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    बुलंदशहर में 5 साल पुराने देवेश हत्याकांड में फैसला:बेटे के हाथ पर बने टैटू से हुई थी शिनाख्त, आरोपी को उम्रकैद की सजा

    2 hours ago

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    बुलंदशहर के डिबाई थाना क्षेत्र के बिलौना रूप बांगर के जंगलों में हुए सनसनीखेज देवेश हत्याकांड में करीब 5 साल बाद अदालत ने फैसला सुना दिया। अनूपशहर स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश विनीत चौधरी ने आरोपी रामौतार को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही हत्या और अपहरण की धाराओं में 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि आरोपी जुर्माना अदा नहीं करता है तो उसे दो साल अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी। जानिए पूरा मामला… यह मामला 13 अक्टूबर 2021 का है। वादी मुकेश कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उनका 25 वर्षीय बेटा देवेश कुमार रोज की तरह सुबह करीब 10 बजे ई-रिक्शा लेकर घर से निकला था। आमतौर पर वह शाम करीब 5 बजे तक घर लौट आता था, लेकिन उस दिन देर रात तक उसका कोई पता नहीं चला। परिजनों ने पूरी रात उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। रात करीब 8 बजे ई-रिक्शा की मरम्मत करने वाले एक मिस्त्री ने परिजनों को सूचना दी कि बिलौना रूप बांगर के जंगल में एक युवक की हत्या कर दी गई है। सूचना मिलने पर जब पिता मौके पर पहुंचे तो शव क्षत-विक्षत हालत में पड़ा हुआ था। पिता ने मृतक के दाहिने हाथ पर गुदे ‘माता रानी’ के टैटू के आधार पर उसकी पहचान अपने बेटे देवेश कुमार के रूप में की। पुलिस ने मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मृतक और संदिग्ध रामौतार के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांची गई, जिससे आरोपी की लोकेशन की पुष्टि हुई। पुलिस ने रामौतार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया सामान भी बरामद किया गया। घटनास्थल से मिली खून से सनी मिट्टी और अन्य साक्ष्यों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया था। इन वैज्ञानिक साक्ष्यों ने कोर्ट में अहम भूमिका निभाई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रवेन्दर लोधी ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में मजबूत और पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी रामौतार ने देवेश का अपहरण कर उसकी बेरहमी से हत्या की थी। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और धारा 364 (अपहरण) के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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