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    Annamalai ने Nitin Nabin और Amit Shah से की मुलाकात, दिल्ली में सीक्रेट मीटिंग्स में बना बड़ा Game Plan!

    11 hours ago

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    तमिलनाडु की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा नाम यदि किसी का गूंज रहा है, तो वह के. अन्नामलाई हैं। दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी लगातार बैठकों ने साफ संकेत दे दिया है कि राज्य की राजनीति में अब बड़ा भूचाल आने वाला है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा संगठन महासचिव बीएल संतोष से मुलाकातों के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि अन्नामलाई अब अपनी स्वतंत्र राजनीतिक राह तय करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जिस नेता ने अपने दम पर तमिलनाडु में भाजपा को नई पहचान दी, गांव गांव तक संगठन को पहुंचाया और युवाओं के बीच जबरदस्त जनसमर्थन खड़ा किया, वही अन्नामलाई अब राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की पटकथा लिखते दिखाई दे रहे हैं। समर्थकों का मानना है कि यह तमिलनाडु में नई राजनीतिक क्रांति की शुरुआत हो सकती है।सूत्रों के अनुसार अन्नामलाई ने पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और साथ ही तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर पांच पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट भी दी है। हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से किसी नई पार्टी की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि अन्नामलाई जल्द ही एक नए राजनीतिक मंच की शुरुआत कर सकते हैं। दिल्ली में इस तरह की भी चर्चाएं हैं कि अन्नामलाई के इस्तीफे की खबरें गलत हैं और आज रात को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन अन्नामलाई से दूसरे दौर की वार्ता करेंगे उसके बाद तमिलनाडु में प्रेस वार्ता के माध्यम से अन्नामलाई अपने अगले कदम की जानकारी देंगे। इसे भी पढ़ें: Annamalai-Amit Shah Meeting: BJP में भविष्य पर Delhi तक अटकलों का बाजार गर्म!हम आपको बता दें कि अन्नामलाई ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वह दो दिनों के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। उनके इस बयान ने अटकलों को और तेज कर दिया है। मदुरै और कोयंबटूर जैसे शहरों में उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए पोस्टरों में उनसे तमिलनाडु को बचाने के लिए नया अवतार लेने की अपील की गई है। माना जा रहा है कि चार जून को अपने जन्मदिन पर वह कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं।हम आपको बता दें कि पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने बहुत कम समय में तमिलनाडु की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। जब उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया था, तब भाजपा राज्य में सीमित प्रभाव वाली पार्टी मानी जाती थी। लेकिन अन्नामलाई के आक्रामक जनसंपर्क अभियान, गांव गांव यात्राओं, युवा संवाद कार्यक्रमों और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ ने भाजपा को नई ऊर्जा दी। उनके नेतृत्व में पार्टी की पहुंच दूरदराज के इलाकों तक बढ़ी और पहली बार बड़ी संख्या में युवाओं ने भाजपा की ओर ध्यान देना शुरू किया।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई की सबसे बड़ी ताकत उनका स्पष्ट और निर्भीक नेतृत्व है। उन्होंने हमेशा संगठन को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। बताया जा रहा है कि वह चाहते थे कि भाजपा तमिलनाडु में अपने बल पर चुनाव लड़े और केवल गठबंधन की राजनीति पर निर्भर न रहे। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने द्रमुक विरोधी रणनीति के तहत अन्नाद्रमुक के साथ फिर से गठबंधन को प्राथमिकता दी। इसी मुद्दे को लेकर उनके और केंद्रीय नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ने की चर्चा रही। इसे भी पढ़ें: Jairam Ramesh का हमला: RSS-backed Task Force से आदिवासी जमीन पर Corporate की नजर, Modani साम्राज्य को फायदा!यही नहीं, अन्नामलाई ने हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानि सीबीएसई की तीन भाषा नीति पर भी चिंता जताई थी और इसे वापस लेने की मांग की थी। उनके इस रुख ने यह संदेश दिया कि वह तमिलनाडु के लोगों की भावनाओं को प्राथमिकता देते हैं और किसी भी मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटते। यही कारण है कि उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है जो दिल्ली और तमिलनाडु के बीच संतुलन बनाने की क्षमता रखता है।सूत्रों के अनुसार अन्नामलाई अब एक ऐसे राजनीतिक मंच की तैयारी कर रहे हैं जो तमिल पहचान और राष्ट्रीय सोच दोनों को साथ लेकर चले। उनके करीबी लोगों का कहना है कि यह नया मंच युवाओं, पेशेवरों और पहली बार राजनीति में आने वाले लोगों को अवसर देगा। बताया जा रहा है कि वह पहले एक जनआंदोलन शुरू करेंगे और बाद में उसे राजनीतिक दल का रूप दिया जा सकता है। उनके सामाजिक नेतृत्व अभियान “वी द लीडर्स” को भी इसी दिशा में एक मजबूत आधार माना जा रहा है।देखा जाये तो तमिलनाडु में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अन्नामलाई की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। अभिनेता विजय के राजनीति में आने और उनकी पार्टी के तेजी से उभरने के बाद राज्य की राजनीति में नए विकल्पों की मांग बढ़ी है। अन्नामलाई भी लगातार यह कहते रहे हैं कि तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड राजनीति अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है और युवा पीढ़ी नई सोच चाहती है।हम आपको यह भी बता दें कि तमिलनाडु में इस समय पांच विधानसभा सीटें खाली हैं और जल्द उपचुनाव की संभावना बन रही है। ऐसे में चर्चा है कि अन्नामलाई यदि नया राजनीतिक अभियान शुरू करते हैं तो उपचुनाव उनके लिए ताकत दिखाने का पहला बड़ा अवसर बन सकते हैं। समर्थकों का मानना है कि उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और संगठन क्षमता उन्हें एक मजबूत विकल्प बना सकती है।भाजपा नेतृत्व भी अभी तक उन्हें रोकने की कोशिश में लगा हुआ बताया जा रहा है। खबर है कि उन्हें राज्यसभा सीट का प्रस्ताव भी दिया गया, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि अन्नामलाई केवल पद की राजनीति नहीं बल्कि दीर्घकालिक जनआधारित नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।बहरहाल, तमिलनाडु की राजनीति में अन्नामलाई का कदम उस नई राजनीतिक चेतना का संकेत है जिसमें युवा नेतृत्व, साफ छवि और जमीन से जुड़ा संवाद सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आ रहा है। आने वाले दिनों में उनका फैसला राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि अन्नामलाई अब कौन-सा नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं।
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