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    335 सैंपल में 172 नमूने जांच में फेल:गोंडा में खाद्य पदार्थों में भारी मिलावट, 28.15 लाख जुर्माना, दूध उत्पादों में सर्वाधिक

    9 hours ago

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    गोंडा जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी का काला कारोबार चरम पर है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जारी हालिया आंकड़ों ने आम जनता की सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विभाग की जांच में सामने आया है कि जिले में बिकने वाला लगभग हर दूसरा खाद्य पदार्थ मिलावटी या अधोमानक है। हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान विभाग ने कुल 449 नमूने संग्रहित किए थे। इनमें से 334 नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, जबकि 115 नमूनों की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। प्राप्त रिपोर्टों में से 172 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे, जो दर्शाता है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य सामग्री का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जांच में यह प्रमुखता से सामने आया है कि दूध और उससे बने उत्पादों में सबसे अधिक मिलावट की जा रही है। त्योहारी सीजन में मांग पूरी करने के लिए मिल्क पाउडर और रिफाइंड तेल के मिश्रण से सिंथेटिक पनीर तैयार किया जा रहा है। मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए दुकानदार तय सीमा से अधिक और घटिया गुणवत्ता वाले रंगों का प्रयोग कर रहे हैं, जो कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। दूध, घी, खोया और सरसों तेल जैसे रोजमर्रा के सामानों में भी भारी मिलावट पाई गई है। मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए विभाग ने अब तक 145 मुकदमे दर्ज कराए हैं। न्यायालय ने इन मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों पर कुल 28 लाख 15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। मुख्य खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन अधिकारी संजय कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो दुकानदार जुर्माना जमा नहीं करेंगे, उनके लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए जाएंगे। ​प्रशासनिक सख्ती के बावजूद मिलावटखोरी पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। खुले सामानों के बजाय पैक्ड और विश्वसनीय ब्रांड्स को प्राथमिकता देना और संदिग्ध सामग्री की शिकायत विभाग से करना ही अपनी और अपने परिवार की सेहत बचाने का एकमात्र रास्ता है।
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