Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Bangladeshi Infiltrators पर सख्त कार्रवाई से कांपा बांग्लादेश, सीमा पर बढ़ा दिया पहरा, BSF ने दिया जवाब

    13 hours ago

    1

    0

    भारत की सीमाओं पर अब सब्र का बांध टूट चुका है। वर्षों तक वोट बैंक की राजनीति और ढीले रवैये का फायदा उठाकर भारत में घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी अब कानून के शिकंजे में हैं। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में चल रहा अभियान इस बात का साफ संकेत है कि अब देश की सुरक्षा और जनसांख्यिक संतुलन से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।इसके अलावा, दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के बीच हुई महानिदेशक स्तर की वार्ता में बांग्लादेश ने भारत पर अवैध घुसपैठियों को वापस धकेलने का आरोप लगाया। लेकिन भारत ने दो टूक जवाब देते हुए लगभग तीन हजार ऐसे मामलों का जिक्र किया जिनमें अवैध बांग्लादेशियों की पहचान और वापसी के लिए औपचारिक अनुरोध पहले से लंबित हैं। भारत ने साफ कहा कि ढाका अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता और अपने नागरिकों की पहचान कर उन्हें तुरंत वापस ले।इसे भी पढ़ें: Bangladeshi Infiltrators के खिलाफ Suvendu Adhikari का महाएक्शन, Border Areas से लेकर शहरों तक मचा हड़कंपसबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बांग्लादेश ने यह दावा करने की कोशिश की कि वापस भेजे जा रहे लोगों में कुछ म्यांमार और भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि भारतीय एजेंसियां पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि रोहिंग्या घुसपैठिए बांग्लादेश को रास्ता बनाकर भारत में दाखिल हुए। यह कोई मानवीय संकट नहीं, बल्कि सुनियोजित घुसपैठ का जाल है, जिसने सीमावर्ती राज्यों की सुरक्षा और सामाजिक ढांचे पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।इसी खतरे को पहचानते हुए पश्चिम बंगाल में शुभेन्दु अधिकारी ने जिस कठोरता के साथ अभियान छेड़ा है, वह सराहनीय ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक कदम है। सात जून को उन्होंने घोषणा की थी कि उनकी सरकार लगभग पांच हजार अवैध घुसपैठियों को वापस भेज चुकी है और आठ सौ छत्तीस लोगों को अस्थायी निरोध केंद्रों में रखा गया है। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को देश से बाहर करने का अभियान तेजी के साथ जारी रहेगा। इतना ही नहीं, सीमा पर सौ किलोमीटर तक कंटीली तार लगाने के लिए भूमि भी उपलब्ध करा दी गई है। यह वही दृढ़ इच्छाशक्ति है जिसकी देश लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहा था।उधर, बांग्लादेश की बेचैनी अब खुलकर सामने आने लगी है। खबरें बताती हैं कि पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा सीमा से लगे इलाकों में बांग्लादेश ने हथियारबंद ग्रामीण स्वयंसेवकों को तैनात किया है। चपाइनवाबगंज, ठाकुरगांव और दिनाजपुर जैसे इलाकों में ग्रामीणों को प्रशिक्षण देकर सीमा पर चौबीसों घंटे निगरानी में लगाया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि ढाका को भी समझ आ गया है कि भारत अब घुसपैठियों को ढाल बनाकर चलने वाली राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा।सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों के अनुसार, कई बांग्लादेशी नागरिक खुद वापस भागने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि भारत में अवैध रूप से रहना अब आसान नहीं रह गया। यह वही सख्ती है जिसने वर्षों से फैले घुसपैठ के नेटवर्क में डर पैदा कर दिया है। जो लोग भारत की जमीन, संसाधन और पहचान पर कब्जा जमाने आए थे, उन्हें अब कानून का असली चेहरा दिखाई दे रहा है।असम ने भी इसी दिशा में कठोर कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने घोषणा की है कि अठारह वर्ष से अधिक आयु के लोगों को आधार कार्ड जारी करने पर रोक लगाई जाएगी, ताकि अवैध बांग्लादेशी नकली पहचान बनाकर भारतीय नागरिकता का लाभ न उठा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जिलों में आधार कार्ड की संख्या सौ प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है, जो बेहद गंभीर संकेत है। यह फैसला बताता है कि अब पूर्वोत्तर के राज्य भी घुसपैठ के खिलाफ आरपार की लड़ाई के मूड़ में हैं।मेघालय में भी पुलिस ने पश्चिम गारो हिल्स जिले में पांच बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है, जबकि तीन संदिग्ध फरार हो गए। जांच में उनके पास बांग्लादेशी सिम कार्ड मिले और वे अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सके। यह घटना साबित करती है कि सीमा पार से अवैध प्रवेश का सिलसिला अब भी जारी है और इसे रोकने के लिए कठोर कार्रवाई की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है।इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनसांख्यिकी में हो रहे बदलावों का अध्ययन करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति को निर्देश दिया है कि वह सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या के स्वरूप में आए परिवर्तनों का विस्तृत अध्ययन करे। समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अमित शाह ने यह भी कहा कि समिति अवैध प्रवासन और अन्य अस्वाभाविक कारणों से हो रहे बदलावों का आकलन करने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों, महानगरों तथा औद्योगिक नगरों का दौरा करे। हम आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देशभर में घुसपैठ और अन्य अस्वाभाविक कारणों से हो रहे जनसंख्या संबंधी परिवर्तनों का मूल्यांकन करने तथा इन चुनौतियों से निपटने के उपाय सुझाने के लिए इस उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। पिछले महीने समिति के गठन की घोषणा करते हुए अमित शाह ने कहा था कि जनसंख्या संरचना में बदलाव एक गंभीर विषय है, जो केवल देश की संप्रभुता से ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, सामाजिक ढांचे में गहरे परिवर्तनों तथा जनजातीय समाज के संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा था, ‘‘यह समिति अवैध घुसपैठ और अन्य अस्वाभाविक कारणों से भारत में हो रहे जनसंख्या संबंधी परिवर्तनों का व्यापक आकलन करेगी, धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर होने वाले असामान्य जनसंख्या परिवर्तन के स्वरूप का विश्लेषण करके इसके लिए योजनाबद्ध तथा समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करेगी।''बहरहाल, देखा जाये तो आज घुसपैठियों को संदेश दिया जा रहा है कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है जहां कोई भी अवैध रूप से घुसकर बस जाए। जो लोग सीमा तोड़कर आए हैं, उन्हें वापस जाना ही होगा। शुभेन्दु अधिकारी ने जिस साहस के साथ इस मुद्दे को उठाया है, वह केवल पश्चिम बंगाल नहीं बल्कि पूरे देश के लिए उदाहरण है। अब समय आ गया है कि हर राज्य इसी दृढ़ता के साथ अवैध घुसपैठ के खिलाफ अभियान चलाए, क्योंकि राष्ट्र की सुरक्षा पर समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Uphaar अग्निकांड: 29 साल बाद भी सिस्टम ने नहीं लिया सबक? AVUT ने मांगा Accountability Law
    Next Article
    लेफ्टिनेंट जनरल Dheeraj Seth होंगे अगले COAS, 30 जून को संभालेंगे कमान

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment