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    भारत को यूरेनियम देगा कनाडा:पीएम मोदी और कार्नी की मुलाकात, डिफेंस और एनर्जी सेक्टर में भी सहयोग करेंगे दोनों देश

    5 hours ago

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    प्रधानमंत्री मोदी और कनाडाई PM मार्क कार्नी के बीच सोमवार सुबह हैदराबाद हाउस में मुलाकात हुई। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- भारत और कनाडा के बीच निवेश-ट्रेड डील पर बातचीत हुई है। दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों के लिए एमओयू किया गया है। इससे दोनों देशों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। भारत को यूरेनियम देगा कनाडा पीएम मोदी ने कहा- सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में, हमने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक ऐतिहासिक समझौता किया है। इसके अतिरिक्त, हम छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों के विकास पर सहयोग करेंगे। कृषि, कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा में मूल्यवर्धन करना भी हमारे लक्ष्यों में शामिल है। पीएम ने पश्चिम एशिया में ईरान वार को लेकर कहा- पश्चिम एशिया में तनाव से भारत चिंतित है। भारत विश्व में शांति और स्थिरता चाहता है। हर समस्या का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए। पीएम ने आगे कहा- हम इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरता न केवल हमारे दोनों देशों बल्कि पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौतियाँ हैं। वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए इन खतरों से निपटने में हमारा घनिष्ठ सहयोग आवश्यक है। विभिन्न मौजूदा मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट है। भारत में भारत -कनाडा पल्स प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और परिपक्व संबंधों का प्रतीक है। हम रक्षा उद्योगों, समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे। इसी उद्देश्य से हमने आज भारत-कनाडा रक्षा संवाद स्थापित करने का निर्णय लिया है। 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता PM कार्नी के इस दौरे का सबसे बड़ा मकसद भारत-कनाडा के बीच 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता है। बताया जा रहा है कि यह डील करीब 3 अरब डॉलर की हो सकती है। बीबीसी के मुताबिक अगर यह समझौता होता है, तो इसे कार्नी की बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक सफलता माना जाएगा। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है। भारत और कनाडा के बीच न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट 2013 में लागू हुआ था, जिसके बाद कनाडा ने भारत को यूरेनियम सप्लाई शुरू की थी। भारत अपने तेजी से बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए और अधिक यूरेनियम खरीदना चाहता है। PM कार्नी के भारत दौरे से जुड़ी 4 तस्वीरें… भारत में निवेश को बढ़ावा दे रहा कनाडा भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। कनाडा के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से ज्यादा है। भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं। भारत से कनाडा को मुख्य निर्यात में दवाइयां, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पाद शामिल हैं। कनाडा के बड़े पेंशन फंड पहले से ही भारत में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़ा निवेश कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भारत में 100 बिलियन डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) का निवेश किया है। अब कनाडा इस निवेश को और बढ़ाना चाहता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि दोनों देशों के बीच कभी-कभी राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कनाडा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा। निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते खराब हुए साल 2023 में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए थे। कनाडा ने निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर आरोप लगाए गए थे। कनाडा के तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो ने संसद में कहा कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों को सबूत मिले हैं कि भारतीय सरकार के एजेंट इस हत्या में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे कनाडा की संप्रभुता पर हमला बताया था। भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया था। भारत का कहना था कि कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथी और आतंकवादी खुलेआम सक्रिय हैं, जो भारत के खिलाफ गतिविधियां चलाते हैं और कनाडा उन पर कार्रवाई नहीं करता। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के कई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। कनाडा ने भी भारत से व्यापार मिशन रद्द कर दिए, और दोनों तरफ से यात्रा सलाह जारी की गई। बातचीत लगभग बंद हो गई और CEPA जैसी महत्वपूर्ण चर्चाएं ठप पड़ गईं। जस्टिन ट्रूडो के पद से हटने और मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने (मार्च 2025) के बाद दोनों देशों ने रिश्ते सुधारने की कोशिश की। कनाडा में हर चौथा व्यक्ति विदेशी मूल का कनाडा दुनिया के उन देशों में है जहां प्रवासियों (इमिग्रेंट) की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 की आधिकारिक जनगणना के मुताबिक, कनाडा में लगभग 83.6 लाख (8.3 मिलियन) लोग विदेश में जन्मे हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 23% है। यह आंकड़ा स्टैटिस्टिक्स कनाडा ने जारी किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या वृद्धि में प्रवासियों का खास रोल रही है, लेकिन हाल के सालों में इस मुद्दे पर बहस भी तेज हुई है। भारतीय विदेश मंत्रायल के मुताबिक, कनाडा में भारतीय मूल के लगभग 16 लाख लोग रहते हैं। वहीं करीब 3 लाख (लगभग 3.03 लाख) लोग पाकिस्तानी मूल के हैं।
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