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    विदेश मंत्रालय का सीधा जवाब: India-Nepal सीमा विवाद में किसी Third-Party की भूमिका नहीं

    11 hours ago

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    नेपाल के साथ सीमा विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भागीदारी को भारत ने मंगलवार को खारिज कर दिया, जबकि कुछ ही दिन पहले ऐसी खबरें आई थीं कि नेपाली प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने इस लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को सुलझाने के लिए चीन और यूनाइटेड किंगडम की भागीदारी मांगी थी। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह की ‘भारत अतिक्रमण’ वाली टिप्पणी के संबंध में मीडिया के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए विदेश मंत्री के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय मामलों का समाधान केवल दोनों देशों के बीच ही होना चाहिए और ऐसे मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। इसे भी पढ़ें: Balendra Shah के विवादित बयान के बाद Rabi Lamichhane पहुँचे India, BJP Headquarter में भव्य स्वागत, बदल गये South Asia के समीकरणउन्होंने आगे कहा कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा पहले ही सीमांकित हो चुका है, हालांकि कुछ हिस्सों में कुछ मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा पहले ही निर्धारित किया जा चुका है। हालांकि, कुछ हिस्सों में कुछ मुद्दे अनसुलझे रह गए हैं। गंडक नदी के मार्ग में परिवर्तन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जायसवाल ने आगे कहा कि इसके अलावा, कुछ सीमांकित क्षेत्रों में सीमा पार अतिक्रमण और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण के मामले हैं, जिनका संयुक्त रूप से मानचित्रण किया जा रहा है।जायसवाल की ये टिप्पणी रैपर से राजनेता बने शाह के रविवार के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि लिपुलेख दर्रे के सीमा विवाद पर भारत के साथ चर्चा के अलावा नेपाल चीन और ब्रिटेन के भी संपर्क में है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह समस्या उस समय से चली आ रही है जब ब्रिटिश भारत ने इस क्षेत्र को छोड़ा था, इसलिए हमारा मानना ​​है कि इस मामले में इंग्लैंड को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसे भी पढ़ें: Nepal India Border Dispute | सीमा विवाद पर मचे बवाल के बीच नेपाल की सफाई! 'पीएम बालेंद्र शाह का बयान केवल 'नो-मैन्स लैंड' और अवैध कब्जे को लेकर थाशाह ने संसद के मौजूदा सत्र में अपनी पहली उपस्थिति के दौरान कहा कि आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मुझे यह तथ्य प्रधानमंत्री बनने के बाद ही पता चला। केवल भारत ने ही नेपाली क्षेत्र पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है। नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है। भारत लगातार यह दावा करता रहा है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें  National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। 
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