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    आगरा में हीट वेव से बीमार पड़ रहे बच्चे:एसएन में 60% तक बढ़ा ग्राफ, डिहाइड्रेशन और तेज बुखार कर रहा परेशान, ऑयली क्रीम न लगाने की सलाह

    7 hours ago

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    भीषण गर्मी और लू के प्रकोप का असर अब बच्चों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में मरीजों की संख्या में करीब 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डॉक्टरों के अनुसार भर्ती 25 बच्चों में से 15 बच्चे हीट वेव से प्रभावित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा गंभीर समस्या डिहाइड्रेशन की सामने आ रही है। एसएन के बाल रोग विशेषज्ञ राम क्षितिज शर्मा ने बताया कि इन 15 बच्चों में से करीब 10 बच्चे डायरिया और डिहाइड्रेशन से जूझ रहे हैं, जबकि 7 से 8 बच्चों में तेज बुखार के लक्षण पाए गए हैं। नवजात शिशुओं से लेकर 5 साल तक के बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। लक्षणों में उल्टी-दस्त, तेज बुखार, सुस्ती, दूध या खाना छोड़ देना शामिल है। वहीं, स्कूल से धूप में लौटने वाले बच्चों में भी हीट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बाल रोग विशेषज्ञ राम क्षितिज शर्मा के मुताबिक, कई बार अभिभावक बच्चों को जरूरत से ज्यादा कपड़े पहना देते हैं, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है और डिहाइड्रेशन की समस्या गंभीर हो जाती है। उन्होंने बताया कि गर्मी में बच्चों में मिलिएरिया (घमौरियां), अर्टिकेरिया और एक्ने जैसी स्किन समस्याएं भी बढ़ रही हैं, जिनमें खुजली और जलन आम है। जिसमें उन्होंने ऑयली क्रीम न लगाने की सलाह दी है। बचाव के लिए डॉक्टरों की सलाह: डॉ. शर्मा ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को ज्यादा गर्म माहौल में न रखें, हल्के और कॉटन के कपड़े पहनाएं और समय-समय पर उनके शरीर का तापमान चेक करते रहें। यदि बच्चा ज्यादा गर्म लगे तो तुरंत उसे ठंडी जगह—कूलर, पंखे या एसी—में ले जाएं। स्कूल जाने वाले बच्चों को दोपहर 12 बजे से पहले घर लाने, साथ में दो पानी की बोतल देने और धूप में निकलते समय सिर ढककर भेजने की सलाह दी गई है। नवजात शिशुओं को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पिलाते रहें, जबकि बड़े बच्चों को दिनभर में 2-3 लीटर पानी देना जरूरी है। इसके अलावा, खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा जैसे मौसमी फलों का सेवन बढ़ाने और शुगर ड्रिंक्स से दूरी बनाने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा है कि सुबह 10 बजे से शाम तक बच्चों को तेज धूप में बाहर न निकालें, ताकि हीट वेव के खतरे से बचा जा सके।
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