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    यूपी में सबसे तेज अंश निर्धारण करने वाला जिला बहराइच:डीएम अक्षय त्रिपाठी ने 99.6% शिकायतें दूर कीं, गांव-गांव जाकर राजस्व टीम ने सुलझाए विवाद

    3 hours ago

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    उत्तर प्रदेश में जमीनी विवादों को खत्म करने और भूमि रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए चल रहे 'अंश निर्धारण अभियान' में बहराइच जिले ने बाजी मार ली है। योगी सरकार की इस प्राथमिकता वाली योजना में बहराइच पूरे प्रदेश में पहले पायदान पर पहुंच गया है। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने अद्भुत सक्रियता दिखाते हुए निर्धारित समय के भीतर 99.6 प्रतिशत मामलों का निस्तारण कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। गांवों में जाकर राजस्व टीम ने किया सत्यापन इस सफलता के पीछे जिला प्रशासन की जमीनी स्तर पर की गई कड़ी मेहनत है। अभियान के तहत राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमों ने गांव-गांव जाकर किसानों और भूमिधरों के बीच विवादित हिस्सों का सत्यापन किया। सालों से जो मामले फाइलों में दबे थे, उन्हें मौके पर जाकर सुलझाया गया और रिकॉर्ड को अपडेट किया गया। डीएम अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि नियमित समीक्षा और हर कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करने की वजह से ही यह लक्ष्य हासिल करना मुमकिन हो पाया। विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ्तार भूमि का अंश निर्धारण (खतौनी में हिस्सेदारी तय होना) न केवल किसानों के लिए जरूरी है, बल्कि यह विकास परियोजनाओं के लिए भी नींव का काम करता है। अक्सर देखा जाता था कि हिस्सेदारी तय न होने के कारण सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अटक जाती थी। अब बहराइच में रिकॉर्ड साफ होने से विकास कार्यों में तेजी आएगी और अदालतों में चलने वाले भूमि विवादों के मामलों में भी बड़ी कमी देखने को मिलेगी। दूसरे जिलों के लिए बनेगा 'बहराइच मॉडल' बहराइच जिला प्रशासन की इस कार्यप्रणाली को अब पूरे प्रदेश के लिए एक 'रोल मॉडल' के रूप में देखा जा रहा है। शासन स्तर पर इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकता है। इससे पूरे उत्तर प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड को विवादमुक्त और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। इस उपलब्धि से जिले के किसानों में भी खुशी है, क्योंकि अब उन्हें अपनी जमीन की खरीद-बिक्री या लोन लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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