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    यूपी TET परीक्षा जुलाई में होगी, शेड्यूल जारी:27 मार्च से भरे जाएंगे फॉर्म; 4 साल से अभ्यर्थी इंतजार कर रहे थे

    5 hours ago

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    यूपी में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने शुक्रवार को प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) और उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) के लिए UP-TET 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। परीक्षा 2, 3 और 4 जुलाई को होगी। ऑनलाइन एप्लिकेशन 27 मार्च से भरे जाएंगे। फॉर्म और फीस जमा करने की आखिरी तारीख 26 अप्रैल है। फॉर्म में सुधार और शुल्क समाधान की आखिरी तारीख 1 मई तय की गई है। आयोग ने कहा है कि इस बार TET में वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) व्यवस्था लागू की गई है। यूपी में TET परीक्षा 4 साल बाद होने जा रही है। 28 नवंबर, 2021 को परीक्षा लीक हो जाने के कारण निरस्त कर दी गई थी। काफी जद्दोजहद के बाद यह परीक्षा 21 जनवरी 2022 को कराई गई थी। इसके बाद से अभी तक यह परीक्षा नहीं हो सकी थी। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस परीक्षा के इंतजार में हैं। आयोग ने कहा- आखिरी तारीख का इंतजार न करें आयोग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि फॉर्म भरने से पहले वन टाइम रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा। उसके बाद ही वे यूपीटेट के लिए आवेदन कर सकेंगे। विस्तृत विज्ञापन और दिशा-निर्देश आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, जिन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद ही आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आयोग ने अभ्यर्थियों से एक और खास अपील की है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आखिरी तारीख का इंतजार न करें, ताकि किसी तकनीकी समस्या से बचा जा सके। साथ ही, आवेदन से पहले पात्रता और अन्य आवश्यक शर्तों की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। जनरल के लिए 60% और आरक्षित वर्ग के लिए 55% पासिंग मार्क्स यूपी टीईटी परीक्षा को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया गया है कि अभ्यर्थियों के अंक आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। आयोग ने पासिंग क्राइटेरिया भी तय कर दिया है। जानिए क्या है पूरा नियम- जनरल वर्ग के लिए: 150 में से 90 अंक (60%) लाना जरूरी होगा। इससे अधिक अंक पाने वालों को पात्रता प्रमाण पत्र दिया जाएगा। आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC/दिव्यांग आदि) के लिए: 150 में से 82 अंक (55%) न्यूनतम योग्यता तय की गई है। 150 मिनट की होगी परीक्षा, जरूरत पड़ने पर कई शिफ्ट में एग्जाम आयोग ने कहा, यूपी टीईटी परीक्षा पूरी तरह ऑब्जेक्टिव होगी और जरूरत पड़ने पर इसे एक से अधिक शिफ्ट/दिन में भी कराया जा सकता है। परीक्षा का स्वरूप नॉर्मलाइजेशन की विशेष व्यवस्था अगर आवेदन संख्या अधिक होती है तो परीक्षा एक से अधिक शिफ्ट या दिन में कराई जा सकती है। ऐसी स्थिति में अभ्यर्थियों के अंकों को समान बनाने के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया लागू की जाएगी। नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया आयोग द्वारा तय मानकों के अनुसार होगी और आयोग का निर्णय अंतिम होगा। अब परीक्षा का पैटर्न जानिए प्राथमिक स्कूल: कक्षा 1 से 5 के लिए यूपी टीईटी परीक्षा में सभी प्रश्न अनिवार्य होंगे और कुल 150 सवाल पूछे जाएंगे। विषयवार पैटर्न जनरल/OBC के लिए फीस 1000 रुपए, SC-ST को राहत सामान्य / EWS / अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) पेपर-1: 1000 पेपर-2: 1000 अनुसूचित जाति (SC) / अनुसूचित जनजाति (ST) पेपर-1: 500 पेपर-2: 500 दिव्यांग श्रेणी पेपर-1: 300 पेपर-2: 300 उच्च प्राथमिक: कक्षा 6 से 8 स्तर की परीक्षा में कुल 150 सवाल होंगे और सभी प्रश्न अनिवार्य होंगे। विषयवार प्रश्नों का बंटवारा विषय आधारित विकल्प गणित/विज्ञान शिक्षक के लिए: गणित और विज्ञान से 60 प्रश्न (60 अंक) सामाजिक विज्ञान शिक्षक के लिए: सामाजिक अध्ययन से 60 प्रश्न (60 अंक) अन्य विषय के अभ्यर्थियों के लिए: गणित/विज्ञान या सामाजिक अध्ययन में से कोई एक चुनना होगा (60 प्रश्न) सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- शिक्षकों को टीईटी पास करना होगा सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में देशभर के सभी जूनियर हाईस्कूल तक के शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करने का आदेश दिया था। यूपी सहित कई राज्य सरकारों ने इसका विरोध करते हुए रिव्यू याचिका दाखिल की थी। रिव्यू याचिका अभी फैसला सुनाने वाली बेंच के पास है। दूसरे राज्यों की रिव्यू याचिका में कुछ कमियां थीं, उसे पूरा करने के बाद एक साथ इन याचिकाओं की सुनवाई होगी। अगर रिव्यू याचिका स्वीकार कर ली जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट का मूल आदेश स्थगित हो जाएगा। हालांकि कई राज्यों की रिव्यू याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी की याचिका भी देर-सवेर खारिज हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो सरकार के सामने सितंबर- 2027 तक टीईटी परीक्षा कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। यूपी सरकार की रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई होनी है सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से देश भर के 21 लाख शिक्षक आंदोलन कर रहे हैं। इनमें यूपी के 1.86 लाख शिक्षक भी शामिल हैं। कई शिक्षक तो 20 से 25 साल से पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी नौकरी के बाद फिर से परीक्षा लेना कहां तक तर्कसंगत है? शिक्षक संघों का दावा है कि इसी तनाव में 2 शिक्षकों की मौत भी हो चुकी है। शिक्षकों के आंदोलन के चलते ही यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह के समक्ष रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। इस पर अभी सुनवाई होनी है। प्रदेश में 1.86 लाख शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट प्रदेश में पहली से आठवीं तक के ऐसे शिक्षकों की संख्या 1.86 लाख है, जो टीईटी पास नहीं है। RTE Act (2009) और NCTE की 29 जुलाई 2011 की अधिसूचना के तहत, कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों (नए नियुक्ति वाले और सेवारत दोनों) के लिए TET पास करना अनिवार्य है। प्रदेश में 29 जुलाई 2011 से पहले 1.86 लाख ऐसे शिक्षक तैनात हैं, जो टीईटी नहीं पास हैं। बीएड, बीपीएड और बीटीसी के आधार पर उनकी नियुक्ति हुई है। कई तो इंटर पास और मृतक आश्रित शिक्षक हैं।
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