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    अखिलेश की मां पर कमेंट कर घिरीं लखनऊ मेयर:भाजपा की महिला मोर्चा उपाध्यक्ष विरोध में उतरीं, सपाइयों ने नेमप्लेट पर चप्पल मारी

    3 hours ago

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    लखनऊ में महिला आरक्षण बिल को लेकर मंगलवार को भाजपा की जनाक्रोश रैली के दौरान मेयर सुषमा खर्कवाल के बयान पर बवाल बढ़ता ही जा रहा है। अब उनकी अपनी ही पार्टी के नेता उनके बयान पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष अस्मिता चंद ने कहा- भाषा की मर्यादा और दिवंगत आत्माओं के प्रति सम्मान बना रहना चाहिए। इस बीच, सुषमा खर्कवाल के खिलाफ सपा सड़कों पर उतर आई है। सपा नेताओं ने उनके नेम प्लेट पर चप्पल बरसाए। उस पर कालिख पोती। सुरक्ष के लिए लगे बैरियरों को हिला डाला। मुर्दाबाद के नारे लगाए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। दरअसल, सुषमा खर्कवाल ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा था कि अखिलेश को जिस मां ने पैदा किया, उन्होंने उनका अपमान किया है। इस पर अखिलेश ने नाराजगी जाहिर की थी। सुषमा खर्कवाल को एक सार्वजनिक पत्र भी लिखा था। मामले में मेयर सुषमा खर्कवाल ने सफाई भी दी है। कहा- मैं किसी की मां को क्यों गाली दूंगी? कहीं भी यह बता दिया जाए कि मैंने गाली दी है। मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की मांग अखिलेश ने की। जब धर्म पर देश बंटा तो यह आरक्षण पाकिस्तान में जाकर मांगिए। मैंने आधी आबादी की बात रखी थी। सबसे पहले पूरा मामला समझ लेते हैं… अब अखिलेश का पलटवार पढ़ लेते हैं… अस्मिता चंद बोलीं- हमें विरोध नीतियों का करना है स्मृतियों का नहीं भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष अस्मिता चंद ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। लिखा- राजनीति में हम विचारधारा और नीतियों पर लड़ते हैं, लेकिन हमारे संस्कार सिखाते हैं कि मातृशक्ति का स्थान सबसे ऊपर होता है। लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने अखिलेश यादव की दिवंगत मां का जिक्र जिस संदर्भ में किया है, वह हमारी भाजपा की उस संस्कृति से मेल नहीं खाता है, जहां पर हम महिलाओं के सम्मान को ही अपना परम धर्म मानते हैं। उन्होंने लिखा- महिला आरक्षण बिल जैसे गौरवशाली विषय पर चर्चा के दौरान किसी ऐसे व्यक्ति की कोख और जन्म पर कटाक्ष करना, जो इस दुनिया में नहीं है, हमारे नैतिक मानकों के अनुकूल नहीं है। भाजपा परिवार का सदस्य होने के नाते हमें गर्व है कि हमारी पार्टी नारी शक्ति वंदन जैसे कार्यों से महिलाओं को सशक्त बना रही है। लेकिन, सशक्तिकरण की इस यात्रा में भाषा की मर्यादा और दिवंगत आत्माओं के प्रति सम्मान बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा- राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अपनी जगह पर है। लेकिन, किसी पुत्र के लिए उसकी मां की यादें हमेशा पूजनीय होती है। अंतत: हमारे शब्द ही हमारे व्यक्तित्व और पार्टी मूल्यों की पहचान होते हैं, हमें विरोध नीतियों का करना है स्मृतियों का नहीं। मार्केंडय चंद की बहू हैं अस्मिता अस्मिता चंद पूर्व मंत्री और पूर्वांचल के कद्दावर नेता रहे मार्कंडय चंद की बहू हैं। अस्मिता के जेठ सीपी चंद भाजपा के एमएलसी हैं। अस्मिता 2007 में निर्दलीय चुनाव लड़ चुकी हैं। राजनीति परिवार से होने के कारण भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें सीधे महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। सूत्रों के मुताबिक, अस्मिता बीते कुछ महीनों से संगठन में सक्रिय भी नहीं हैं। ऐसे में मेयर के खिलाफ पोस्ट से उनके सपा में जाने की अटकलों को जोर दे दिया है। प्रदेश उपाध्यक्ष महिला मोर्चा अस्मिता चंद ने कहा- मुझे जो कहना था मैंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया है, मेरा सपा से चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं हैं, वहां से सपा के विनय शंकर तिवारी जी हैं। चिल्लूपार से दावेदारी की थी अस्मिता चंद ने 2022 में गोरखपुर जिले की चिल्लूपार विधानसभा सीट से टिकट मांगा था। लेकिन, भाजपा ने चिल्लूपार से राजेश त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया। राजेश ने 2022 में हरी शंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी को चुनाव हराया था। राजेश त्रिपाठी की क्षेत्र में पकड़ के चलते 2027 में भी उनका टिकट पक्का माना जा रहा है। भाजपा में चर्चा शुरू हो गई कि अस्मिता चंद 2027 में सपा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। इसलिए उन्होंने पार्टी लाइन से इतर अखिलेश यादव के समर्थन में यह पोस्ट किया है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ लीजिए- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान लखनऊ में जाम में फंसे:शादी में शामिल हुए बिना लौटे; एक जगह दो VIP शादियों से हुई अव्यवस्था भाजपा नेता की बेटी की शादी के लिए सोमवार को लखनऊ आए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जाम में फंस गए। हालात ऐसे बने कि शादी में शिरकत किए बिना ही उन्हें वापस लौटना पड़ा। भाजपा के दिग्गज नेता का इस तरह से लौट जाना सरकार और संगठन के नेताओं के लिए किरकिरी का सबब बन गया। पूरी खबर पढ़िए
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