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    अमेठी में पारा 30 डिग्री पार, किसान चिंतित:सिंचाई लागत बढ़ी, डीएम ने नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए

    2 hours ago

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    अमेठी में फरवरी माह में ही तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे गेहूं की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सामान्य से पहले बढ़ी गर्मी के कारण खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे किसान चिंतित हैं। जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को नहरों में पानी छोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जिले में तापमान में यह अप्रत्याशित वृद्धि गेहूं की फसल के लिए चिंता का विषय बन गई है। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए बार-बार सिंचाई करने को मजबूर हैं। इससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है, जिससे संभावित लाभ में कमी आ सकती है। किसानों का कहना है कि गेहूं में दाना भराव के समय ठंडक आवश्यक होती है। अधिक तापमान के कारण बालियां समय से पहले पकने लगती हैं, जिससे दाना हल्का रह सकता है। अमेठी के किसान सूर्यभान द्विवेदी और राम कुमार पांडेय ने बताया कि उन्हें इस समय एक अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे डीजल और बिजली का खर्च बढ़ गया है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश यादव ने बताया कि तापमान में वृद्धि का असर गेहूं की पैदावार पर पड़ता है। उन्होंने किसानों को खेत की नियमित निगरानी करने और आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। डॉ. यादव ने नमी संरक्षण के लिए खेतों में मेड़ों की मरम्मत और खरपतवार नियंत्रण को भी महत्वपूर्ण बताया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी संजय चौहान ने सिंचाई विभाग को नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि किसान अपने ट्यूबवेल का संचालन कर सकें। जिलाधिकारी ने सिंचाई संसाधनों की उपलब्धता पर लगातार नजर रखने की बात कही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मार्च में तापमान और बढ़ता है, तो गेहूं का उत्पादन और अधिक प्रभावित हो सकता है। ऐसे में समय पर पानी और संतुलित पोषण प्रबंधन बेहद अहम होगा। किसान वर्तमान में मौसम के रुझान पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं और अपनी फसल की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।
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