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    BHU के वैज्ञानिकों ने यूरिन कैंसर के इलाज की तकनीक:बिना दर्द 5 मिनट में होगा टेस्ट, शोध में तीन माइक्रोआरएनए का दिखा पैनल

    8 hours ago

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    बीएचयू के वैज्ञानिकों ने मूत्राशय कैंसर की पहचान के लिए एक नई और आसान तकनीक विकसित की है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें शरीर के अंदर कोई उपकरण डालने की जरूरत नहीं पड़ती, यानी यह पूरी तरह गैर-आक्रामक (non-invasive) है। यह शोध बीएचयू के विज्ञान संस्थान के जैव प्रौद्योगिकी विभाग और चिकित्सा विज्ञान संस्थान के यूरोलॉजी विभाग के संयुक्त प्रयास से किया गया है। इसमें वैज्ञानिकों ने पाया कि पेशाब (मूत्र) में मौजूद कुछ खास छोटे अणु, जिन्हें माइक्रोआरएनए (miRNA) कहा जाता है, कैंसर की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। बिना दर्द होगी कैंसर की जांच शोध में तीन माइक्रोआरएनए के एक समूह (पैनल) ने 90% से ज्यादा सटीकता (संवेदनशीलता) दिखाई। इसका मतलब है कि यह तकनीक शुरुआती अवस्था में ही कैंसर का पता लगाने में काफी प्रभावी हो सकती है। अभी तक मूत्राशय कैंसर की जांच के लिए सिस्टोस्कोपी जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो दर्दनाक और आक्रामक होती है। वहीं, यूरिन साइटोलॉजी टेस्ट उतना भरोसेमंद नहीं होता। नई तकनीक इन दोनों समस्याओं का समाधान दे सकती है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि ये माइक्रोआरएनए कैंसर के अलग-अलग चरणों में अलग तरह से व्यवहार करते हैं। इससे डॉक्टर न सिर्फ कैंसर का जल्दी पता लगा पाएंगे, बल्कि बीमारी की प्रगति पर भी नजर रख सकेंगे। सिर्फ पेशाब के नमूने से होगी जांच वैज्ञानिक डॉ. समरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा - यह खोज भविष्य में कैंसर जांच को आसान और मरीजों के लिए अधिक आरामदायक बना सकती है। उन्होंने बताया कि सिर्फ पेशाब के नमूने से कैंसर की पहचान संभव होना चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। कुल मिलाकर, यह नई तकनीक कैंसर की जल्दी पहचान और बेहतर इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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