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    बागपत कलेक्ट्रेट में लंगूर मटरू चर्चा का विषय:दो साल से लोगों के साथ रहा, किसी को नहीं पहुंचाता नुकसान

    2 hours ago

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    बागपत कलेक्ट्रेट परिसर में पिछले दो वर्षों से रह रहा मटरू नामक लंगूर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।यह लंगूर जिलाधिकारी कार्यालय,जिलाधिकारी आवास और विकास भवन सहित परिसर के विभिन्न हिस्सों में देखा जाता है। बताया जाता है कि दो साल पहले मटरू लंगूर ओर उसकी मां यहां रहे थे। इसकी मां की करंट लगने से मौत हो गई थी।इसके बाद मटरू कलेक्ट्रेट के आसपास ही रहता हैं। मटरू कलेक्ट्रेट के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ घुलमिल गया है।यह कभी किसी व्यक्ति के कंधे पर बैठ जाता है तो कभी किसी का फोन ले लेता है,लेकिन इसने आज तक किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है। मटरू पहले भी कई बार सुर्खियों में आ चुका है। जब किसान अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट में धरना दे रहे थे,तब तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) अस्मिता लाल किसानों से मिलने पहुंची थीं। उस दौरान मटरू भी उनके पास आकर बैठ गया था। डीएम ने उसे दुलारा और जब वह ज्ञापन लेने के बाद जाने लगीं, तो लंगूर ने उनकी साड़ी पकड़ ली थी।इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। दो वर्षों से यह लंगूर लोगों के आसपास रहता है हाल ही में, मटरू एक बार फिर तब चर्चा में आया जब विकास भवन सभागार में तत्कालीन डीएम अस्मिता लाल और पुलिस अधीक्षक (एसपी) सूरज राय किसानों की समस्याएं सुन रहे थे। इस दौरान डीएम ने अपनी कुर्सी छोड़ी और मटरू उस पर आकर बैठ गया। इस घटना ने भी लोगों का ध्यान खींचा। कलेक्ट्रेट के कर्मचारी रमन चौहान ने मटरू की प्रशंसा करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों से यह लंगूर लोगों के आसपास रहता है। इसका व्यवहार बिल्कुल इंसानों जैसा है और यह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता। यह सभी का दुलारा है और लोग इसके लिए घर से भी खाने की चीजें लाते हैं। एक अन्य कर्मचारी राजकुमार ने कहा कि मटरू छोटे बच्चों की तरह व्यवहार करता है और हमेशा लोगों के आसपास रहता है। उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। यदि मटरू कलेक्ट्रेट में आने वाले लोगों को नहीं दिखता, तो वे उसकी चर्चा करते हैं और उसे ढूंढते हैं। राजकुमार के अनुसार, यह लंगूर अब परिवार के सदस्य जैसा बन गया है।
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