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    अयोध्या मेडिकल कॉलेज में दवा सप्लाई पर विवाद:बिना ऑर्डर और बिल 139 कार्टन पहुंची दवाएं, फार्मसिस्ट ने दूसरा पत्र जारी कर दी सफाई

    1 hour ago

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    अयोध्या स्थित राजर्षि दशरथ राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अयोध्या में दवाओं की आपूर्ति को लेकर गंभीर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर चल रही वायरल खबरों के मुताबिक कॉलेज के पुराने भवन के कक्ष संख्या 10 में करीब 139 कार्टन दवाएं अनियमित तरीके से रखी गईं, जिनके संबंध में न तो कोई अधिकृत ऑर्डर उपलब्ध है और न ही बिल-वाउचर प्रस्तुत किए गए हैं। यह भी कहा गया कि कई दवाओं पर “Government Supply Not for Sale” की मुहर नहीं पाई गई और न ही किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की परीक्षण रिपोर्ट संलग्न है। इस संबंध में एक वीडियो भी वायरल है। नियमों के अनुसार मेडिकल कॉलेज को दवाएं केवल उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) के माध्यम से या पंजीकृत विक्रेता से विधिवत स्थानीय खरीद प्रक्रिया के तहत ही प्राप्त करनी होती हैं। फार्मसिस्ट का पत्र और आपूर्ति का विवरण 27 फरवरी को केंद्रीय औषधि भंडार के फार्मसिस्ट द्वारा जारी एक पत्र में आरोपों की पुष्टि जैसे तथ्य सामने आने की बात कही गई। पत्र के अनुसार प्रयागराज की एक फर्म से कुल 139 बॉक्स दवाएं प्राप्त हुईं, लेकिन उनके साथ न तो ऑर्डर कॉपी दी गई और न ही बिल-इनवॉइस के दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। दस्तावेजों के अनुसार दवाओं की आपूर्ति अलग-अलग तिथियों पर हुई— 21 जनवरी 2026: 1 बॉक्स 11 फरवरी 2026: 28 बॉक्स 16 फरवरी 2026: 30 बॉक्स 25 फरवरी 2026: 80 बॉक्स कुछ खेपों के साथ डिलीवरी चालान संलग्न थे, जबकि कुछ में चालान संख्या भी अंकित नहीं थी। चालान में प्राप्तकर्ता के रूप में “चिकित्सक/स्टोर इंचार्ज, राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, अयोध्या (पिन-224133)” दर्ज बताया गया है। हालांकि संबंधित स्टोर इंचार्ज ने ऐसी किसी आपूर्ति की विधिवत स्वीकृति से इनकार किया है। अनुमति और दिशा-निर्देश मांगे गए केंद्रीय औषधि भंडार की ओर से प्राचार्य और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर बिना ऑर्डर-बिल प्राप्त दवाओं के संबंध में अनुमति व आवश्यक दिशा-निर्देश मांगे गए। मामले के सार्वजनिक होने के बाद कॉलेज प्रशासन में हलचल तेज हो गई। दूसरा पत्र जारी, पहले को बताया ‘भ्रम’ मामला सामने आने के अगले दिन फार्मसिस्ट ने दूसरा पत्र जारी कर कहा कि 27 फरवरी को जारी पत्र “भ्रमवश” जारी हुआ था और उसका कोई महत्व नहीं है। उधर कॉलेज के प्राचार्य अवकाश पर हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मर्तोलिया ने बताया कि होली अवकाश के कारण कुछ दवाएं मंगाई गई थीं, लेकिन उनकी आपूर्ति के स्रोत की जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉलेज पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी और कुछ लोग संस्थान को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। अब जांच के नतीजों पर नजर विवाद के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में दवाओं की आपूर्ति प्रक्रिया, जिम्मेदारी और नियमों के अनुपालन को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।
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