Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    आरोप साबित हुए बगैर बर्खास्तगी सही नहीं : हाईकोर्ट:मनगढ़ंत आरोप का मामला, बेसिक शिक्षा अधिकारी मऊ का आदेश रद्द

    2 hours ago

    2

    0

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जन्मतिथि में विसंगति के पीछे यदि याची की धोखाधड़ी की बात साबित नहीं होती है तो उसकी बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा काल्पनिक व मनगढ़ंत आरोप पर अपराध साबित हुए बगैर किसी को बर्खास्त नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकलपीठ ने सहायक शिक्षक की बर्खास्तगी संबंधी बेसिक शिक्षा अधिकारी मऊ का आदेश रद्द कर दिया है। मऊ का है मामला मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि याची विजय बहादुर यादव को सभी आवश्यक पात्रता मानदंडों को पूरा करने के उपरांत बीएसए मऊ के आठ अगस्त 2014 के आदेश से सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति दी गई। राजेश यादव ने 18 अक्टूबर 2018 को बीएसए से आरटीआइ के तहत याची के उन शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्रों और मार्कशीट की प्रतियों की मांग की , जिनके आधार पर नियुक्ति दी गई थी। याची के अनुसार यह आवेदन कानूनी रूप से मान्य नहीं था फिर भी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने 26मार्च 2019 को जारी आदेश में उससे दस्तावेज मांगे। बीएसए ने 15 मई 2019 को नोटिस जारी किया, जिसमें याची को 30 मई 2019 को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने के लिए कहा गया था। यह सुनवाई 30 अप्रैल 2019 को प्रस्तुत प्रमाणपत्रों और मार्कशीट में कथित विसंगतियों के संबंध में थी। याची ने तीन जून 2019 को विस्तृत उत्तर में आरोपों का जवाब दिया। इसके बाद 27 जून 2019 को बीएसए ने याची को सेवा से बर्खास्त करने तथा उसके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। जन्म तिथि को लेकर फंसा पेंच याची के अनुसार विवादित आदेश इस गलत धारणा पर आधारित है कि 1998 के हाई स्कूल प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि में विसंगति है। इसमें जन्मतिथि दो जुलाई 1984 बताई गई है, जबकि पूर्व माध्यमिक प्रमाणपत्र में यह सात जुलाई 1987 है। याची का कहना है कि हाई स्कूल प्रमाणपत्र का न तो उन्होंने कभी उपयोग किया है और न ही इसे किसी भी चरण में प्रस्तुत किया गया। यह उनके रिकार्ड का हिस्सा नहीं है। इसलिए पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और कानूनी रूप से अस्थिर है। कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई स्पष्ट या पुष्ट आरोप नहीं है कि याची द्वारा प्रतिवादियों के समक्ष प्रस्तुत शैक्षिक दस्तावेज जाली, मनगढ़ंत या अन्यथा झूठे थे। कोर्ट ने कहा मनगढ़ंत काल्पनिक आरोप के आधार पर बिना अपराध साबित हुए सहायक अध्यापक को बर्खास्त नहीं किया जा सकता।और बी एस ए के बर्खास्तगी आदेश को रद कर याची की सेवा बहाली का निर्देश दिया है। हालांकि कि कोर्ट ने काम नहीं तो दाम नहीं के सिद्धांत को अपनाते हुए कहा कि जितनी अवधि तक याची सेवा से बाहर रहा वेतन पाने का हकदार नहीं होगा।और याचिका स्वीकार कर ली।
    Click here to Read more
    Prev Article
    होर्मुज में ईरान के खिलाफ अमेरिका का ऑपरेशन नाकेबंदी, देखें दस्तक
    Next Article
    शॉर्ट सर्किट से सिटी मोटर्स वर्कशॉप में आग लगी:हरदोई में दमकल की 4 गाड़ियों ने 40 मिनट में पाया काबू

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment