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    अखिलेश बोले- बसपा से पुराना रिश्ता, आगे भी काम करेंगे:नसीमुद्दीन को सपा जॉइन कराई; क्या मायावती को ऑफर दिया?

    8 hours ago

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    पश्चिम यूपी में मुस्लिमों के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा का दामन थाम लिया है। रविवार को अखिलेश यादव उन्हें साथ लेकर लखनऊ में सपा कार्यालय पहुंचे। वहां पार्टी की सदस्यता दिलाई। नसीमुद्दीन के साथ 15,758 लोगों ने भी सपा जॉइन की। इसमें ज्यादातर बसपा कार्यकर्ता रहे हैं। सपा प्रमुख ने कहा- बहुजन समाज से पुराना रिश्ता रहा है। अब यह रिश्ता गहरा होता जा रहा है। हम लोगों का मेल-जोल बढ़ेगा। कई बार गठबंधन बनते और टूटते हैं। हमें उम्मीद है कि उस लड़ाई को और आगे बढ़ाने का काम करेंगे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं- अखिलेश ने इशारों ही इशारों में बसपा सुप्रीमो मायावती को गठबंधन का ऑफर दिया है। अखिलेश ने सपा ऑफिस के मंच की दीवार यानी बैकड्रॉप पर नीला रंग भी जुड़वा दिया है। जो बसपा के झंडे का रंग है। जबकि पहले वहां हरा और लाल रंग था। वहीं, सपा जॉइन करने के बाद नसीमुद्दीन ने कहा- मैं पार्टी में सबसे जूनियर हूं। सब मेरे सीनियर हैं। मैं किसी भी पार्टी में रहा, नेता आपको (अखिलेश) मानता था। आपने कभी भी हिंदू, मुस्लिम, सिख- ईसाई की बात नहीं की, सबकी बात की। फिर उन्होंने शायरी पढ़ी- हयात लेके चलो कायनात लेके चलो, चलो तो सारे जमाने को साथ लेके चलो… योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- हमें चिड़िया की आंख में निशाना लगाना है। सत्ता बदलनी है। 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है। इस समय अपराध चरम पर है। ज्यादा बोलोगे तो बुलडोजर चल जाएगा। कोई नहीं बच रहा है। फिर दोबारा शायरी पढ़ी- दुनिया में कहीं ऐसी तमसीद नहीं मिलती, कातिल ही मुहाफिज है कातिल ही सिपाही है। महसूस ये होता है कि ये दौरे तबाही है, शीशे की अदालत है पत्थर की गवाही है। नसीमुद्दीन ने 24 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। माना जा रहा था कि वे चंद्रशेखर आजाद की पार्टी (आजाद समाज पार्टी) जॉइन करेंगे या फिर अपनी पार्टी बनाकर उससे समझौता करेंगे। लेकिन समीकरण बदले और बीते शुक्रवार को उन्होंने सपा जॉइन करने का ऐलान कर दिया। बसपा से राजनीति की शुरुआत करने वाले सिद्दीकी मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वे यूपी में एक बड़े मुस्लिम चेहरे माने जाते हैं। आजम खान के जेल जाने के बाद सपा में उनके कद का कोई मुस्लिम चेहरा नहीं था, जिसकी भरपाई सपा नसीमुद्दीन के जरिए करना चाहती है। अखिलेश की बड़ी बातें पढ़िए- 1- 'बहुजन समाज से हमारा गहरा रिश्ता, कई बार गठबंधन बने, टूटे’ अखिलेश ने कहा- नसीमुद्दीन पुराने नेता हैं। इनके पास कई सरकारें चलाने का अनुभव है। इनके साथ-साथ अनीस अहमद खां, राज कुमार पाल का पार्टी में स्वागत है। बहुजन समाज और समाजवादी पार्टी का यह रिश्ता गहरा होता जा रहा है। इससे हम लोगों का मेल-जोल बढ़ेगा। यह जॉइनिंग इसलिए बड़ी मानी जा रही है, क्योंकि यह पीडीए की जीत को और बड़ा करेगी। कभी बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और लोहिया जी ने साथ आने की कोशिश की थी। कई बार गठबंधन बने, दूर हुए, फिर गठबंधन बने और दूर हुए। हमें उम्मीद है कि उस लड़ाई को और आगे बढ़ाने का काम करेंगे। 2- ‘कुछ लोग शंकराचार्य को भी अपमानित कर रहे’ अखिलेश ने योगी पर निशाना साधा। बिना नाम लिए कहा- इनसे क्या उम्मीद करेंगे आप? ये हमारे शंकराचार्य का अपमान कर रहे हैं, इसके लिए भी क्या आप नया कानून लाएंगे? किसे नहीं दिख रहा कि वे खुलेआम शंकराचार्य का अपमान कर रहे हैं। क्या हमारी हैसियत है कि हम शंकाराचार्य के खिलाफ कुछ बोल दें। लीडर ऑफ अपोजिशन माता प्रसाद पांडेय, जो कभी स्पीकर भी थे, उनके बारे में क्या कह रहे थे। सबने सुना है। ये लोग जेन (ZEN-G) जी से घबराए हुए हैं। एक जेन जी बता रहा था कि सीएम का मतलब करप्ट माऊथ भी होता है। 3- ‘मुख्यमंत्री जी खिलाड़ी तो हैं, लेकिन खेल नहीं पा रहे’ अखिलेश ने कहा कि सपा के कामों की नकल की जा रही है। दस साल पहले एक्सप्रेस-वे पर हवाई जहाज उतारकर सपा ने अपना विजन दिखाया था। आज देश उसी विजन पर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री जी खिलाड़ी तो हैं, लेकिन खेल नहीं पा रहे। अखिलेश ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में एक ही नंबर के ओवरलोड ट्रक पकड़े जा रहे हैं। कुछ ट्रकों के नंबर पर ग्रीस तक लगी मिली है। भाजपा सरकार में कभी मांजा पकड़ा जा रहा है, कभी गांजा, और स्पेलिंग बदल जाए तो मामला कुछ और ही हो जाता है। 370 किलो गांजा एक मोडिफाइड ट्रक में फिल्मी तरीके से ले जाया जा रहा था। कहीं 10 किलो गांजा पकड़ा गया। सवाल यह नहीं है कि गांजा पकड़ा गया, असली सवाल यह है कि वह जा कहां रहा था। 4- ‘नोटबंदी सपा को हटाने के लिए लाई गई’ सीएम योगी के दिल्ली पॉल्यूशन को लेकर दिए बयान पर अखिलेश कहा- अब तो हवा खराब होने की बात चलने लगी है। लखनऊ वाले कह रहे हैं कि दिल्ली की हवा खराब है। सच्चाई यह है कि दोनों की हवा खराब है। यूपी देश की दिशा तय करता है। नोटबंदी सपा को हटाने के लिए लाई गई। उन्होंने कोडिन कफ सिरप कांड का फिर से जिक्र किया। पूछा- कोडीन भइया कहां हैं? दरअसल, गोरखपुर में शनिवार को सीएम योगी ने कहा था कि दिल्ली की वहां इतनी प्रदूषित हो चुकी है, जैसे गैस चैंबर हो। वहां सांस लेना भी कठिन है और आंखों में जलन होती है। गोरखपुर में वातावरण एकदम शुद्ध है। पर्यावरण को आप बचाएंगे, तो पर्यावरण आपको बचाएगा। 5- ‘राफेल खरीदा, मेक इन इंडिया का शेर क्या जंग खाएगा?’ सपा प्रमुख ने कहा- एप्सटीन पर हम चर्चा नहीं करना चाहते। सोशल मीडिया बड़ा खराब है। एप्सटीन फाइल्स कब की बनी रही होंगी, कितने दिनों बाद आई। दुनिया के कई देश ऐसे हैं जिन्होंने अपना सोशल मीडिया बनाया है, इसलिए बदलती हुई दुनिया में जरूरी है कि हम सावधान रहें। एप्सटीन फाइल्स तो एक विषय है। आपने अपना पूरा बाजार अमेरिका को दे दिया। 500 बिलियन डॉलर का हम उन्हें बाजार देंगे। 3 लाख करोड़ का राफेल खरीदा है। मेक इन इंडिया का शेर क्या जंग खाएगा? 6- 'ओवैसी के भाई के बयान पर कहा- साइकिल पर बैठकर यूपी आएंगे' AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ने कहा कि यूपी आ रहे हैं, यहां अपने झंडे को गाड़ेंगे। इस सवाल पर अखिलेश ने कहा- साइकिल पर बैठकर आएंगे। सपा ने नसीमुद्दीन को क्यों जॉइन कराया, 3 पॉइंट में समझिए 1- संदेश दिया- कौम की चिंता करने वाली सपा एकमात्र पार्टी सिद्दीकी पश्चिमी यूपी कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष भी रहे हैं। ऐसे में वहां के मुस्लिम वोटर्स में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। फिलहाल कांग्रेस के इमरान मसूद पश्चिमी यूपी में अधिक सक्रिय हैं। वह अक्सर सपा पर हमलावर रहते हैं। पश्चिमी यूपी में बसपा भी मुस्लिमों के बीच अपनी सक्रियता बढ़ा रही थी। ऐसे में सपा नसीमुद्दीन के जरिए इसकी काट करेगी। नसीमुद्दीन के माध्यम से सपा मुस्लिमों को यह संदेश भी देना चाहती है कि इस कौम की असली चिंता करने वाली वही एकमात्र पार्टी है। 2- औवेसी की धार कुंद करने का प्रयास वरिष्ठ पत्रकार एजाज हसन कहते हैं कि सपा के खिलाफ एक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश होती है कि सपा मुखिया मुस्लिमों के बारे में कम बोलते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि यह वोट बैंक उनसे छिटकने वाला नहीं है। बिहार और महाराष्ट्र में एमआईएम की मजबूत होती मौजूदगी से सपा नेताओं में भी यह अंदेशा है कि कहीं यूपी में उनके मुख्य वोट बैंक में सेंध न लग जाए। ऐसे में अखिलेश चुनाव से पहले मुस्लिम नेताओं को पार्टी जॉइन कराकर यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि मुस्लिम वोट बैंक पूरी तरह से उन्हीं के साथ है। इसे ओवैसी की पार्टी की धार कुंद करने के रूप में भी देखा जा रहा है। 3- बुंदेलखंड से पश्चिमी यूपी तक असर नसीमुद्दीन सिद्दीकी की पहचान एक बड़े नेता के रूप में रही है। ऐसे में उनके सपा में आने से बुंदेलखंड से लेकर पश्चिमी यूपी तक इसका असर पड़ेगा। पश्चिमी यूपी, जहां मुस्लिम बहुल आबादी है और एमआईएमआईएम अपनी पैठ जमाने की कोशिश कर रही है, वहां इसकी काट के तौर पर नसीमुद्दीन को पेश किया जा सकता है। अब क्यों दिया कांग्रेस से इस्तीफा, जानिए लोकसभा चुनाव में नहीं मिली थी तवज्जो कांग्रेस में नसीमुद्दीन की भूमिका और प्रभाव को लेकर असंतोष चल रहा था। 2024 लोकसभा चुनाव में भी उन्हें तवज्जो नहीं मिली थी। 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ नसीमुद्दीन कांग्रेस में अपने भविष्य को लेकर परेशान थे। कांग्रेस में सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद का कद जिस तेजी से बढ़ा है, उनकी गिनती प्रियंका के खास सिपहसालारों में होती है। इससे भी सिद्दीकी खासा परेशान थे। बीते दिनों अमौसी एयरपोर्ट पर राहुल गांधी को रिसीव करने के दौरान प्रमोद तिवारी और आराधना मिश्रा सहित अन्य नेताओं के आगे उन्हें एंट्री नहीं मिली थी। 24 जनवरी को नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इस्तीफा दिया। इसमें लिखा- मैं कांग्रेस में जातिवाद की लड़ाई लड़ने आया था। 8 साल से जमीन पर काम नहीं कर पाया। मुझमें जंग लग रही थी। मैं राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी का सम्मान करता हूं। आगे भी करता रहूंगा, लेकिन पार्टी में मेरे लिए कोई काम नहीं था। मैं कांग्रेस में इसलिए शामिल हुआ था कि संप्रदायवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ सकूं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा था। कांग्रेस पर क्यों नहीं हमलावर, अब वजह सामने आई नसीमुद्दीन कांग्रेस पर हमलावर नहीं थे। यहां तक कि कांग्रेस नेता राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी की तस्वीरें तक उनके आवास पर टंगी हैं। इसके अलावा कांशीराम की तस्वीर भी उनके आवास पर टंगी है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा था कि उनकी मंशा कांग्रेस को कमजोर करने की नहीं रही। अब यह स्पष्ट हो गया है कि वे क्यों कांग्रेस पर नरम रहे। यूपी में सपा और कांग्रेस का गठबंधन है। 