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    12 गांव के 30 हजार लोगों पर बाढ़ का खतरा:बिहार से यूपी में आने वाली आफत का काउंटडाउन शुरू, जुलाई से अक्टूबर तक कुशीनगर-महराजगंज के गांव डूबने की आशंका

    6 hours ago

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    गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से यूपी और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का काउंटडाउन शुरू हो गया है। नदी का पानी अब गांवों की तरफ बढ़ने लगा है। विभाग ने 1 जून से 15 अक्टूबर तक चलने वाले बाढ़ सीजन के लिए तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि मानसून लेट होने की वजह से अब जुलाई से बाढ़ का खतरा देखा जा रहा है। गंडक बराज और संवेदनशील बांधों पर 24 घंटे नजर रखने के लिए एक हाईटेक कंट्रोल रूम बनाया गया है। इस बार सुरक्षा के लिए बैराज पर 56 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और इसे संभालने के लिए एडवांस टेक्नॉलजी तैयार है। आपात स्थिति से निपटने के लिए रिटायर्ड इंजीनियरों की एक टीम भी बनाई गई है जो ऑन-फील्ड स्टाफ को गाइड करेगी। नेपाल से पानी छोड़े जाने के कारण कुशीनगर और महराजगंज के 12 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इससे करीब 30 हजार लोग प्रभावित होते हैं। उनका जनजीवन चार महीने के लिए पूरी तरह से बिखर जाता है। इसके बाद मौसमी बीमारियों से भी यहां के लोग ज्यादा परेशान हो जाते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। प्रभावित रास्तों और संवेदनशील जगहों पर पुलिस बल तैनात करने की तैयारी है। पहले पिछले साल की भयवाह तस्वीरें देखिए - बाढ़ से निपटने के लिए हाईटेक इंतजाम और टीम बिल्डिंग पर जोर विभाग ने 1 जून से 15 अक्टूबर तक चलने वाले बाढ़ सीजन को देखते हुए गंडक बैराज और सभी संवेदनशील तटबंधों (बांधों) पर 24 घंटे निगरानी बढ़ा दी है। इसके लिए एक हाईटेक कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां इंजीनियर और तकनीकी स्टाफ लगातार जलस्तर पर नजर रखेंगे। इस बार विभाग सिर्फ पुराने तौर-तरीकों पर निर्भर नहीं है। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए गंडक बैराज परिसर में 56 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। बैराज को संभालने के लिए स्काडा (SCADA) सिस्टम, इलेक्ट्रिकल पैनल और मैनुअल, तीनों तरह के इंतजाम तैयार हैं। करीब 8.5 लाख क्यूसेक क्षमता वाला यह बैराज साल 2003 में करीब 6.40 लाख क्यूसेक पानी का भारी दबाव झेल चुका है। रिटायर्ड अनुभवी इंजीनियर देंगे टेक्निकल गाइडेंस आपात स्थिति से निपटने के लिए इस बार 'टीम बिल्डिंग' और आपसी तालमेल को सबसे बड़ा हथियार बनाया गया है। इसके अलावा, एक 'बाढ़ संघर्षात्मक बल' का गठन किया गया है, जिसमें रिटायर्ड अनुभवी इंजीनियर ऑन-फील्ड टीम को तकनीकी गाइडेंस देंगे। सिंचाई खंड गोरखपुर और बेतिया (बिहार) की मांग के अनुसार नहरों में पानी की सप्लाई और नेपाल के सूरजपुरा हाइड्रो पावर स्टेशन के संचालन को लेकर भी पूरा तालमेल बिठाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ के दौरान नेपाल के अधिकारियों के साथ पल-पल की जानकारी साझा की जाएगी, ताकि किसी भी संकट से तुरंत निपटा जा सके। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ते ही हर साल यूपी और बिहार के करीब डेढ़ दर्जन गांवों में बाढ़ का कहर टूटता है। इस बार भी इन गांवों पर सबसे ज्यादा संकट है… बाढ़ का पानी गांव में पहुंचना शुरू, प्रशासन मुस्तैद नेपाल के पहाड़ी इलाकों में होने वाली बारिश का सीधा असर गंडक नदी के जलस्तर पर पड़ता है। इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज का मुख्य नियंत्रण कक्ष अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों के ग्रामीणों की परेशानी भी बढ़ने लगी हैं। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि इस बार समय रहते सभी इंतजाम किए जा रहे हैं। पनियहवा में जान जोखिम में डालकर कारोबार बचाने की जद्दोजहद नेपाल से छोड़े गए पानी के बाद गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने कुशीनगर के पनियहवा क्षेत्र में तबाही मचानी शुरू कर दी है। पिछले साल बाढ़ का पानी ने गांवों और रास्तों पर जो तबाही मचाई थी उससे लोगों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया था। ऊपर दिख रही तस्वीर पिछले साल जुलाई महीने की है। लोग घुटनों से ऊपर तक भरे बाढ़ के पानी के बीच से रास्ते पार कर थे। अपने रोजगार को बचाने के लिए कंधे पर लाठी के सहारे भारी संख्या में मुर्गियों (पोल्ट्री) को टांगकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाते दिखें थे। पानी के तेज बहाव के बाद भी लोग जान जोखिम में डालकर मील-दर-मील का सफर तय कर रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल बाढ़ उनके आशियाने के साथ-साथ उनके काम-काज और रोजी-रोटी को भी ठप कर देती है। पेट पालने के लिए उन्हें इस तरह के संघर्ष करने पड़ते हैं। बाढ़ के पानी से घिरीं सड़कें - कुशीनगर में घुटनों तक भरे पानी के बीच से निकलने को मजबूर राहगीर बाढ़ की स्थिति के बीच लोग मोटरसाइकिल को पानी के बीच से धक्का मारकर निकालते हैं। महिलाएं और बुजुर्ग पैदल ही इन रास्तों को पार करते हैं। इस बीच कई जगह पर गाड़ियां भी फंस जाती हैं। पानी का स्तर लगातार बढ़ने से ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नाव को धक्का मारकर रास्ता पार कर रहे लोग इसमें सड़क पर जमा कीचड़ भी बड़ी समस्या पैदा कर देता है। सड़कों पर कीचड़ इतना ज्यादा होता है कि नाव को आगे बढ़ाने के लिए कई युवकों को पानी में उतरकर कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। नावों पर मोटरसाइकिलें, भारी बोरियां और कुछ महिलाएं सवार होती हैं। जिन्हें सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया जाता है। हर साल आने वाली आपदा एक बार फिर यहां के लोगों के लिए भारी मुसीबत और कड़ा संघर्ष लेकर आने वाली है। जिसके लिए ग्रामीणों ने तैयारियां शुरू कर दी है। बड़े वाहनों के लिए सड़क पार करना बड़ी चुनौती ऐसे समय में बड़ी गाड़ियों के लिए भी बड़ी चुनौती होती है। गाड़ियां पानी के तेज बहाव और लहरों को चीरते हुए पुलिया पार करती दिखती हैं। रास्ते के दोनों ओर मदद के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा लोगों को सचेत किया जा रहा है। फिर भी लोग मजबूरी या लापरवाही के कारण ऐसे नाले को पार करने का जोखिम उठाने को मजबूर हैं। जलमग्न रास्तों पर सुरक्षा बल तैनात, लोगों को किया जा रहा अलर्ट गंडक नदी और स्थानीय नालों में बढ़े जलस्तर के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पुलिस की टीम मौके पर पहुंच जाती है। उफनती नदी और जलमग्न हो चुकी सड़क के किनारे पुलिस की गाड़ियां तैनात हो जाती हैं। जरूरत पड़ने पर पुलिस अधिकारी लोगों को समझाते हुए वापस घर जाने की हिदायत देते हैं। जिससे किसी भी अप्रिय घटना या हादसे को टाला जा सके। इस बीक पुलिस स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखते हैं। बैराज के सभी 36 गेटों का टेक्निकल ऑडिट पूरा, 24 घंटे होगी निगरानी गंडक बैराज भारत-नेपाल के आपसी सहयोग का प्रतीक है। बाढ़ अवधि के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा पश्चिमी चंपारण जिला प्रशासन की देखरेख में बिहार सरकार ने गंडक बैराज के सभी 36 फाटकों की तकनीकी जांच का काम पूरा कर लिया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कर्मचारियों की 24 घंटे की स्पेशल शिफ्ट ड्यूटी लगाई गई है। कंट्रोल रूम को पूरी तरह एक्टिव कर दिया गया है। प्रत्येक शिफ्ट में तैनात कर्मचारी नदी के जलस्तर की निगरानी करेंगे और फाटकों के संचालन पर पैनी नजर रखेंगे। इंजीनियरों की एक विशेष टीम को भी अलर्ट मोड पर है। उत्तर प्रदेश और बिहार में गंडक का महत्व उत्तर प्रदेश में गंडक नदी कुशीनगर और महराजगंज जिलों से होकर बहती है जबकि बिहार में यह पश्चिमी चंपारण, सारन और मुजफ्फरपुर जिलों को पार करती है। यह नदी न केवल बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत है बल्कि बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गंडक बैराज के निर्माण ने इस क्षेत्र में बाढ़ और सूखे की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया है। यह नदी भारत में प्रवेश करने के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच एक प्राकृतिक सीमा बनाती है। गंडक बैराज की 7 लाख क्यूसेक पानी भंडारण क्षमता नेपाल के पहाड़ी इलाकों से होकर बहने वाली गंडक नदी पर बना वाल्मिकीनगर बैराज इकलौता बैराज है, जिसकी क्षमता 7 लाख क्यूसेक पानी स्टोरेज की है। हालांकि, नेपाल के बरघाट में नदी डिस्चार्ज मापने के लिए केंद्र बनाया गया है। बरघाट से मिले डिस्चार्ज की सूचना के आधार पर बैराज से कभी भी फाटक खोल दिए जाते हैं। हालांकि नदी में 3 लाख क्यूसेक से अधिक डिस्चार्ज होने के बाद बैराज पर तैनात कर्मी सभी 36 फाटक उठा देते हैं। इसकी सूचना गांवों में तहसील प्रशासन द्वारा हूटर बजाकर सूचना दी जाती है। गंडक की चुनौतियां और प्रबंधन गंडक नदी अपने साथ बाढ़ और कटाव जैसी चुनौतियां भी लाती है, खासकर बारिश के मौसम में। वाल्मीकिनगर में स्थित गंडक बैराज इस नदी के जलस्तर को नियंत्रित करने और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत और नेपाल के बीच सहयोग से इस नदी के प्रबंधन को और प्रभावी बनाया गया है। बैराज से निकली चार नहरें, भारत-नेपाल में सिंचाई को मिलता है बल गंडक नदी पर बिहार के वाल्मीकिनगर में स्थित गंडक बैराज भारत और नेपाल के लिए एक महत्वपूर्ण कृषि केंद्र है। इस बैराज से निकलने वाली चार नहरें बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सींचकर क्षेत्रीय विकास और समृद्धि का आधार बन रही हैं। यह परियोजना भारत-नेपाल सहयोग का एक जीवंत उदाहरण है जो दोनों देशों के किसानों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। सेनानी और तत्कालीन सांसद प्रो. सक्सेना के 28 दिन के अनशन ने दिलाई थी गंडक बैराज को मंजूरी 1959 के भारत-नेपाल समझौते से वाल्मीकिनगर में गंडक बैराज बना था। गंडक नदी आज बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए जीवन रेखा है, लेकिन इसकी राह में बाढ़ और सूखे की त्रासदी ने कई जिलों को सालों तक प्रभावित किया। इस समस्या से निपटने के लिए गंडक बैराज की नींव रखने में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और तत्कालीन महराजगंज के सांसद प्रो. शिब्बन लाल सक्सेना की अहम भूमिका रही। उनके 28 दिन के आमरण अनशन ने तत्कालीन नेहरू सरकार को मजबूर कर दिया, जिसके बाद गंडक परियोजना को स्वीकृति मिली। प्रो. शिब्बन लाल सक्सेना के अनशन और समर्पण की कहानी आज भी इस क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। जवाब न मिलने पर 28 दिन तक किया अनशन भारत सरकार से पत्रों को कोई जवाब नहीं मिलने पर तत्कालीन सांसद प्रो. शिब्बन लाल सक्सेना ने संसद भवन के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया। 28 दिन तक चले इस अनशन ने केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को हिला दिया। प्रो. सक्सेना के दृढ़ संकल्प और जन समर्थन की गूंज ने आखिरकार सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। पंडित नेहरू के हस्तक्षेप के बाद गंडक परियोजना को हरी झंडी मिली, जिसने इस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ। प्रो. शिब्बन लाल ने नहरों के लिए जमीन दिलाने के लिए की थी पहल परियोजना के अंतर्गत गंडक नदी पर बैराज बनने की स्वीकृति मिलने के बाद तत्कालीन सांसद प्रो. शिब्बन लाल ने सरकार को नहर के लिए किसानों से जमीन दिलवाने की भी पहल की। इसके लिए उन्होंने हर गांव का भ्रमण किया। उसके बाद नहर निर्माण के लिए किसानों को उचित मुआवजा दिलाकर जमीन हस्तान्तरित कराई। जिससे नहर निर्माण पर काम शुरू हो सका। इससे नेपाल, बिहार तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में नहरों का जाल बिछ गया। वहीं सिंचाई की क्षमता 18800 क्यूसेक तक जा पहुंची। आज इसी परियोजना के कारण देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर व पश्चिमी चंपारण के इलाकों के खेत लहलहा रहे हैं। ---------------- ये भी पढ़िए... चंपत राय के इस्तीफे की स्क्रिप्ट हरिद्वार में लिखी गई:RSS ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर फटकार लगाई, 25 जून की रात कहा- पद छोड़ दो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दबाव में दिया। इसकी स्क्रिप्ट 8 दिन पहले हरिद्वार में लिखी गई। विश्व हिंदू परिषद की 18 और 19 जून को हरिद्वार में बैठक थी। इसमें अयोध्या से चंपत राय और गोपाल राव शामिल हुए थे। सूत्र बताते हैं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने दोनों से राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जानकारी ली। पढ़ें पूरी खबर…
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