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    भारत के ऐलान से UN में भूचाल, 190 देशों में सन्नाटा

    13 hours ago

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    भारत ने संयुक्त राष्ट्र में शब्दों से ऐसी आग लगाई है जिसमें कई देशों का खतरनाक धार्मिक एजेंडा जलकर राख हो गया। जो बात संयुक्त राष्ट्र में आज तक कोई देश नहीं बोल पाया, वह भारत ने कह दी है। भारत ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र में इस तरह से धर्मांतरण का मुद्दा उठा दिया है। ग्लोबल जिहादी और ईसाई मिशनरी भारत का यह बयान सुनकर बौखला जाएंगे। यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट कमीशन में बीजेपी तमिलनाडु के स्टेट प्रेसिडेंट अश्वत्थमन अली मुथू ने अचानक धर्म परिवर्तन को पर्यावरण के लिए खतरा बता दिया है। आपको लग रहा होगा कि धर्म परिवर्तन पर्यावरण के लिए कैसे खतरा हो सकता है। यही बात सुनकर वहां मौजूद कई देश भी हैरान थे। लेकिन अश्वत्थमन ने इसके पीछे जो तर्क दिया वो हैरान करने वाला था। इसे भी पढ़ें: मैं न्यूयॉर्क आ रहा...ममदानी के गिरफ्तारी वाले बयान पर बोले नेतन्याहूअश्वत्थ अमन ने बताया कि आज तक हम ग्लोबल वार्मिंग को सिर्फ टेक्निकल और इंडस्ट्रियल नजरिए से देखते आए हैं। लेकिन अक्सर हम ग्लोबल वार्मिंग के सांस्कृतिक पहलू को नजरअंदाज कर देते हैं। अश्वत्थमन ने कहा कि अगर किसी देश में कई संस्कृतियां होंगी। कई तरह की जीवन शैलियां होंगी और जीवन जीने के अलग-अलग तरीके होंगे तो पर्यावरण पर कम दबाव पड़ेगा। जैसे हम कई देवी देवताओं को मानते हैं। आप इसे कई तरह की जीवन शैलियों के तौर पर समझ सकते हैं। अश्वतमन का मतलब है कि हम प्रकृति की हर चीज में देवता को देखते हैं। भगवान के रूप में प्रकृति को पूजते भी हैं और बचाते भी हैं। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, पर्वत, वृक्ष, नदियां हम सबको पूजते हैं। यही हमारी विविध जीवन शैली का एक तरीका है। जबकि ज्यादातर धर्म एक ईश्वर की विचारधारा पर आधारित हैं, जो सिर्फ एक ही तरह की जीवनशैली को बढ़ावा देते हैं। इसी की वजह से पर्यावरण पर दबाव बढ़ता जाता है। इसे भी पढ़ें: 'जिहाद और प्रतिरोध के अलावा कोई रास्ता नहीं', Mojtaba Khamenei ने Israel के खिलाफ Hezbollah के रुख की तारीफ़ कीअश्वत्थ ने कहा कि हम पहले ही मिस्र और रोम जैसी प्राचीन सभ्यताओं को खो चुके हैं। ऐसा धार्मिक धर्मांतरण के कारण हुआ है। दुनिया के लिए मौजूदा सभ्यताओं की रक्षा करना बहुत जरूरी है। भारत सबसे पुरानी जीवित सभ्यताओं में से एक है। ऐसे में अगर कोई भारत में धार्मिक धर्मांतरण का खेल खेलता है तो इससे भारतीय सभ्यता को भी नुकसान पहुंचता है। अश्वत्थमन ने कहा कि मेरा प्रस्ताव है कि तेजी से हो रहे धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए हमें जल्द से जल्द बड़े कदम उठाने होंगे। यहां पर उनका सीधा सा मतलब यह है कि भारत में धार्मिक धर्मांतरण रोके जाने चाहिए। भारत की सभ्यता को बचाया जाना चाहिए क्योंकि भारत की धार्मिक विविधता ही पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा वरदान है।
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