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    बलिया में श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ:आचार्य मोहित पाठक ने पाश्चात्य संस्कृति त्यागने का आह्वान किया

    1 hour ago

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    बलिया के हुकुम छपरा गंगा घाट पर महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम के तत्वावधान में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दौरान हनुमान जन्मोत्सव ऐतिहासिक रूप से मनाया गया। इस अवसर पर आचार्य मोहित पाठक ने वैदिक संस्कृति और प्रकृति की रक्षा का आह्वान किया। श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ और भव्य गंगा महाआरती के दिव्य संयोग ने हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार आचार्य मोहित पाठक ने इस दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम की देखरेख में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति वेदमंत्रों के सस्वर पाठ से हुई। आचार्य मोहित पाठक ने बताया कि गुरुकुल का लक्ष्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक विरासत को संजोना है। इसी कड़ी में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी में साहस और संस्कार का संचार करना था। आचार्य मोहित पाठक ने आधुनिकता की दौड़ में खोते जा रहे युवाओं को दिशा दिखाते हुए पाश्चात्य संस्कृति त्यागने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा अपने जन्मदिन पर होटलों में पिज्जा-बर्गर की पार्टियों में हजारों रुपये व्यर्थ करता है। देखें 4 तस्वीरें… आचार्य ने युवाओं से अपनी जड़ों की ओर लौटने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि विशेष दिनों पर गंगा तट पर आकर शिवार्चन करें और गंगा महाआरती संपन्न कराकर पुण्य के भागी बनें। गुरुकुलम के मंच से आचार्य ने माँ गंगा की निर्मलता, अखंडता और स्वच्छता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की जीवनरेखा है। उन्होंने सभी उपस्थित भक्तों को संकल्प दिलाया कि वे न तो स्वयं गंगा को प्रदूषित करेंगे और न ही दूसरों को करने देंगे। आचार्य ने भृगु काशी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए समाज के हर वर्ग के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के दौरान पूरा घाट 'जय श्री राम' और 'वीर हनुमान' के जयकारों से गूँज उठा। आचार्य ने बजरंगबली से सद्बुद्धि और अपार ऊर्जा प्रदान करने की प्रार्थना की, ताकि गुरुकुल के माध्यम से शुरू हुआ यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यज्ञ अविरल चलता रहे।
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