2027 के विधानसभा चुनाव में भी यह गठबंधन बना रहेगा, इसका संकेत दोनों पार्टियों के राष्ट्रीय नेताओं की ओर से दिया जा चुका है। ऐसे में नसीमुद्दीन पहले से ही सजग थे और ऐसी कोई टिप्पणी कांग्रेस के प्रति नहीं कर रहे थे, जिससे कांग्रेस मुद्दा बनाए। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बारे में पढ़िए रेलवे ठेकेदार से शुरू हुआ था करियर उत्तर प्रदेश की सियासत में नसीमुद्दीन सिद्दीकी का नाम लंबे समय से चर्चित रहा है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी का जन्म 4 जून 1959 को हुआ। परिवार में कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी। मां की बीमारी के चलते सेना की नौकरी छोड़ने के बाद वे रेलवे की ठेकेदारी में सक्रिय हुए। 1990 के आसपास नसीमुद्दीन बसपा संस्थापक कांशीराम के संपर्क में आए। शुरुआत पालिका (नगर पालिका) चुनाव से हुई। 1984 में बसपा में शामिल हुए। 1991 में पहली बार बांदा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। वे बसपा के पहले मुस्लिम विधायक थे। बसपा सरकार में मिनी सीएम कहलाते थे बसपा की सभी सरकारों में वे मंत्री बने। साल 2007–2012 की बसपा सरकार में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पास 18 मंत्रालय थे और उन्हें मिनी सीएम कहा जाता था। नसीमुद्दीन बसपा में बहन मायावती के सबसे करीबी लोगों में गिने जाते थे। टिकट बंटवारे से लेकर वित्तीय मामलों और पार्टी संगठन में उनका दखल रहता था। 2012–2017 तक वे विपक्ष के नेता भी रहे। 2017 में मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। इसके बाद उन्होंने नई पार्टी बना ली। फिर 2018 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। पार्टी ने उन्हें मुस्लिम चेहरे के तौर पर प्रमोट किया था। अब विधानसभा चुनाव से एक साल पहले उन्होंने कांग्रेस को भी अलविदा कह दिया। 24 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले नसीमुद्दीन का अब नया सियासी घर सपा बनने जा रही है। 15 फरवरी को अखिलेश यादव की मोजूदगी में वे समर्थकों के साथ सपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। ------------------- ये खबर भी पढ़ें- यूपी विधानसभा चुनाव के बाद होंगे पंचायत चुनाव:OBC आयोग की रिपोर्ट आने में लगेंगे 6 महीने, पार्टियों की भी तैयारी नहीं यूपी में पंचायत चुनाव समय पर होते नहीं दिख रहे। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकार ने ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग बनाने का आश्वासन दिया है। इस आश्वासन और राजनीतिक दलों की चुनावी तैयारी के मद्देनजर साफ है कि अब यूपी में पंचायत चुनाव, विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही कराए जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर
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