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    बकरीद पर कुर्बानी तो कामाख्या में बलि... Cow Politics पर नीतीश कुमार की पार्टी ने दिया कौन सा संदेश?

    2 hours ago

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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने को लेकर दिए गए बयान के बाद एक नई बहस छिड़ गई है। वहीं दिल्ली सरकार ने बृहस्पतिवार को अधिकारियों को राष्ट्रीय राजधानी में अवैध पशु वध, अनधिकृत पशु व्यापार और पशुओं के प्रति क्रूरता के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया। कलकत्ता हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल सरकार को अगले सप्ताह मनाए जाने वाले ईद उल अजहा के मद्देनजर मांगी गई छूट के संबंध में पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया। दूसरी तरफ नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने हाल ही में एक निजी मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि आज के बदलते दौर में गाय को राजनीतिक नफा-नुकसान का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाए या नहीं, यह पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला है, लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं है कि गाय हमेशा से सभी के लिए गहरे आदर और सम्मान का प्रतीक रही है।इसे भी पढ़ें: Bihar में 'Sushasan' से समझौता नहीं, Encounter विवाद पर CM Samrat ने Tejashwi को घेरात्योहारों और धार्मिक परंपराओं पर अपनी राय रखते हुए जेडीयू नेता ने कहा कि यदि बकरीद के मौके पर कुर्बानी दी जाती है, तो दूसरी तरफ मां कामाख्या के पावन दरबार में भी बलि चढ़ाने की सनातन परंपरा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई इस मामले में 'राजनीतिक बलि' की बात कर रहा है, तो वह विषय बिल्कुल अलग है। नीरज कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि हमारा संविधान देश के हर नागरिक को अपनी बात खुलकर रखने और अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने का पूरा अधिकार देता है।इसे भी पढ़ें: बिहार की राजनीति के वर्तमान व भविष्य की 'सियासी धुरी' बन चुके हैं सीएम सम्राट चौधरीकई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा है कि ईद-उल-अजहा की नमाज पहले की तरह इस बार भी मस्जिदों और ईदगाहों में ही अदा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अलग-अलग पालियों में नमाज की व्यवस्था भी की जा सकती है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि 28 मई को होने वाली ईद-उल-अजहा के लिए प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी मस्जिदों और ईदगाहों में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि जरूरत पड़ने पर अलग-अलग इमामों के नेतृत्व में अलग-अलग समय पर नमाज अदा कराने की व्यवस्था की जा सकती है। महली ने कहा कि मुसलमान वर्षों से मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा करते आ रहे हैं और हमेशा कानून-व्यवस्था का पालन करते रहे हैं, क्योंकि नमाज केवल इबादत ही नहीं बल्कि अनुशासन भी सिखाती है। उन्होंने कहा कि वर्षों से सड़कों पर नमाज से परहेज कर मुसलमानों ने यह साबित किया है कि वे एक अनुशासित और सभ्य समुदाय हैं।
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