Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    8वीं-10वीं पास युवाओं ने की सैकड़ों नक्सलियों की नसबंदी:झारखंड से आए डॉक्टर ने दी ट्रेनिंग; अब सरेंडर के बाद करवा रहे रिवर्सल ऑपरेशन

    8 hours ago

    1

    0

    बस्तर के जंगलों में नक्सली संगठन शादी के इच्छुक नक्सलियों की नसबंदी कराने के लिए गांव के कम पढ़े-लिखे युवाओं का इस्तेमाल करता था। जिन युवाओं ने सैकड़ों नक्सलियों की नसबंदी की, वे डॉक्टर नहीं थे और न ही उनके पास कोई मेडिकल डिग्री थी। इनमें अधिकतर 8वीं से 10वीं पास ग्रामीण युवक थे। इन युवाओं को साल 2014 में झारखंड से आए डॉक्टर रफीक ने नसबंदी और छोटे-मोटे ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग दी थी। इसके बाद जंगलों के भीतर ही नक्सलियों की नसबंदी की जाने लगी। यह खुलासा 8 लाख रुपए के इनामी पूर्व नक्सली DVCM शंकर मुचाकी ने किया है। शंकर उन 34 पूर्व नक्सलियों में शामिल हैं, जिनकी हाल ही में जगदलपुर के महारानी अस्पताल में नसबंदी रिवर्सल सर्जरी की गई है। सरेंडर करने के बाद ये पूर्व नक्सली अब सामान्य जीवन जीना चाहते हैं और पिता बनने के लिए अपनी नसबंदी खुलवा रहे हैं। देखिए पहले ये तस्वीरें- 15 साल की उम्र में संगठन में शामिल हुआ, 17 साल जंगल में रहा शंकर मुचाकी (33) करीब 15 साल की उम्र में नक्सली संगठन में शामिल हुआ था। उसने गंगालूर और नेशनल पार्क एरिया कमेटी में लगभग 17 सालों तक सक्रिय रूप से काम किया। मार्च 2026 में उसने नक्सली नेता पापा राव के साथ सरेंडर किया। संगठन में रहते हुए वह AK-47 चलाता था और मीनपा, धर्मावरम, टेकलगुड़ेम जैसी बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहा, जिनमें 40 से अधिक जवान शहीद हुए थे। “शादी करनी है तो पहले नसबंदी कराओ” शंकर ने बताया कि नक्सली संगठन का अपना संविधान और नियम-कायदा होता है। उसने कहा कि संगठन में शादी करने से पहले पुरुष नक्सली की नसबंदी कराना अनिवार्य था। अगर बच्चे हो जाते तो संगठन का मानना था कि लड़ाके परिवार में उलझ जाएंगे और आंदोलन प्रभावित होगा। शादी के लिए सीनियर कैडरों से अनुमति लेनी पड़ती थी। शंकर ने बताया कि उसकी पत्नी भी नक्सल संगठन की सदस्य थी। संगठन में ही दोनों की शादी हुई और शादी से करीब 6 महीने पहले उसने नसबंदी करवाई थी। जंगल में ही हो जाता था ऑपरेशन सबसे चौंकाने वाला खुलासा नसबंदी प्रक्रिया को लेकर हुआ। शंकर ने बताया कि मेरी नसबंदी किसी अस्पताल में नहीं हुई थी। न ही कोई बड़ा डॉक्टर आया था। बीजापुर जिले के नेशनल पार्क इलाके में गांव के युवक आए थे और उन्होंने जंगल में ही ऑपरेशन किया था। मेरे साथ कई अन्य साथियों की भी इसी तरह नसबंदी की गई थी। उसने बताया कि 2014 के आसपास रफीक नाम का डॉक्टर झारखंड से इलाके में पहुंचा था। उसने स्थानीय युवाओं को नसबंदी और अन्य छोटे ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग दी थी। इसके बाद जब भी कोई नक्सली शादी करना चाहता था तो गांव के उन्हीं युवाओं को बुलाया जाता था। संगठन के पास ऑपरेशन के लिए जरूरी उपकरण और दवाइयां पहले से मौजूद रहती थी। ये युवक सामान्य ग्रामीण थे, उन्होंने कभी मेडिकल कॉलेज नहीं देखा था। हालांकि शंकर का दावा है कि उनके किए गए ऑपरेशन में किसी साथी की मौत या गंभीर दिक्कत की जानकारी सामने नहीं आई। अब पिता बनने का सपना शंकर का कहना है कि संगठन में रहते हुए पिता बनने की इच्छा दबानी पड़ी थी। मैं अब सामान्य जिंदगी जीना चाहता हूं। परिवार बढ़ाना चाहता हूं। इसलिए सरेंडर के बाद नसबंदी खुलवाने का फैसला लिया। प्यार हुआ, शादी की इजाजत मिली... लेकिन पहले करानी पड़ी नसबंदी पूर्व नक्सली लीडर हूंगा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। हूंगा ने बताया कि वह संगठन में ACM कैडर का सदस्य था। इसी दौरान उसे संगठन की महिला नक्सली से प्यार हो गया। दोनों शादी करना चाहते थे। हमने अपने सीनियर नेताओं के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। उन्होंने अनुमति तो दे दी, लेकिन शर्त रखी कि पहले नसबंदी करानी होगी। साल 2022 में उसकी नसबंदी कर दी गई और बाद में दोनों की शादी हुई। मन में पिता बनने की इच्छा हमेशा थी, लेकिन संगठन के नियमों के कारण वह सपना अधूरा रह गया। अब आत्मसमर्पण के बाद नसबंदी खुलवा ली है। उम्मीद है कि जल्द परिवार पूरा होगा और मैं भी पिता बनने का सुख मिल सकेगा। 60 से ज्यादा पूर्व नक्सलियों की खुलेगी नसबंदी जगदलपुर के महारानी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर संजय प्रसाद ने कहा कि बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों से चिन्हित 60 से ज्यादा पूर्व नक्सलियों की नसबंदी रिवर्सल की प्रक्रिया चल रही है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर बोले- ऑपरेशन देखकर लगा, किसी प्रशिक्षित डॉक्टर ने ही की थी नसबंदी वेस्ट जोन यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की टीम इस विशेष अभियान में शामिल है। सोसायटी के कोषाध्यक्ष डॉ. सुशील राठी ने बताया कि डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. सुरेश सिंह, डॉ. सत्यदेव शर्मा, डॉ. राघवेंद्र सहित 20 से 30 लोगों की टीम जगदलपुर पहुंची है। उन्होंने कहा कि हमें जानकारी मिली थी कि कई सरेंडर नक्सलियों की नसबंदी हो चुकी है और वे अब सामान्य पारिवारिक जीवन जीना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से नसबंदी रिवर्सल प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। बड़े निजी अस्पतालों में इस ऑपरेशन पर करीब 1 से 1.5 लाख रुपए तक खर्च आता है। …………………. इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… अब पिता बन सकेंगे बस्तर के सरेंडर-नक्सली: संगठन में रहते हुए कराई गई थी नसबंदी, 28 के पिता बनने की जगी उम्मीद बंदूक छोड़कर सामान्य जीवन में लौटे बस्तर के सरेंडर नक्सलियों के अधूरे सपनों को अब नई उम्मीद मिली है। नक्सली संगठन में रहते हुए जिन युवाओं की नसबंदी करा दी गई थी और जो शादी के बाद भी संतान सुख से वंचित थे, उनकी नसबंदी खोलने के लिए प्रशासन ने विशेष पहल शुरू की है। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    स्टूडेंट ने समिति को बताया-CBSE के OSM में 15 गड़बड़ियां:शिक्षा मंत्रालय ने टेंडर देने को लेकर CBSE से रिपोर्ट मांगी
    Next Article
    हिमाचल पंचायत चुनाव में 443 नेता अनपढ़ जीते:63% जनप्रतिनिधि 10वीं या इससे कम पढ़े-लिखे, 21-30 साल के 13% युवाओं को कमान; महिलाओं का दबदबा

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment