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    किडनी गैंग से जुड़ा शिवम महंगी शराब का शौकीन:मकान मालिक बोले- नर्स से अफेयर के चलते पत्नी को पीटता था, लाखों का सट्टा खेलता

    3 hours ago

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    '2 साल पहले शिवम हमारे मकान में किराये पर रहने आया था। 2500 रुपए पर कमरा दिया था। कुछ दिन बाद अपनी पत्नी को ले आया। शिवम अक्सर अपनी पत्नी के साथ मारपीट करता था। पत्नी कहती थी कि शिवम का नर्स से अफेयर है। कुछ दिन बाद शिवम ने पत्नी को घर से निकाल दिया। वह गीता नगर में एक मकान में काम करती और वहीं पर रहती थी। इसके बाद शिवम ने उससे तलाक ले लिया था।' यह कहना है गीता नगर के रहने वाले गोलू यादव का। गोलू यादव के पिता नन्हें यादव लोडर चालक हैं। उनके दो मंजिला मकान में 6 किराएदार रहते हैं। इन्हीं के मकान में किडनी रैकेट से जुड़ा शिवम अग्रवाल भी रहता था। शिवम अग्रवाल ने अकेले ही कानपुर में 50 किडनियां ट्रांसप्लांट कराईं। अपाचे बाइक और 2 साल में अर्टिगा गाड़ी खरीदी। कानपुर में हॉस्पिटल निर्माण के लिए जमीन खरीदी। मकान मालिक के बेटे गोलू ने बताया- शिवम महंगी शराब का शौकीन था। जुआं और सट्टा भी खेलता था। पढ़िए रिपोर्ट…. अब पढ़िए पूरी बातचीत… 2 साल पहले शिवम अपने साथ एक झोला लेकर आया था शिवम अग्रवाल, मूल रूप से जालौन का रहने वाला है। गीता नगर में रहने वाले गोलू ने बताया- 2 साल पहले शिवम एक झोला लेकर आया था, जिसमें कुछ बर्तन और एक छोटा सिलेंडर था। 2500 रुपए उसे किराये पर हम लोगों ने कमरा दिया। साथ ही एक बेड भी दे दिया था। कुछ दिन बाद शिवम अपनी पत्नी को भी ले आया। थोड़े दिन बाद उसने अपनी पत्नी के साथ मारपीट शुरू कर दी। शराब के नशे में धुत होकर वह अक्सर अपनी पत्नी को बेरहमी से पीटता था। कई बार चीखें सुनकर हम लोगों ने बीच-बचाव भी कराया था। पत्नी से तलाक हो गया शिवम की पत्नी ने बताया था- शिवम का किसी नर्स से अफेयर है, जिसका विरोध करने पर वह मारता-पीटता है। कुछ दिनों के बाद शिवम की पत्नी उसे छोड़कर चली गई और रावतपुर के पास एक बंगले में काम करने लगी। थोड़े समय बाद शिवम का तलाक भी हो गया, जिसके बाद उसने दूसरी शादी कर ली। गोलू ने बताया- पत्नी से अलग होने के बाद शिवम आवारा हो गया था। वह अक्सर नशे में धुत होकर घर आता था। मना करने पर हम लोगों से भी झगड़ा हो गया। इसके बाद हम लोगों ने उससे मकान खाली करा लिया था। लाखों का खेलता था जुआं-सट्‌टा गोलू ने बताया- हमारा मकान छोड़ने के बाद शिवम पास में ही रहनेवाले राजेंद्र खरे के मकान में रहने चला गया। कुछ समय बाद उसने कल्याणपुर में रहने वाली एक लड़की को अपने जाल में फंसाकर दूसरी शादी कर ली। शादी के बाद वह कल्याणपुर में ही रहने लगा, लेकिन अक्सर गीता नगर में आता जाता रहता था। गोलू ने बताया- शिवम महंगी शराब का बहुत शौकीन था। वह 7-8 हजार की शराब की बोतल लेकर अक्सर आता था। शराब पीकर इलाके में रौब जमाता था। वह सट्‌टे और जुएं का भी लती था। हजारों-लाखों रुपए का जुआ खेलता था। वहीं, गीता नगर के रहने वाले शमशाद की गुडलक नाम से किराना की दुकान है,। उन्होंने बताया- शिवम मेरी दुकान पर कई सालों से आता-जाता था। कल्याणपुर में रहने के बाद भी वह अक्सर दुकान आता था। कल्याणपुर में रहने के दौरान शिवम ने अपाचे बाइक खरीदी थी। फिर देखते ही देखते उसने अर्टिका कार खरीद ली थी। शमशाद ने बताया- उसको लोगों को अपनी बातों में फंसाना बहुत अच्छे से आता था। वह कानपुर से बाहर अक्सर घूमने जाता था, जिसका अपने मोबाइल में स्टेट्स लगाता था। वह इतने विश्वास से बात करता था कि हर आदमी उसके बहकावे में आ जाता था। शिवम 8वीं पास है, लेकिन उसकी बातचीत पढ़े-लिखे व्यक्तियों की तरह थी। 50 किडनियां शिवम ने ट्रांसप्लांट कराई डीसीपी वेस्ट कासिम आबिदी ने बताया- कानपुर में सभी 50 किडनियां शिवम ने ही ट्रांसप्लांट कराई थी। किडनी ट्रांसप्लांट सिंडिकेट में पूरे कानपुर का मैनेजमेंट शिवम के हाथों में रहता था। शिवम के संपर्क में कानपुर के 8 अस्पताल थे। डील तय होने के बाद डॉक्टर रोहित शिवम को कॉल करके हॉस्पिटल और ट्रांसप्लांट करने का दिन तय करता था। इसके बाद डोनर और रिसीवर को कानपुर तक लाना, उनके सभी हेल्थ चेकअप कराना, जांच रिपोर्ट डॉ रोहित तक पहुंचाना और ऑपरेशन के दिन उन्हें निर्धारित हॉस्पिटल में एडमिट कराना और मरीज के परिजनों को ठहराने, खाने-पीने की पूरी जिम्मेदारियां शिवम पर की थी। सब कुछ सही तरीके से निपटने के बाद शिवम, डॉ रोहित को कॉल कर जानकारी देता था, इसके बाद डॉ रोहित की टीम फ्लाइट के जरिए कानपुर आती और निर्धारित अस्पताल में 6 से 7 घंटे ऑपरेशन करने के बाद रवाना हो जाती थी। इसके बाद डोनर और रिसीवर को दूसरे अस्पतालों में शिवम ही शिफ्ट करता था। डीसीपी वेस्ट ने बताया- शिवम ने शुरूआती दिनों में करीब 6 साल तक प्राइवेट एंबुलेंस चलाता था, इसके बाद वह किडनी ट्रांसप्लांट के गोरखधंधे में शामिल हो गया था। 4 साल पहले उसने एंबुलेंस चलाना बंद कर दिया और पूरी तरह से डॉ रोहित के लिए काम करने लगा था। -------------- अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… ये भी पढ़ें- किडनी बेचने वाला MBA स्टूडेंट गर्लफ्रेंड के सामने फूट-फूटकर रोया:कानपुर में पुलिसवालों के पैर पकड़े; बोला- मां को मत बताना कानपुर में रुपए के लालच में अपनी किडनी बेचने वाला आयुष हैलट अस्पताल के ICU में एडमिट है। पुलिस ने आयुष से परिजनों को जानकारी देने की बात कही। इस पर वह पुलिसकर्मियों के पैर पकड़कर रोने लगा। कहा- सर, मेरी मां को कुछ मत बताना। मैं नौकरी करने की बात कहकर कानपुर आया था। पढ़िए पूरी खबर…
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