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    1 करोड़ खर्च होने के बाद...पारुल की जान खतरे में:कानपुर में 9 लाख के लिए आयुष ने मौत को दावत दी, बोला- घर वालों को मत बताना

    1 hour ago

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    मेरठ की रहने वाली पारुल तोमर कानपुर के कल्याणपुर में करीब 1 करोड़ रुपए खर्च कर किडनी ट्रांसप्लांट कराने आई थीं, लेकिन अब वह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही हैं। वहीं, बिहार के रहने वाले आयुष चौधरी ने महज 9 लाख रुपए के लिए अपनी किडनी निकलवा दी। बताया जा रहा है कि उसे अपनी स्कूल फीस जमा करनी थी। आयुष बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रहा है। उसके परिवार में मां, भाई और बहन हैं। अब आयुष भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। अब समझिए पूरा घटनाक्रम आहूजा हॉस्पिटल में मुजफ्फरनगर की रहने वाली पारुल तोमर का रविवार को किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। पारुल के पति का मेरठ में स्कूल है। पारुल के परिवार ने शिवम को 7 लाख रुपए दिए थे, जिसमें शिवम ने 3.50 लाख रुपए आयुष के खाते में डाले। 2.75 लाख आहूजा हॉस्पिटल को दिए, 25 हजार मेड लाइफ हॉस्पिटल को ट्रीटमेंट के लिए और 50 हजार रुपए उसने अपने पास रखे हुए थे। आयुष ने शिवम से बाकी ढाई लाख रुपए मांगे तो विवाद हो गया। सोमवार की शाम को आयुष ने पुलिस को फोन पर पूरे मामले की जानकारी दे दी। इधर, आहूजा हॉस्पिटल के संचालन को जैसे ही पता चला कि पुलिस को जानकारी हो गई है, तो उसने आयुष को मेड लाइफ हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया, जबकि पारुल तोमर को कल्याणपुर के ही प्रिया हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया। हालांकि, पुलिस जांच करते हुए दोनों तक पहुंच गई। इसी दौरान किडनी डोनर आयुष की हालत बिगड़ने लगी। पुलिस ने पारुल तोमर और आयुष चौधरी को हैलट अस्पताल के PGI में भर्ती कराया दिया। अब समझिए कैसे 9 लाख के लिए आयुष ने अपनी मौत को दावत दी MBA स्टूडेंट को कैसे जाल में फंसाया पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आयुष चौधरी ने दलाल शिवम के जरिए पारुल से 9 लाख रुपए में किडनी देने की डील फाइनल की थी। हालांकि बीच में आयुष को लगा ये कानूनी तौर पर अपराध है। इस सर्जरी को करवाने में मौत हो सकती है। लेकिन दलाल शिवम ने आयुष को अमिताभ बच्चन और वृंदावन के संत प्रमानंद महाराज का उदाहरण देते हुए आयुष का ब्रेनवाश किया। इसके बाद आयुष कानपुर के कल्याणपुर स्थित आहूजा हॉस्पिटल में किडनी निकलवाने के लिए पहुंचा। आयुष मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है। आयुष के महंगे शौक थे। वह उत्तराखंड के देहरादून के एक कॉलेज में MBA फाइनल ईयर का छात्र था। आयुष के परिवार में मां, एक भाई, बहन है। उसको कॉलेज की फीस जमा करनी थी। महंगे शौक और कॉलेज की फीस ने उसे इस फैसले पर पहुंचा दिया। पुलिस और डॉक्टरों से बोला- घर वालों को मत बताना आयुष की किडनी निकलने के बाद पुलिस ने आयुष से बात की। पुलिस ने उससे घर का नंबर मांगा। लेकिन उसने पुलिस को नंबर नहीं दिया और रोते हुए आयुष ने कहा- प्लीज