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    'बनारसी-साड़ी जैसा खूबसूरत है बनारस...कई जतन के बाद आ पाई':काशी में आशा भोसले की अंतिम बोल, 2017 के सुरगंगा महोत्सव में गिरिजादेवी संग प्रस्तुति

    2 hours ago

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    वाराणसी उतना ही सुंदर है जितनी कि यहां की सिल्क साड़ियां। इसे देखकर एहसास होता है कि हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं कितनी गहरी हैं। गंगा आरती के दौरान, जब मैं अपने बेटे आनंद के साथ नाव पर बैठी थी, तो हम इस बारे में विचार कर रहे थे कि हमारे धर्म ने समय की हर कसौटी को कैसे पार किया है। रात को गंगा घाट पर मौजूद प्रशंसकों से मुखातिब होकर कहा था कि बनारस, बनारसी साड़ी की तरह सुंदर है । मैं शिव भक्त हूँ और मेरी बहुत इच्छा थी कि मैं काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करूँ, जो कि ज्योतिर्लिंगों में से एक है। 84 साल की उम्र में अब मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि मुझे वाराणसी और पहले आना चाहिए था, यहां के घाट बहुत सुंदर हैं। मशहूर गायिका आशा भोसले के काशी में ये आखिरी शब्द थे, जब 2017 में यूनेस्को द्वारा क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क के भैसासुर घाट पर आयोजित 'सुर गंगा महोत्सव' में आशा भोसले पहली बार काशी आई थीं। संगीत महोत्सव में प्रस्तुति के दौरान बनारस के माहौल की प्रशंसा की। पहले काशी दौरा था, जिसे लेकर वह बेहद उत्साहित दिखीं। इस दौरान उन्होंने बताया कि 84 वर्ष की आयु में उनका यह पहला वाराणसी दौरा था, और वह यहां आकर बहुत खुश थीं। बोली थी कि पहली बार काशी आई हूं, लेकिन इस माहौल ने यह अहसास करा दिया कि मुझे यहां बरसों पहले ही आना चाहिए था। 84 साल की उम्र में यहां आकर मन को यही बात कचोट रही है कि अब तो बहुत देर हो गई। मैं अबतक 10 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुकी हूं। आने वाले समय में बद्रीनाथ और अमरनाथ बाबा के भी दर्शन के लिए जाउंगी ताकि द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पूरी हो सके। उन्होंने 'हर-हर महादेव' और 'भोलेनाथ की जय' का उद्घोष करके लोगों को दिल जीत लिया। घाट बहुत साफ-सुथरे हैं और शहर में जो परिवर्तन हुए वो अद्वितीय हैं। मंच पर आते ही गूंज उठी तालियां और अभिवादन कार्यक्रम के दौरान अपने बेटे आनंद भोसले का हाथ पकड़े आशा ताई मंच पर आईं और आते ही छा गईं। श्रोताओं ने अपने स्थान पर खड़े होकर उनका अभिनंदन किया तो इस अभिवादन और अपनेपन से अभिभूत आशा बोलीं, 'आपके अथाह प्यार पर मैं नि:शब्द हो गई, क्या बोलूं।' शिवनगरी पहुंची आशा ने कहा कि वह भगवान शिव की भक्त हैं। उन्होंने कहा कि प्रशंसकों की गुहार पर उन्होंने चार चुनिंदा गानों को गाकर लोगों को दिल जीत लिया। मशहूर गायिका आशा भोसले का काशी से अटूट रिश्ता था और अपने जीवन काल में महज एक बार काशी आ पाईं। परिवार के साथ घूमने निकली तो काशी का मिजाज भांप लिया। उन्होंने नगर निगम और 'पहल' संस्था द्वारा आयोजित 'सुर गंगा' संगीत महोत्सव में अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरा। आशा भोसले ने अपनी परफॉर्मेंस के दौरान 'पिया तू अब तो आजा' जैसे सदाबहार गाने गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गंगा घाट के माहौल को बेहद खूबसूरत और दिव्य बताया। बोलीं- काशी आने में देर कर दी, यहां रहूं तो शाकाहारी हो जाऊंगी कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन यूपी सरकार के राज्यमंत्री डा. नीलकंठ तिवारी और मेयर रामगोपाल मोहले ने मंच पर उनका अभिनंदन किया था। उन्होंने मंच से काशी के बारे में जमकर तारीफ की, अपने अनुभव को साझा किया। वाराणसी की अपनी पहली यात्रा के दौरान, दिग्गज गायिका आशा भोंसले ने शहर की सुंदरता और वहाँ के आध्यात्मिक माहौल को देखकर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने इस बात पर थोड़ा अफसोस भी जताया कि वह यहाँ इतनी देरी से आईं। गंगा आरती और काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के बाद उन्होंने अपने विचार साझा किए। मैंने बनारसी थाली चखी और वह वाकई लाजवाब थी। पूरा वेजिटेरियन खाना था और बहुत स्वादिष्ट था। मुझे खासतौर पर भरवां करेला और परवल बहुत पसंद आए। अगर ऐसा खाना घर पर रोज मिले तो मैं शाकाहारी हो जाऊंगी।
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