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    श्री दाऊजी महाराज मंदिर में आज विश्व प्रसिद्ध हुरंगा:हुरियारों के नंगे बदन पर बरसेंगे कोड़े

    3 hours ago

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    मथुरा के बल्देव स्थित श्री दाऊजी महाराज मंदिर में आज 11 बजे से विश्व प्रसिद्ध हुरंगा खेला जाएगा। यह ब्रज के होली महोत्सव का एक अनूठा और रोमांचक पर्व है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रांगण में आयोजित होने वाले इस हुरंगा के नायक शेषावतार श्री दाऊजी महाराज माने जाते हैं। ब्रज की अन्य होली भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित होती है, वहीं दाऊजी का हुरंगा उनके बड़े भ्राता श्री बलदेव जी को समर्पित है। हुरंगा की परंपरा अत्यंत निराली है। इसमें ब्रज की गोपिका स्वरूप महिलाएं पारंपरिक लहंगा-फरिया और आभूषण धारण कर समूहों में होली गीत गाते हुए मंदिर पहुंचती हैं। इसके बाद हुरंगा का मुख्य दृश्य शुरू होता है, जिसमें पुरुष गोप समूह नंगे बदन महिलाओं द्वारा प्रेम से भीगे पोतनों (कपड़ों) से कोड़ों की मार सहते हैं। हुरियारिनें परंपरा और उत्साह के साथ प्रेमपूर्ण प्रहार करती हैं, जिसमें आयु या रिश्ते का भेद नहीं देखा जाता। श्रद्धालु इस अद्भुत दृश्य का आनंद मंदिर की छतों और विशेष रूप से बनाए गए स्टेडियम से लेते हैं। आयोजन के दौरान मंच पर भगवान कृष्ण-बलराम सखाओं के साथ अबीर-गुलाल उड़ाते हैं। छतों से उड़ता गुलाल और फूलों की पंखुड़ियां पूरे वातावरण को इंद्रधनुषी बना देती हैं। यह उत्सव 'फागुन में जेठ कहे भाभी' की कहावत को चरितार्थ करता है, जो इसकी मस्ती और अनौपचारिक माहौल को दर्शाता है। हुरंगा में गोस्वामी श्री कल्याण देव जी के वंशज सेवायत पांडेय समाज के लोग भाग लेते हैं। महिलाएं पुरुषों के बदन से कपड़े फाड़कर उन्हें टेसू के प्राकृतिक रंग में भिगोकर कोड़ा बनाती हैं और उनसे प्रहार करती हैं। इस दौरान उत्सव का उत्साह चरम पर होता है। मंदिर प्रबंधक केपी तोमर के अनुसार, आयोजन में छह कुंतल टेसू के फूल, छह कुंतल गुलाब की पंखुड़ियां, 21 कुंतल गुलाल, दो कुंतल भुड़भुड़, दो कुंतल फिटकरी, तीन कुंतल चूना और 12 कुंतल केसरिया रंग सहित चंदन व हल्दी का उपयोग किया जाएगा। सीओ महावन स्वेता वर्मा ने बताया कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और हुड़दंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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