Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    'वंदे मातरम की अनिवार्यता असंवैधानिक':AMU में इंटरनेशनल जकात कॉन्फ्रेंस बोले मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी- सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती

    11 hours ago

    1

    0

    ​अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के टीचर्स एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल जकात कॉन्फ्रेंस 2026 रविवार को संपन्न हो गई। एसोसिएशन ऑफ मुस्लिम प्रोफेशनल्स (AMP) और इंडिया जकात के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कई विद्वानों ने हिस्सा लिया। ​सम्मेलन के अंतिम दिन मुख्य अतिथि शामिल होने आए ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने सरकार के राष्ट्रगीत के अनिवार्यता वाले निर्देशों पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें कानूनी चुनौती देने की बात कही। ​वंदे मातरम की अनिवार्यता पर विवाद मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने राष्ट्रगान से पूर्व वंदे मातरम गाए जाने को अनिवार्य किए जाने के प्रस्ताव को गैर-दस्तूरी (असंवैधानिक) करार दिया। उन्होंने कहा कि हमने पहले ही अपना पक्ष साफ कर दिया है कि इस तरह के सर्कुलर जारी करना या कानून बनाना पूरी तरह से असंवैधानिक है। अगर सरकार ऐसा कोई कानून बनाती है या इसके लिए दबाव डाला जाता है तो हम खामोश नहीं बैठेंगे। इसे देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी जाएगी। ​जकात व्यवस्था का होगा आधुनिकीकरण ​कॉन्फ्रेंस के मुख्य एजेंडे जकात प्रबंधन पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने इसे गरीबी उन्मूलन का सबसे प्रभावी जरिया बताया। कार्यक्रम संयोजक आमिर इदरीसी ने कहा कि जकात के वितरण (तकसीम) के निजाम को व्यवस्थित करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन नामुमकिन नहीं। ​आधुनिक प्रणाली को अपनाने पर जोर जकात संग्रह और वितरण में पारदर्शिता के लिए डिजिटल तकनीक और आधुनिक प्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि जकात केवल दान नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक सामाजिक टूल है। उन्होंने AMP और जकात इंडिया जैसी संस्थाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया गया। ​विद्वानों और अर्थशास्त्रियों का जमावड़ा ​14 और 15 फरवरी को आयोजित इस सम्मेलन में इस्लामिक स्कॉलर्स के साथ-साथ अर्थशास्त्रियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी शिरकत की। सत्रों के दौरान इस बात पर मंथन हुआ कि कैसे जकात के फंड का इस्तेमाल शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए किया जा सकता है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ। इस दौरान संकल्प लिया गया कि भविष्य में जकात प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।
    Click here to Read more
    Prev Article
    पतारा में सचिव और किसान के बीच विवाद:लोन वसूली को लेकर दोनों में हुई बहस, ऑफिस में आकर मारने की धमकी
    Next Article
    कल्याणपुर में 3.40 करोड़ की जीएसटी चोरी:फर्जी पंजीकरण पर मुकदमा दर्ज, जांच शुरू

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment