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    बरगद के नीचे रहते थे, पत्ते खाते थे उत्तम स्वामी:अब रेंज रोवर में चलते हैं; नाबालिग से रेप-यौन शोषण के आरोपों से घिरे

    13 hours ago

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    28 साल पहले महाराष्ट्र से कुछ तीर्थयात्रियों के साथ एक किशोर ऊंचाखेड़ा आश्रम में आया, साथी तो आगे चले गए किशोर आश्रम में ही रुक गया। यहीं आश्रम में गुरुजी की सेवा करता। कुछ दिनों बाद उसने महाराज जी से कहा कि, गुरुजी मेरी इच्छा है कि स्वयं का अन्न क्षेत्र खोलूं, मुझे क्या करना चाहिए? टाटम्बर महाराज ने कहा अन्नपूर्णा की साधना कर तेरा उद्देश्य पूरा होगा। वो किशोर और कोई नहीं उत्तम स्वामी थे। उत्तम स्वामी करीब एक साल यहां रहे फिर कहां गए मुझे नहीं पता…। यह बताकर त्यागी महाराज चुप हो जाते हैं। सलकनपुर देवीधाम से 10 किलोमीटर दूर ऊंचाखेड़ा गांव के नजदीक जंगल के बीच टाटम्बर स्वामी महाराज का आश्रम है। यहां के प्रमुख त्यागी महाराज चर्चित संत उत्तम स्वामी के गुरु भाई हैं। इसके बाद की कहानी बेहद दिलचस्प है। कभी गुफा में पत्ते खाकर साधना करने वाले उत्तम स्वामी ने अगले 28 वर्षों में सांसद-विधायकों की मेहरबानी से अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया। रेंज रोवर और डिफेंडर कारों के काफिले के साथ चलने वाले उत्तम स्वामी अब रेप के संगीन आरोप के कारण चर्चा में हैं। उत्तम स्वामी की पूरी कहानी पढ़िए इस ग्राउंड रिपोर्ट में… उत्तम स्वामी आश्रम के पास बरगद के पेड़ के नीचे रहते थे त्यागी जी महाराज भले ही गुरु शिष्य की अनबन पर चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन गांव वाले इसके आगे की कहानी बताते हैं। पास के गांव होलीपुरा के रामभरोस मीणा युवा उत्तम स्वामी के उन दिनों के साथी थे। मीणा बताते हैं कि, तब मैं गाय चराते हुए जंगल में जाया करता था, उत्तम स्वामी आश्रम के पास बरगद के पेड़ के नीचे रहते थे। मैं अपनी पोटली में उनके लिए हमेशा रोटी लेकर जाता, मैंने पूछा था, जब रोटी नहीं मिलती तब क्या खाते हो, उन्होंने बताया था पीपल के पत्ते पीसकर खा लेते हैं। उन्हीं के साथी खेत मालिक प्रहलाद मीणा बताते हैं, हम गाय लेकर जाते थे। उत्तम स्वामी दिखा करते थे। बाद में कहां गए हमें पता नहीं? कुछ देर की बातचीत में खुलने के बाद रामभरोस मीणा बोले, मुझे याद है कुछ समय बाद उत्तम स्वामी की टाटम्बर महाराज से बहस हो गई, महाराज ने उन्हें डांटा और गालियां दीं। रामभरोस आगे कहते हैं, मैं उनके सलकनपुर वाले आश्रम गया था, उन्हें दूर से राम-राम की थी, नरेंद्र माट साब ने मेरी फोटो उनके साथ ली। मेरी फोटो आज भी आश्रम में लगी है। क्यों नाराज हुए टाटम्बर महाराज हमेशा टाट के बोरे पहनने वाले टाटम्बर महाराज की इलाके में बड़ी प्रसिद्धि है। उनके सैकड़ों भक्त आज भी माथा टेकने आश्रम में आते हैं। टाटम्बर महाराज के उत्तराधिकारी और ग्रामीण उत्तम स्वामी के आश्रम से जाने की ठोस वजह नहीं बताते। टाटम्बर महाराज उत्तम स्वामी से नाराज हुए थे इसका जिक्र तो अधिकतर लोग करते हैं, लेकिन उत्तम स्वामी ने क्या गुरु अवज्ञा की और किस वजह से आश्रम छोड़ा इसे लेकर कई किस्से इलाके में हैं। रेहटी में मिठाई की दुकान के ऊपर रहे आश्रम से निकलने के कुछ समय बाद उत्तम रेहटी में लल्लू किशोर के साथ दिखाई दिए। सलकनपुर मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष मंगल सिंह ठाकुर बताते हैं, किशोर की रेहटी में मिठाई की दुकान थी, उत्तम स्वामी उनके साथ देखे गए। तब वे भगवा पहनते थे। लोग बताते हैं, दुकान के ऊपर ही एक कमरा था, जहां उत्तम रहे फिर कुछ दिनों बाद यहां से भी चले गए। 2004 के सिंहस्थ में उनकी मुलाकात तपन भौमिक से हुई। यहां से समर्पण सेवा समिति की नींव रखी गई जिसके अध्यक्ष तपन भौमिक हैं तो संरक्षक उत्तम स्वामी। महाराज के आश्रमों के प्रबंधन को भौमिक देखते हैं। इसके बाद उत्तम स्वामी की संघ और भाजपा से नजदीकी होती गई। सलकनपुर के पूर्व सरपंच विपत उइके बताते हैं एक बार हम उज्जैन गए तब उनके आश्रम की भव्यता और मिलने वाले अधिकारियों नेताओं की कतार देखी तो पता चला कि जिन्हें हम मामूली समझते हैं वे तो बड़े आदमी बन चुके हैं। अब तो कई कार्यक्रमों में उत्तम स्वामी के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री, मंत्रियों से लेकर विधायक और संघ प्रमुख तक शामिल दिखते हैं। सलकनपुर में दूसरी पारी: आश्रम, स्कूल-कॉलेज बनाए 1999-2000 के बाद इलाके से गए उत्तम स्वामी 2015-16 के बाद एक बार फिर इस इलाके में सक्रिय हुए। 2017-18 में सलकनपुर पहाड़ी के नीचे समर्पण सेवा समिति की स्थापना की। सामुदायिक भवन के नाम से बना भवन बाद में उनका आश्रम बन गया। बगल में कृषि काॅलेज और स्कूल खोल लिए । आश्रम में अब तीन मंजिला भवन बन चुका है। परिसर का प्रबंधन देखने वाले समिति के सचिव मनोज देशमुख बताते हैं, यह आश्रम खाली पड़ा है। महाराज जी केवल शरद पूर्णिमा पर यहां आते हैं। पिछली बार नर्मदा परिक्रमा के लिए आए थे। जब वे आते हैं तब कई लोग यहां आते हैं। बाकी समय यह वीरान ही रहता है। रेप के आरोपों के बाद यहां कोई नहीं आया। आश्रम पर सरकारी धनराशि के दुरुपयोग के आरोप सलकनपुर पंचायत की सरपंच मंजू दाहिमा बताती हैं, स्वामी जी का आश्रम सेवा समर्पण समिति हमारी ही पंचायत में आता है। आश्रम को 2019–20 में सांसद निधि से 30 लाख रुपए जारी किए गए। इस राशि से सामुदायिक भवन के नाम पर बड़ी बिल्डिंग बनाई गई और अब पंचायत क्षेत्र का कोई नागरिक यहां सीधे जा तक नहीं सकता, सामुदायिक भवन का उपयोग तो दूर की बात है। सरपंच दाहिमा कहती हैं, सांसद, विधायकों और नेताओं के पास आश्रम को देने के लिए लाखों रुपए हैं, लेकिन पंचायत को देने के लिए कुछ नहीं है। हमारी पंचायत में कोई काम तक नहीं हो पा रहे जबकि आश्रम में मंजिल पर मंजिल बनती जा रही हैं। महाराज के काफिले में 100 से ज्यादा गाड़ियां सलकनपुर, रेहटी, आंवलीघाट सहित आसपास के इलाके में