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    अखिलेश यादव के बयान पर नाराज हुई संत समिति:स्वामी जितेंद्रानंद बोले- सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का पालन अनिवार्य

    13 hours ago

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    अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी को लेकर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। अखिलेश यादव के उस बयान—“कान छेदाने और भगवा वस्त्र पहन लेने से कोई योगी नहीं हो जाता”—पर संत समाज और विभिन्न संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। इसी क्रम में अखिल भारतीय संत समिति से जुड़े स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे भाषाई मर्यादा के विपरीत बताया है। क्या कहा स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने? स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अपने बयान में कहा कि राजनीति करना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का पालन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि किसी भी साधु, संत या सन्यासी के पद और परंपरा पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि “किसी के साधु या योगी होने का प्रमाणपत्र बांटने का अधिकार किसी राजनीतिक व्यक्ति को नहीं है।” स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने शंकराचार्य पद को लेकर चल रहे विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि जब किसी मामले का शीर्षक वाद (टाइटल सूट) न्यायालय में लंबित हो, तब उस पद की वैधता या उत्तराधिकार को लेकर राजनीतिक बयान देना कानून और न्यायिक प्रक्रिया का अनादर है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वयं संबंधित पक्ष द्वारा पूर्व में दिए गए इंटरव्यू में स्पष्ट किया गया था कि शंकराचार्य पद वसीयत से तय नहीं होता, बल्कि यह योग्यता और परंपरा का विषय है। योगी आदित्यनाथ की परंपरा का किया उल्लेख स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि योगी आदित्यनाथ नाथ पंथ की परंपरा से जुड़े हैं और गोरखनाथ मठ की पीठ से तीसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं।उन्होंने परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्रम में महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवैद्यनाथ और वर्तमान में महंत योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व की भूमिका निभाई है। स्वामी जितेंद्रानंद ने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ चार बार सांसद रह चुके हैं और पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। अखिलेश का पलटवार- कान छिदवाने से आप योगी नहीं हो जाते सीएम योगी पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पलटवार किया। उन्होंने कहा- यह योगी हो सकते हैं क्या? इन्हें योगी होने का किसने सर्टिफिकेट दिया। हिंदू परंपरा में बहुत कुछ साफ है। जहां गेरुआ वस्त्र होता है, हम उन्हें सम्मान से देखते हैं। लेकिन योगीजी, जो हमारे मुख्यमंत्री है, उन्हें कोई सम्मान नहीं है। वस्त्र पहनने, कान छिदवाने से आप योगी नहीं हो जाते हैं। आपके अंदर डिजायर (इच्छा) है तो आप योगी नहीं हो सकते। हमारे पूजनीय शंकराचार्य, जिनका सभी सम्मान करते हैं, उन्हें स्नान नहीं करने दिया। जब से धरती है, किसी ने संतों को गंगा स्नान करने से नहीं रोका। ये पहले हैं, जिन्होंने स्नान करने से रोका है। इन्हें पाप पड़ेगा तो कौन बचा लेगा।
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