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    आशुतोष बोले- यात्रा के बहाने अविमुक्तेश्वरानंद भाग न जाएं:कहा-प्रदेश में हिंदुओं को बरगलाने की साजिश, निगरानी रखी जाए

    3 hours ago

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    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज हर रोज नए आरोपों के साथ सामने आ रहे हैं। आशुतोष महाराज ने अब आरोप लगाया है कि अविमुक्तेश्वरानंद यात्रा के बहाने प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा के जरिये अविमुक्तेश्वरानंद प्रदेश में हिंदुओं को बरगलाने की साजिश रच रहे हैं। आशुतोष ने आरोप लगाए कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की निगरानी की जाए। ऐसा न हो कि वह यात्रा के नाम पर भाग जाएं। आरोप लगाय कि बटुकों के बगल के जिले इसलिए जा रहे हैं ताकि नाबालिगों को डराया जा सके। जानिये इस बार आशुतोष महाराज ने क्या कहा यह अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है कि स्वयं को शंकराचार्य बताने वाले अभियुक्त अविमुक्तेश्वरानंद वाराणसी से लखनऊ तक यात्रा निकालकर एक प्रकार से प्रशासनिक एवं न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने का प्रयास करा रहे हैं। जबकि "उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 (संशोधित 2020) राज्य में गाय, बैल या सांड के वध, तस्करी और गोमांस रखने पर पूरी तरह से प्रतिबंधित है। प्रदेश के हिंदुओं को बरगलाने, उत्तेजित करने की साजिश “प्रदेश के हिंदुओं को बरगलाने और उत्तेजित करने की साजिश है अभियुक्तों पर निगरानी रखी " इन दोनों में अन्य अभियुक्तों पर निगरानी रखी जाए कहीं है यात्रा के नाम पर भागना जाए पीड़ितों के गृह जनपद के बगल सीतापुर ( नैमिषारण्य) इसलिए भी जा रहे ताकि नाबालिग पीडित बटुको को अप्रत्यक्ष ढंग से डराया धमकाया जा सके इस यात्रा को "गौ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध" के नाम से प्रचारित किया जा रहा है, जबकि यह प्रतीत होता है कि यह कदम उन गंभीर आरोपों और प्रकरणों से ध्यान हटाने के उद्देश्य से उठाया गया है जिनकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होना अत्यंत आवश्यक है। नाबालिग बटुक भय और दबाव में आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा नाबालिग बटुकों के साथ अनुचित व्यवहार में लेगिंग अपराध में एफआईआर दर्ज हुई है, ऐसे मामलों की प्रकृति अत्यंत संवेदनशील होती है और इनकी जांच पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत गंभीरता से की जानी चाहिए। पॉक्सो कानून का उद्देश्य नाबालिग बटुक को किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न और मानसिक दबाव से सुरक्षा प्रदान हमारे नाबालिग बटुक भय और दबाव के वातावरण में हैं। यदि यह तथ्य सही है तो यह स्थिति अत्यंत गंभीर है, क्योंकि पॉक्सो कानून के अंतर्गत नाबालिगों को सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण में अपना बयान देने तथा न्याय प्राप्त करने का अधिकार है। किसी भी प्रकार का धार्मिक, सामाजिक या संस्थागत दबाव न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना चाहिए। शिष्य भी जांच से बचने के प्रयास में इसके अतिरिक्त यह भी चर्चाएं सामने आ रही हैं कि अभियुक्त अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े कुछ निकट सहयोगी और शिष्य भी संभावित जांच से बचने के प्रयास में हैं। उनके एक प्रमुख शिष्य अभियुक्त मुकुंदानंद के संबंध में भी यह कहा जा रहा है कि वे स्थान छोड़ने की तैयारी में हैं। साथ ही उनसे जुड़े कुछ निजी संबंधों के बारे में भी विभिन्न प्रकार की चर्चाएँ सामने आ रही हैं कि संबंधित व्यक्ति सार्वजनिक रूप से सामने आने से बच रहे हैं। इन सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर सत्य को सामने लाना अत्यंत आवश्यक है, उनकी जांच में सहयोग करना था वो भागने की फिराक में है धार्मिक पद और परंपराओं का सम्मान करना समाज का कर्तव्य है, किंतु किसी भी धार्मिक पद या प्रतिष्ठा का उपयोग कानून और जांच से बचने के लिए नहीं किया जा सकता। यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं तो उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए जांच में पूर्ण सहयोग करना चाहिए। यात्रा, भीड़ और सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से वातावरण बनाकर जांच एजेंसियों पर दबाव बनाना न्याय व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जा सकता। अतः संबंधित प्रशासन, पुलिस विभाग तथा बाल संरक्षण से जुड़ी एजेंसियों से यह मांग की जाती है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाए। नाबालिग के साथ उत्पीड़न के दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। निगरानी रखी जाए, कहीं भाग न जाए समाज और धर्म दोनों की गरिमा तभी सुरक्षित रह सकती है जब कानून का पालन हो और सत्य सामने आए। इसलिए इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया का पालन अत्यंत आवश्यक है। पहले कहा था नार्को टेस्ट कराया जाए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य के नार्को टेस्ट की मांग की है। उन्होंने कहा- अगर शंकराचार्य का नार्को टेस्ट होता है तो वो भी जांच के लिए तैयार हैं। सच सामने लाने के लिए यह जरूरी है। प्रयागराज में मीडिया रिलीज जारी कर आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा- शंकराचार्य की गोपनीय पत्नी नंदिनी उर्फ पूर्णाबा का प्रकरण सामने लाया जाए। साथ ही शंकराचार्य की बहन सरला उर्फ शारदांबा का मामला भी खोला जाए। इन दोनों के निवास स्थान की जांच हो। उनके नाम पर वाराणसी और अन्य स्थानों पर दर्ज संपत्तियों की खरीद की जांच हो। 'मेरा भी नार्को टेस्ट हो, मैं तैयार हूं' आशुतोष महाराज ने कहा- निष्पक्ष जांच के लिए शंकराचार्य के बाद खुद भी कोर्ट के आदेशानुसार नार्को परीक्षण कराने को तैयार हैं। उनका उद्देश्य केवल सत्य को सामने लाना है, ताकि पूरी घटना का निष्पक्ष खुलासा हो सके। उन्होंने मांग की कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी हो। यदि न्यायालय अनुमति दे तो नार्को परीक्षण की वीडियो सार्वजनिक की जाए, जिससे ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो सके। उन्होंने पुलिस प्रशासन से बिना किसी दबाव के उच्च स्तरीय, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की है। बहन-जीजा के संबंधों की भी जांच हो आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया- अविमुक्तेश्वरानंद की बहन सरला उर्फ शारदांबा का प्रकरण से क्या संबंध है, इसकी जांच की जाए। साथ ही अविमुक्तेश्वरानंद के जीजा सदानंद (जिन्हें गुरु भाई बताया जाता है) और सरला उर्फ शारदांबा के संबंध, निवास व्यवस्था, संपर्क, आवागमन तथा उनके नाम दर्ज संपत्तियों की भी जांच की जाए। इन चारों व्यक्तियों के बीच मोबाइल कॉल डिटेल, डिजिटल संचार, वित्तीय लेनदेन एवं आपसी संपर्क का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए। आशुतोष महाराज ने मांग की है कि न्यायालय की अनुमति लेकर नार्को टेस्ट /पॉलीग्राफ परीक्षण कराया जाए। शंकराचार्य ने आशुतोष महाराज को मायावी बताया था इससे पहले शंकराचार्य ने मंगलवार को दैनिक भास्कर से बातचीत में आशुतोष महाराज को मायावी बताया था। उन्होंने कहा था- आशुतोष बहुत मायावी आदमी है, वह कब रो और गा दे, इसका पता नहीं। बहुत दिनों से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। जो पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार बताए जाते हैं। वह समय के अनुसार अपना अभिनय कर रहे हैं। देखने वाले खुद कह रहे हैं कि यह अभिनय कर रहा है। शंकराचार्य को लेकर जारी विवाद का ताजा मामला विस्तार से पढ़िए- प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई। FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने सुनवाई की तारीख 9 मार्च तय की। तब तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं आशुतोष महाराज; जानिए इनके बारे में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का जन्म शामली के कांधला कस्बे के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता राजेंद्र पांडे दिल्ली रोड पर चलने वाली प्राइवेट बसों में कंडक्टर थे।आशुतोष महाराज कांधला के प्राचीन शाकुंभरी सिद्धपीठ मंदिर की कमेटी से जुड़े। वर्तमान में वह इसके प्रबंधक भी हैं। इन्हीं के परिवार के चाचा प्रदीप पांडे मंदिर में पुजारी हैं। 2022 में उन्होंने जगतगुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी। इसके बाद से वह संन्यासी जीवन जी रहे हैं। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें… 'शंकराचार्य के आश्रम में मैंने स्विमिंग पूल देखा':लेखिका भूमिका द्विवेदी का दावा, बोलीं- दीदी खुद को उनकी सखी कहती थीं काशी के विद्यापीठ की इमारत कोई आश्रम नहीं है। वहां हर जगह रहस्य हैं। आश्रम में स्विमिंग पूल तो मैंने खुद देखा है। बटुकों को इतनी इजाजत नहीं होती कि वो किसी से बात कर पाएं।' यह कहना है शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मठ पर सवाल उठाने वालीं लेखिका भूमिका द्विवेदी का। पढ़िए पूरी खबर
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