास कलाकार रेने लालिक तथा उनके उत्तराधिकारियों की कला को समर्पित है। संग्रहालय में 650 से अधिक आर्ट नोवो, आर्ट डेको और आधुनिक क्रिस्टल कला की कलाकृतियां प्रदर्शित हैं। चोरी के बाद संग्रहालय को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में पेरिस के लूव्र म्यूजियम से फ्रांस के क्राउन ज्वेल्स के आठ दुर्लभ आभूषण चोरी हुए थे। उनकी कीमत करीब 8.8 करोड़ यूरो आंकी गई थी। इसी दौरान डेनिस डिडेरो हाउस ऑफ एनलाइटनमेंट से करीब 2,000 दुर्लभ सिक्के और नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री से 15 लाख यूरो कीमत के छह दुर्लभ सोने के नगेट भी चोरी हुए थे। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… श्रीलंका के नेगोम्बो जेल में बलवा: 25 की मौत, 100 से ज्यादा घायल श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के बाहरी इलाके नेगोम्बो स्थित एक जेल में हुई हिंसक झड़प में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। मृतकों में चार जेलकर्मी और 15 कैदी शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नेगोम्बो अस्पताल की निदेशक पुष्पा गमलाथ ने समाचार एजेंसी AFP को बताया कि अस्पताल में चार जेलकर्मियों और 15 कैदियों के शव लाए गए हैं। पुलिस और स्थानीय मीडिया के मुताबिक, राजधानी कोलंबो से करीब 35 किलोमीटर उत्तर में स्थित नेगोम्बो जेल में रविवार को हिंसा शुरू हुई, जो सोमवार तक जारी रही। रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों और घायलों में कैदी और जेल अधिकारी दोनों शामिल हैं। श्रीलंका पुलिस के प्रवक्ता चंदना हेराथ ने जेल के अंदर झड़प और लोगों की मौत की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने घटना के कारण या अन्य विवरण साझा नहीं किए। ब्रिटेन में विदेशी फंडिंग पर शिकंजा:चुनावी उम्मीदवारों को हर बड़े चंदे का स्रोत बताना होगा ब्रिटेन ने सोमवार को विदेशी राजनीतिक चंदे पर नियम और सख्त कर दिए। सरकार का कहना है कि इसका मकसद विदेशी पैसे के जरिए चुनावों को प्रभावित होने से रोकना और राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना है। यह जानकारी ब्रिटिश सरकार के बयान में दी गई है। नए नियमों के तहत अब चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को उम्मीदवार घोषित होने से पहले मिले 2,230 पाउंड से अधिक के सभी चंदों की जानकारी देनी होगी। साथ ही यह भी साबित करना होगा कि यह रकम वैध स्रोतों से आई है। हाउसिंग मंत्री स्टीव रीड ने कहा कि विदेशी दानदाताओं के लिए कड़े मानक लागू कर और उम्मीदवारों से फंडिंग का स्रोत साबित कराने की व्यवस्था कर सरकार चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की रक्षा कर रही है। नियमों के मुताबिक विदेश से आकर ब्रिटेन में बसे लोग अब तभी एक लाख पाउंड या उससे अधिक का राजनीतिक चंदा दे सकेंगे, जब वे कम से कम एक साल तक स्थायी रूप से ब्रिटेन में रह चुके हों। इसके अलावा कंपनियों से मिलने वाले राजनीतिक चंदे का आकलन अब उनके राजस्व के बजाय कर चुकाने के बाद हुए वास्तविक मुनाफे के आधार पर किया जाएगा। ये नए नियम मार्च में घोषित प्रावधानों के बाद लागू किए गए हैं। तब सरकार ने विदेश में रहने वाले ब्रिटिश नागरिकों के राजनीतिक चंदे की सीमा एक लाख पाउंड प्रति वर्ष तय की थी। लोगो विवाद में मॉली टी पर भारी पड़ा लुई वितों: चीनी अदालत ने $15 लाख हर्जाना और माफी का आदेश दिया चीन की लोकप्रिय बबल टी चेन मॉली टी को फ्रांसीसी लग्जरी ब्रांड लुई वितों (Louis Vuitton) के ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में 1.03 करोड़ युआन (करीब 11 लाख पाउंड या 15 लाख डॉलर) हर्जाना भरने का आदेश दिया गया है। अदालत ने माना कि कंपनी का लोगो लुई वितों के मशहूर चार-पंखुड़ी वाले मोनोग्राम ट्रेडमार्क की नकल करता है। इस फैसले के बाद चीन में कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई। चाइना डेली के अनुसार, शंघाई के पूर्व में स्थित सूझोउ की अदालत ने गुरुवार को मॉली टी को विवादित लोगो का इस्तेमाल तुरंत बंद करने, सार्वजनिक माफी मांगने और लुई वितों को 1.03 करोड़ युआन का हर्जाना देने का आदेश दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मॉली टी और उससे जुड़ी कंपनियों ने कई ट्रेडमार्क पंजीकरण के लिए आवेदन किए थे, लेकिन चीन के राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रशासन ने अधिकांश आवेदन खारिज कर दिए। केवल "मॉली टी" नाम वाले चीनी अक्षरों का ट्रेडमार्क ही पंजीकृत हो सका। इस मामले से जुड़ा एक हैशटैग चीनी सोशल मीडिया पर 40 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है और इस पर हजारों टिप्पणियां आई हैं। कई यूजर्स ने मॉली टी का समर्थन करते हुए कहा कि पश्चिमी लग्जरी ब्रांडों के कई डिजाइन भी चीनी कलाकृतियों से प्रेरित रहे हैं। वीबो पर एक यूजर ने लिखा कि वह समर्थन जताने के लिए रोज मॉली टी पिएगा। वहीं कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अदालत के फैसले को सही ठहराया। उनका कहना था कि लुई वितों ने संबंधित ट्रेडमार्क पहले ही पंजीकृत करा रखा है, इसलिए कानून के मुताबिक उसकी सुरक्षा का अधिकार उसी के पास है। ‌‌BBC ने इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए मॉली टी और लुई वितों दोनों से संपर्क किया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी की ओर से कोई बयान नहीं आया। NATO सम्मेलन से पहले रूस का बड़ा हमला:कीव में 9 की मौत यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूस ने एक सप्ताह में दूसरी बार बड़ा मिसाइल हमला किया है। सोमवार तड़के हुए हमले में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 46 लोग घायल हुए हैं। घायलों में कम से कम पांच बच्चे शामिल हैं। यह हमला तुर्किये में होने वाले NATO शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुआ है। सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात होने की उम्मीद है। रविवार को हमले से कुछ घंटे पहले राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि खुफिया जानकारी के अनुसार रूस कीव पर एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि रूस ने जानबूझकर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। वहीं रूस का कहना है कि उसने हाल में रूसी क्षेत्र के बिजलीघरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर यूक्रेनी हमलों के जवाब में सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। NATO बैठक से पहले जेलेंस्की ने सहयोगी देशों से यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलों की आपूर्ति में देरी नहीं करने की अपील की। चीन ने प्रशांत महासागर में पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया चीन ने सोमवार को प्रशांत महासागर में पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का दुर्लभ परीक्षण किया। इस कदम पर न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने चिंता जताते हुए कहा कि इससे दक्षिण प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता प्रभावित हो सकती है। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नौसेना के प्रवक्ता सीनियर कैप्टन वांग शुएमेंग ने बताया कि नौसेना की एक पनडुब्बी से डमी वॉरहेड वाली रणनीतिक मिसाइल दागी गई, जो प्रशांत महासागर के निर्धारित क्षेत्र में सटीकता से गिरी। चीन ने यह नहीं बताया कि किस प्रकार की मिसाइल का परीक्षण किया गया। PLA नौसेना के पास फिलहाल JL-2 और JL-3 नाम की दो प्रकार की पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार JL-3 की मारक क्षमता इतनी है कि वह चीन के तट या दक्षिण चीन सागर से छोड़े जाने पर भी अमेरिका की मुख्य भूमि तक पहुंच सकती है। चीन के पास जिन क्लास (टाइप-094) परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों के छह पोत हैं, जिन्हें उसकी मुख्य रणनीतिक पनडुब्बी माना जाता है। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा कि यह मिसाइल दक्षिण प्रशांत परमाणु-मुक्त क्षेत्र के समुद्री हिस्से में दागी गई। यह क्षेत्र 1986 की रारोटोंगा संधि के तहत बनाया गया था, जिसके प्रोटोकॉल पर चीन ने भी 1987 में हस्ताक्षर किए थे। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इस परीक्षण को क्षेत्र के लिए अस्थिर करने वाला कदम बताया। चीन के बड़े अंडरग्राउंड चर्च के संस्थापक रिहा:अमेरिका पहुंचकर परिवार से मिले चीन के सबसे प्रमुख अंडरग्राउंड (गैर-पंजीकृत) चर्चों में से एक जियोन चर्च के संस्थापक पादरी एज्रा जिन को जेल से रिहा कर दिया गया है। रिहाई के बाद वे अमेरिका पहुंच गए, जहां उनका परिवार से पुनर्मिलन हुआ। उनकी बेटी ग्रेस जिन ड्रेक्सल ने इसकी पुष्टि की है। एज्रा जिन उन दर्जनों चर्च सदस्यों में शामिल थे, जिन्हें पिछले साल चीन में गैर-पंजीकृत चर्चों के खिलाफ चलाए गए व्यापक अभियान के दौरान गिरफ्तार किया गया था। ग्रेस जिन ड्रेक्सल के अनुसार, मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बीजिंग यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने एज्रा जिन का मामला उठाया था। इसके बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी। परिवार की ओर से जारी बयान में ड्रेक्सल ने कहा, "हम बेहद खुश हैं और इसे ईश्वर का चमत्कार मानते हैं। हम राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके प्रशासन का भी धन्यवाद करते हैं। शी जिनपिंग के सीधे हस्तक्षेप के बिना यह संभव नहीं हो पाता।" एज्रा जिन ने 2007 में बीजिंग में जियोन चर्च की स्थापना की थी। 2018 में चीन ने गैर-पंजीकृत चर्चों के खिलाफ कार्रवाई तेज की, जिसके बाद वे अपने परिवार के साथ अमेरिका चले गए। हालांकि, चर्च के सदस्यों पर कार्रवाई जारी रहने के कारण वे बाद में चीन लौट आए। इसके बाद चीनी अधिकारियों ने उन्हें देश छोड़ने से रोक दिया। पिछले साल अक्टूबर में परिवार का उनसे संपर्क टूट गया था। उनकी बेटी, जो अमेरिकी सीनेट में स्टाफ सदस्य हैं, ने ट्रम्प प्रशासन से अपने पिता की रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की थी।
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