उत्तम स्वामी के रसूख के चर्चे लोगों की जुबान पर हैं। शरद पूर्णिमा पर जब उत्तम स्वामी आते हैं, तब यहां मेले जैसा माहौल बन जाता है। कई मंत्री-विधायक और वीआईपी यहां आते हैं। उत्तम स्वामी 100 से ज्यादा गाड़ियों के काफिले के साथ चलते हैं। वे खुद रेंज रोवर या टोयोटा की लग्जरी गाड़ियों से चलते हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर भी कई राजनीतिक हस्तियों के साथ से लेकर लग्जरी गाड़ियां नजर आती हैं जो उनके रसूख को बयां करती हैं। कुछ सालों में कहां से आई इतनी दौलत? कभी आश्रम में सामान्य सेवक रहने वाले एक युवक के पास इतनी कारें, आश्रम कहां से आए? इस पर सवाल भी उठ रहे हैं। सलकनपुर व्यापारी संघ के अध्यक्ष अनिरुद्ध दुबे बताते हैं, बस 15–20 साल पहले जो व्यक्ति अकेला घूमता था वह आज रेंज–रोवर, डिफेंडर जैसी गाड़ियों के काफिले से घूम रहा है। दानपत्रों पर किसानों की जमीन लेकर आश्रम बन गए हैं। कोई 50 हजार दान कर रहा है तो कोई लाख रुपए। यह सब भव्यता अचानक कहां से आ रही है? इसकी जांच होनी चाहिए। सफलता की यात्रा – युवती ने लगाए हैं दुष्कर्म-यौन शोषण के आरोप उत्तम स्वामी पर राजस्थान की एक युवती ने दुष्कर्म और यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को ई-मेल भेजकर शिकायत दर्ज कराई जिसमें कहा गया है कि खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले उत्तम स्वामी ने अध्यात्म के नाम पर नाबालिग अवस्था से शोषण शुरु किया और वर्षों तक विभिन्न आश्रमों और होटलों में ले जाकर शोषण किया। युवती का कहना है कि शिकायत करने के बाद से उसे धमकियां मिल रही हैं। आरोप लगने के समय उत्तम स्वामी जबलपुर में कथा कर रहे थे। मामला सामने आने के बाद उत्तम स्वामी कथा छोड़कर अज्ञातवास पर चले गए हैं। इसके बाद एक बार फिर युवती ने अपने और भाई सहित परिवार को धमकी मिलने की बात कहते हुए 24 घंटे सुरक्षा और वर्तमान निवास को गोपनीय रखने की मांग की है। पीड़िता का परिवार महाराज से जुड़ा दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने सेवा समर्पण ट्रस्ट के अध्यक्ष तपन भौमिक से मौके पर पहुंचकर चर्चा की तो उन्होंने कहा कि उत्तम स्वामी महाराज बहुत बड़े संत हैं। कई प्रदेशों में उनके सेवा के प्रकल्प चल रहे हैं। वे साल में केवल शरद पूर्णिमा के अवसर पर सलकनपुर आश्रम आते थे, उस समय यहां हजारों लोग आते हैं, भोजन प्रसादी चलती है। उनके कई शिष्य हैं, 5 लाख से अधिक लोग उनके शिष्य हैं। उन्हीं के सहयोग से सब तैयार हुआ है। भौमिक बताते हैं, पीड़िता का जहां तक सवाल है वह सच बोल रही या झूठ बोल रही हमें नहीं पता। अभी तो केवल आरोप हैं। पीड़िता का परिवार भी महाराज जी से जुड़ा है। आश्रम पर विकास निधि से खर्च के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकारी राशि से जो सामुदायिक भवन बना वह आज भी सामुदायिक भवन है, कथा वगैरह होती है, बाकी निर्माण हमारे हैंं।
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