मेरे घर वालों को कुछ भी मत बताना। इसके बाद पुलिस ने कहा- सुनों यहां तुम्हारे परिवार का एक सदस्य का होना बहुत जरूरी है। इसके बाद उसने अपनी गर्ल फ्रेंड को फोन किया। जो बुधवार की सुबह हेलट स्थित PGI पहुंची। हालांकि अस्पताल के सूत्रों ने बताया- आयुष अपनी गलती की माफी अपनी गर्ल फ्रेंड से मांगते हुए रोने लगा। उसके बाद उसकी गर्लफ्रेंड वहां से वापस चली गई। डॉक्टरों के मुताबिक आयुष को क्रिटिकल कंडीशन में PGI के ICU में भर्ती किया गया था। क्योंकि आयुष के इन्फेक्शन फैल रहा था। जिसके बाद आयुष को लखनऊ के RMLH में आज एडमिट कराया गया है। अब समझिए कैसे 1 करोड़ खर्च होने के बाद भी पारुल की जान को खतरा पारुल के परिवार में दो बेटे और पति पारुल तोमर मूल रूप से मुजफ्फरनगर के सिविल लाइन कालोनी की रहने वाली हैं। उनके परिवार में उसके पति और दो बेटे हैं। पारुल के पति मेरठ में 8 वीं तक का एक स्कूल चलाते हैं। पारुल कई सालों से किडनी को लेकर परेशान थी। पारुल का संपर्क दलाल शिवम से हुआ। जिसके बाद वह आयुष के कॉन्टैक्ट में आई। इसीलिए पारुल ने आयुष को पैसे दिये थे। इलाज के लिए किडनी रैकेट के दलाल शिवम अग्रवाल को भी कुछ पैसे दिये थे। पुलिस के मुताबिक इस केस की डील करीब 90 लाख से 1 करोड़ रुपए के बीच में हुई थी। इसमें मेरठ से लेकर कानपुर के डॉक्टरों और दलालों का भी कमीशन था। लेकिन अब करीब 1 करोड़ रुपए के बाद भी पारुल की हालत गंभीर बनी हुई है। कानपुर में बिगड़ी हालत तो लखनऊ किया एडमिट पुलिस ने कार्यवाही के दौरान पारुल को प्रिया अस्पताल से बरामद किया था। जहां से पारुल को बेहतर इलाज के लिए हैलट के PGI में एडमिट कराया गया था। यहां पारुल को ICU में शिफ्ट किया गया था। यहां पारुल का ख्याल रखने के लिए उसका भाई कानपुर पहुंचा था। जो ICU के बाहर बैठा रहता था। अस्पताल के अंदर जांच करवाने से लेकर अन्य काम करता था। मंगलवार को पारुल का इन्फेक्शन बढ़ गया था, डॉक्टरों ने अपनी जांच में पाया- उसका हीमोग्लोबिन और यूरिन आउटपुट कम हो रहा था। हालांकि डॉक्टरों ने बुधवार को पारुल को इलाज करके नॉर्मल पोजीशन में कर लिया। इसके बाद बुधवार को पारुल ने मूंग की दाल और दलिया का पानी लिक्विड के रूप में दिया गया था। लेकिन पारुल की हालत गंभीर बनी हुई थी। सही इलाज के लिए RMLH हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया डॉक्टरों ने सही इलाज के लिए गुरुवार की सुबह पारुल को लखनऊ स्थित RMLH हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया है। क्योंकि कानपुर के PGI में किडनी से संबंधित इलाज, दवाई और डॉक्टर नहीं है। न ही इस अस्पताल का किडनी की बीमारी के इलाज के लिए एप्रूवल मिला था। कानपुर के GSVM मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर संजय काला ने बताया- गुरुवार की सुबह keआयुष और पारुल दोनों को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ स्थित RMLH के नेफ्रोलॉजिस्ट डिपार्टमेंट में भर्ती कराया गया है। जहां इनको इसी डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट डॉक्टर की निगरानी में इलाज दिया जाएगा। इनको वहां भी ICU में भर्ती कराया गया है।
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