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    बैडमिंटन में सात्विक-चिराग की जोड़ी हारी:पिछले एशियन गेम्स में गोल्ड जीता था; शूटर्स ने गोल्ड और सिल्वर दिलाए

    11 hours ago

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    एशियन गेम्स में शुक्रवार को बैडमिंटन से भारत के गोल्ड मेडल की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। सात्विक साईराज रंकी रेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी मेंस डबल्स के पहले राउंड से हारकर बाहर हो गई है। इस जोड़ी ने पिछले एशियन गेम्स में गोल्ड दिलाया था। इससे पहले छठे दिन शूटर्स ने भारत को 2 मिनट के अंदर 2 मेडल दिलाए। सुरुचि और कमलजीत की जोड़ी ने सुबह 9 बजे 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड इवेंट में गोल्ड जीता। फिर 9:02 बजे 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन इवेंट में भारतीय को सिल्वर मिला। भारत की पुरुष और महिला कबड्‌डी टीम फाइनल में पहुंच गई हैं। स्क्वॉश और टेबल टेनिस जैसे खेलों में भी पदक पक्के हुए हैं। इन मेडल्स के सहारे भारत मेडल टैली में 12वें स्थान आ गया है। उसने 2 गोल्ड सहित 19 मेडल जीते हैं। भारत को दूसरा गोल्ड मिला, शूटिंग में पहला भारतीय जोड़ी साउथ कोरिया से 6.6 मीटर आगे रही 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम फाइनल में सुरुचि और कमलजीत की भारतीय जोड़ी साउथ कोरिया से 6.6 अंक आगे रही। इंडिया ने 484.6 अंक हासिल किए। जबकि, साउथ कोरिया को 478.0 अंक मिले। ईरान ने 415.8 अंक के साथ ब्रॉन्ज जीता। भारत 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन टीम में नंबर-2 रहा भारतीय टीम 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन टीम इवेंट में 1762 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। इसमें चीन (1766 अंक) को गोल्ड और साउथ कोरिया (1751 अंक) को ब्रॉन्ज मिला। आज के गोल्ड मेडलिस्ट के बारे में जानिए… कमलजीत : इंजरी के बाद एथलेटिक्स छोड़ना पड़ा, शूटिंग में करियर बनाया कमलजीत हरियाणा के रेवाड़ी के सुलखा गांव के हैं। कमलजीत एथलेटिक्स में हिस्सा लेते थे। लेकिन, वे 2019 में चोट के कारण उन्हें एथलेटिक्स छोड़ना पड़ा। ऐसे में उन्होंने शूटिंग में करियर बनाया। स्ट्रगल के दौरान कमलजीत के मन में कई बार शूटिंग छोड़ने का विचार आया, लेकिन माता-पिता ने लगातार उनका साथ दिया। 2-3 साल की मेहनत के बाद उन्होंने खुद को एक अच्छे शूटर के रूप में स्थापित किया। सुरुचि : परिवार पहलवान बनाना चाहता था, शूटर बन गईं सुरुचि इंदर सिंह हरियाणा के झज्जर की 20 साल की शूटर हैं। उन्होंने 13 साल की उम्र में शूटिंग की शुरुआत की। वे भिवानी की गुरु द्रोणाचार्य शूटिंग एकेडमी में कोच सुरेश सिंह से ट्रेनिंग लेती हैं। उन्हें परिवार पहलवान बनाना चाहता था।
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