Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    आजमगढ़ के महामूर्ख सम्मेलन में हुई मूर्खता की जांच:होली मिलन के माध्यम से संख्या में कवियों ने किया काव्यपाठ, हमारे बच्चे भी पढ़ लिखकर विवेकानंद बन जाएं

    3 hours ago

    1

    0

    आजमगढ़ जिले में होली की शाम को श्री मारवाड़ी धर्मशाला समिति की ओर से महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। यह परंपरा विगत 40 वर्षों से चली आ रही है। इस मूर्खता जांच शिविर में शामिल बड़ी संख्या में कवियों ने काव्य पाठ करके सामाजिक ताने-मन पर भी निशाना साधा। इस महामूर्ख सम्मेलन में निशुल्क मूर्खता की जांच की जाती है। इस महामूर्ख सम्मेलन का मुख्य मकसद होली के त्योहार पर लोगों का मनोरंजन करना है। इस महामूर्ख सम्मेलन में बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों के पदाधिकारी सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग आते हैं। इन सभी को फलों सब्जियों की माला पहनाकर उनका स्वागत किया जाता है और हंसी ठिठोली का कार्यक्रम भी किया जाता है। जिससे आम जनमानस का मनोरंजन हो सके। इसके साथ ही इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हास्य कवि भी आते हैं जो अपनी रचनाओं और काव्य पाठ के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करते हैं। इस कार्यक्रम में आए कवियों का कहना है कि वर्ष में एक बार हर व्यक्ति को अपनी मूर्खता की जांच करानी चाहिए। जिससे आपके अंदर मूर्खता के कण अधिक है तो आप किसी को भी मूर्ख बना सकते हैं। मूर्खता के कण कम है तो कोई भी आपको मूर्ख बना सकता है। इसलिए अपनी मूर्खता की जांच कारण हम भी होली मनाई और आप भी होली मनाएं। काव्य पाठ करते हुए कवि ने कहा कि हमारे देश से अपराध सारे बंद हो जाय। है पढ़ने भेजते मां बाप बच्चों को इसी खातिर की मेरे बच्चे भी पढ़ लिखकर विवेकानन्द बन जाएं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में कवियों ने काव्य पाठ किया। बुरा ना मानो होली है मारवाड़ी धर्मशाला समिति के प्रबंधक श्याम सुंदर डालमिया ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद आम जनमानस का मनोरंजन करना है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में जो भी हास्य कवि आते हैं। काव्य पाठ करते हैं और लोगों के मूर्खता की जांच भी करते हैं। होली हंसी खुशी का त्यौहार है। ऐसे में बुरा न मानो होली है की तर्ज पर इस महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। इस सम्मेलन में पुरानी परंपराओं के जरिए समाज को जोड़ने का काम किया जाता है। यही कारण है की बड़ी संख्या में लोग इस महामूर्ख सम्मेलन में शामिल होते हैं और हंसी ठहाके का आनंद भी उठाते हैं।
    Click here to Read more
    Prev Article
    आबूधाबी से सकुशल लौटे दशरथ महल के महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य:अयोध्या एयरपोर्ट पर बृजभूषण सिंह और महंत जनमेजय शरण ने किया स्वागत
    Next Article
    श्री दाऊजी महाराज मंदिर में आज विश्व प्रसिद्ध हुरंगा:हुरियारों के नंगे बदन पर बरसेंगे कोड़े

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment