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    1076 के कर्मियों का प्रदर्शन, वेतन विवाद में नया मोड़:पुलिसवालों ने जबरन बस में बैठाया, कार्रवाई के डर से छिपते फिर रहे कर्मचारी

    4 hours ago

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    लखनऊ में 1076 से जुड़े कर्मचारियों का प्रदर्शन अब तेज हो गया है। साइबर टॉवर में हुए हंगामे के बाद कई कर्मचारी पुलिस कार्रवाई के डर से इधर-उधर छिपते नजर आए। बताया जा रहा है कि एक महिला कर्मचारी खुद को बचाते हुए कामता बस स्टैंड तक पहुंचे, जबकि अन्य कर्मचारी अलग-अलग जगहों पर छिपकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। दूसरे दिन प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को पुलिस ने बसों में बैठाकर इको गार्डन भेज दिया। कर्मचारियों का कहना था कि 15 हजार रुपए की सैलरी का वादा करके 7000-8000 रुपए दिए जा रहे हैं। सैलरी भी रोककर दी जा रही है। प्रदर्शन कर रही एक महिला कर्मी ने कहा कि पुलिस उनके साथ मारपीट कर रही है। प्रशासन ने उनकी मांगों को पूरा करने के लिए 10 घंटे का समय दिया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। देखिए 5 तस्वीरें… 50 से ज्यादा कर्मचारी अब भी डटे करीब 50 से ज्यादा कर्मचारी अब भी विरोध में डटे हुए हैं और प्रशासन पर लगातार आरोप लगा रहे हैं कि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें 10 घंटे का समय दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, बल्कि पुलिस कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है। 'कई महीनों का भुगतान बाकी' प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का साफ कहना है कि अगर उनकी भर्ती ₹15,000 वेतन पर की गई थी, तो उन्हें आधी सैलरी क्यों दी जा रही है। उनका आरोप है कि न सिर्फ वेतन कम दिया जा रहा है, बल्कि भुगतान भी समय पर नहीं हो रहा। 60 दिन बाद भी पूरी सैलरी नहीं दी गई और कई महीनों का भुगतान अब भी बकाया है। चार महीने से बकाया वेतन, कर्मचारियों में बढ़ता आक्रोश कर्मचारियों के मुताबिक पिछले चार महीनों से उनका वेतन बकाया है। लगातार काम लेने के बावजूद भुगतान न होने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। बार-बार शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होने पर कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता चुना। 'हम सिर्फ उठा रहे अपनी मांग' कर्मचारियों का कहना है कि वे कोई गलत काम नहीं कर रहे, बल्कि सिर्फ अपने हक की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है- “अगर हमें ₹15,000 में भर्ती किया गया था, तो ₹7-8 हजार क्यों दिए जा रहे हैं? हम सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं, लेकिन हमारी बात सुनने के बजाय दबाव बनाया जा रहा है।” जनता की शिकायत सुनने वाली हेल्पलाइन खुद संकट में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) जो आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए बनाई गई थी, अब अपने ही कर्मचारियों के विरोध का सामना कर रही है। कर्मचारियों का यह आंदोलन अब सिर्फ वेतन विवाद नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया और सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।
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