Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Anurag Thakur और Pravesh Verma पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, समीक्षा याचिका खारिज

    18 hours ago

    1

    0

    नयी दिल्ली, तीन अगस्त उच्चतम न्यायालय ने अपने उस निर्णय की समीक्षा करने से इनकार कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि 2020 में दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भाजपा नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के कथित नफरती भाषणों से संज्ञेय अपराध का कोई मामला नहीं बनता है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता वृंदा करात और के.एम. तिवारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें शीर्ष अदालत के 29 अप्रैल के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘‘हमने पुनर्विचार याचिका और उसके समर्थन में दिए गए आधार का अवलोकन किया है।हमें उक्त आदेश में कोई त्रुटि, खासकर ऐसी कोई स्पष्ट त्रुटि, नहीं मिली, जिसके आधार पर उसपर पुनर्विचार किया जाए।’’ यह आदेश 29 जुलाई को पारित किया गया था, लेकिन इसे हाल ही में न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। न्यायालय ने 29 अप्रैल को कहा था कि ठाकुर और वर्मा के खिलाफ संज्ञेय अपराध का कोई मामला नहीं बनता है। भाजपा सांसद ठाकुर पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, वहीं वर्मा दिल्ली सरकार में मंत्री हैं।माकपा नेताओं ने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के जून 2022 के फैसले को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने करात और तिवारी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए-विरोधी प्रदर्शन के दौरान ठाकुर और वर्मा के कथित नफरती भाषणों के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने से निचली अदालत के इनकार करने को चुनौती दी गई थी। अपने फैसले में उच्चतम न्यायालय ने उल्लेख किया कि उच्च न्यायालय ने स्वतंत्र रूप से पड़ताल करने के बाद यह माना था कि भाषणों से कोई भी संज्ञेय अपराध होने का पता नहीं चलता है।साथ ही, शीर्ष अदालत ने इस बात पर भी गौर किया था कि ये बयान किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं थे और न ही इनसे हिंसा भड़की या अव्यवस्था फैली। माकपा नेताओं ने दावा किया था कि 27 जनवरी 2020 को ठाकुर ने रिठाला में एक रैली में कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि 28 जनवरी 2020 को वर्मा ने कथित तौर पर भड़काऊ और नफरती भाषण दिए थे।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Assam Flood: सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को 160 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी की
    Next Article
    Alipore Zoo में भैंस का मांस बंद होने से बढ़ा खर्च, बकरे का मांस खिलाने को मजबूर प्रशासन

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment